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तालिबान की हुकूमत के बाद अफगानी विद्यार्थियों की बढ़ गई मुश्किलें, अपनों की चिंता के साथ भविष्य का सता रहा डर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 18 Aug 2021 12:29 AM IST
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Studies completed, visa over, Afghan students are harassed by fear of future
अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत के बाद कुरुक्षेत्र राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे अफगानी विद्यार्थियों को अपने भविष्य की ही नहीं, बल्कि परिवार और सगे संबंधियों की चिंता सताने लगी है। दरअसल, इंडियन काउंसलिंग फॉर कल्चरल रिलेशन (आईसीसीआर) के तहत 25 से 30 अफगानी विद्यार्थी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और 8 से 10 विद्यार्थी एनआईटी से विभिन्न पाठ्यक्रमों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें से कुछ विद्यार्थी ऐसे हैं जो डिग्री पूरी कर चुके हैं और आगामी कुछ दिनों को उनके वीजा की अवधि भी समाप्त हो जाएगी। अफगानिस्तान में बिगड़े हालातों में विद्यार्थी वापस अपने वतन लौटने को इच्छुक नहीं हैं। डिग्री पूरी होने के बाद विद्यार्थियों ने जहां विश्वविद्यालय और एनआईटी प्रशासन से अन्य किसी कोर्स में दाखिला देने की गुहार लगाई है, वहीं भारत सरकार से हालात सामान्य होने तक वीजा की अवधि बढ़ाने की मांग की है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पूर्व शोधार्थी डॉ. रमेश ने कहा कि मुश्किल की इस घड़ी में भारत सरकार को अफगानिस्तान का साथ देना चाहिए और जिन विद्यार्थियों की डिग्री पूरी हो चुकी है, उन्हें किसी अन्य कोर्स में दाखिला देना चाहिए।
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अफगानी विद्यार्थियों का कहना है कि उनकी मुश्किलें तो बढ़ ही गई हैं, लेकिन अपने परिवार की चिंता भी सता रही है। आगे क्या होगा, कब हालात सामान्य होंगे, उनके भविष्य का क्या होगा, यह सोचकर वे परेशान हैं। उनका कहना है कि जीवन में पहली बार ऐसी परिस्थितियां देखी हैं। रोज घरवालों से वीडियो कॉल से बात होती है। अब अफगानिस्तान का भविष्य क्या होगा। बच्चों, महिलाओं और युवाओं की चिंता है। भविष्य को लेकर डर है। संवाद
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अफगानिस्तान वासी 23 वर्षीय हबीबुल्लाह ने बताया कि वह एनआईटी कुरुक्षेत्र में बीटेक सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। उसकी डिग्री पूरी हो गई है और अब 31 अगस्त को वीजा खत्म हो जाएगा। जब पढ़ाई चल रही थी तो आईसीसीआर द्वारा स्कॉलरशिप मिल रही थी, जिससे खर्चा चल रहा था। अब वीजा खत्म होने के बाद यहां कैसे रुक पाएंगे। घर से भी अब कोई आर्थिक मदद नहीं मिल पा रही है। हबीबुल्लाह ने बताया कि वह तीन साल से अपने घर नहीं गया। अब दिन में 10-10 बार घर पर बात हो रही है। फिलहाल वहां परिजन महफूज हैं, लेकिन आगे क्या होगा इस बारे में कुछ नहीं पता। परिजन कह रहे हैं कि तुम भारत में ही रहो यहां मत आना।
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26 वर्षीय अरिफा इब्राहिमी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में एमएससी बॉटनी की छात्रा थी। उसकी डिग्री पूरी हो गई है और 14 अगस्त की वापसी की टिकट बुक थी, लेकिन अफगानिस्तान की सभी फ्लाइट अब बंद हो चुकी है। परिजन फोन पर कह रहे हैं कि यहां मत आना। वीजा खत्म हो चुका है और पढ़ाई भी। यहां रुकने के लिए बड़ा आर्थिक संकट सामने खड़ा हो गया है। वह चाहती है कि किसी प्रकार उसे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में किसी शॉर्ट टर्म कोर्स में दाखिला दे दिया जाए, ताकि वह यहां रुक सके और आईसीसीआर द्वारा स्कॉलरशिप भी मिल सके। इब्राहिमी ने बताया कि वहां उसके परिवार में सात सदस्य हैं। परिवार का खर्च बड़ी बहन उठाती है।
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