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Kurukshetra News: किसानों को कीटों से बचाव का दिया सुझाव
Mon, 18 May 2026 03:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Mon, 18 May 2026 03:20 AM IST
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कुरुक्षेत्र। गर्मी के मौसम में टमाटर और बैंगन का प्रयोग प्रमुखता से होता है। सब्जियों में इन का नियमित प्रयोग भी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार टमाटर और बैंगन में कीट लगने की शिकायत अक्सर देखने को मिलती है।
किसानों एवं किचन गार्डनिंग करने वालों को सब्जियों में कीट लगने की समस्या से समय रहते उपाय करने से बचा जा सकता है। डाॅ. सीबी सिंह ने विशेषकर टमाटर और बैंगन में फल छेदक कीट से बचाव के लिए कई उपाय बताए। इसमें जैविक तरीके, कीटनाशकों का उपयोग और फसल चक्र का पालन कर भी बचा जा सकता है। नीम के तेल और नीम के पत्तों के अर्क का छिड़काव करने से कीटों को नियंत्रित किया जा सकता है। डाॅ. सिंह ने किसानों को सुझाव दिया कि लगातार बैंगन या टमाटर की खेती से बचें और फसल चक्र का पालन करें। प्रभावित पौधों एवं फलों को हाथ से चुनकर या नष्ट करके कीटों को नियंत्रित किया जा सकता है। किसानों को सब्जियों एवं फलों को छेदक कीटों से बचाव के लिए किसी भी प्रकार के कीटनाशक का प्रयोग करने से पूर्व कृषि विशेषज्ञों एवं अधिकारियों से परामर्श अवश्य करना चाहिए। कुछ कीटनाशक जैसे कि स्पाइनोसेड, इमामेक्टिन बेंजोएट और क्लोरएंट्रानिलिप्रोल फल छेदक कीट को नियंत्रित करने में प्रभावी साबित हुए हैं। सेविमॉल, एंड्रिन, मैलाथियान इत्यादि कीटनाशकों का नियमित अंतराल पर छिड़काव करने से कीटों का प्रकोप नियंत्रित किया जा सकता है। पौधों का नियमित निरीक्षण करके कीटों के शुरुआती लक्षणों का पता लगाएं और समय पर कार्रवाई करें। संवाद
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किसानों एवं किचन गार्डनिंग करने वालों को सब्जियों में कीट लगने की समस्या से समय रहते उपाय करने से बचा जा सकता है। डाॅ. सीबी सिंह ने विशेषकर टमाटर और बैंगन में फल छेदक कीट से बचाव के लिए कई उपाय बताए। इसमें जैविक तरीके, कीटनाशकों का उपयोग और फसल चक्र का पालन कर भी बचा जा सकता है। नीम के तेल और नीम के पत्तों के अर्क का छिड़काव करने से कीटों को नियंत्रित किया जा सकता है। डाॅ. सिंह ने किसानों को सुझाव दिया कि लगातार बैंगन या टमाटर की खेती से बचें और फसल चक्र का पालन करें। प्रभावित पौधों एवं फलों को हाथ से चुनकर या नष्ट करके कीटों को नियंत्रित किया जा सकता है। किसानों को सब्जियों एवं फलों को छेदक कीटों से बचाव के लिए किसी भी प्रकार के कीटनाशक का प्रयोग करने से पूर्व कृषि विशेषज्ञों एवं अधिकारियों से परामर्श अवश्य करना चाहिए। कुछ कीटनाशक जैसे कि स्पाइनोसेड, इमामेक्टिन बेंजोएट और क्लोरएंट्रानिलिप्रोल फल छेदक कीट को नियंत्रित करने में प्रभावी साबित हुए हैं। सेविमॉल, एंड्रिन, मैलाथियान इत्यादि कीटनाशकों का नियमित अंतराल पर छिड़काव करने से कीटों का प्रकोप नियंत्रित किया जा सकता है। पौधों का नियमित निरीक्षण करके कीटों के शुरुआती लक्षणों का पता लगाएं और समय पर कार्रवाई करें। संवाद
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