{"_id":"68af62c70ce56d001e09af33","slug":"students-prepared-model-rockets-in-the-name-of-cv-raman-and-aryabhatta-kurukshetra-news-c-45-1-sknl1005-141135-2025-08-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: विद्यार्थियों ने सीवी रमन और आर्यभट्ट के नाम पर तैयार किए मॉडल रॉकेट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: विद्यार्थियों ने सीवी रमन और आर्यभट्ट के नाम पर तैयार किए मॉडल रॉकेट
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर आयोजि
- फोटो : सिर पर पंखा गिरने से घायल छात्रा।
कुरुक्षेत्र। राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के केशव सदन में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इन इंडिया तथा शिक्षा विभाग हरियाणा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में पिहोवा, थानेसर, लाडवा, पिपली तथा बाबैन खंड से आए लगभग 200 विद्यार्थियों और 40 शिक्षकों ने भाग लिया।
विद्यार्थियों ने अपने-अपने मॉडल रॉकेट प्रसिद्ध वैज्ञानिकों सीवी रमन, आर्यभट्ट, मैक्सवेल, आइंस्टीन आदि के नाम पर तैयार किए। इनमें से 14 रॉकेट को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया जिसने कार्यक्रम का आकर्षण और भी बढ़ा दिया। प्रक्षेपण के दौरान विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। इस अनुभव ने उन्हें विज्ञान और नवाचार की ओर प्रेरित किया।
इस मौके पर जिला विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. तरसेम कौशिक, सतबीर कौशिक, धर्मवीर मौजूद रहे। संस्था के संयोजक महिपाल शर्मा ने विद्यार्थियों को अंतरिक्ष दिवस शपथ दिलाई तथा संस्था की गतिविधियों से अवगत करवाया। वरिष्ठ सदस्य प्रो. किया धरमवीर ने अंतरिक्ष विज्ञान विषय पर ओपन क्विज आयोजित की, जिसमें विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया।
विज्ञापन
वैज्ञानिक सोच, सृजनात्मकता और सामूहिक कार्य शैली का प्रतीक रॉकेट निर्माण : कौशिक
कार्यक्रम में मुख्यातिथि जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक ने कहा कि रॉकेट निर्माण और उसका प्रक्षेपण केवल एक प्रयोग भर नहीं है, बल्कि यह हमारी वैज्ञानिक सोच, सृजनात्मकता और सामूहिक कार्य शैली का प्रतीक है। विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रयोगशालाओं और कार्यशालाओं के माध्यम से ही उसका वास्तविक ज्ञान प्राप्त होता है। आज के बच्चे ही कल के वैज्ञानिक, शोधकर्ता और नीति-निर्माता हैं। यदि आप जिज्ञासु बने रहेंगे और निरंतर प्रयोग करते रहेंगे तो आने वाले समय में निश्चित ही भारत को अंतरिक्ष विज्ञान की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे। विद्यार्थी केवल प्रतियोगिता में भाग लेने तक ही सीमित न रहें, बल्कि विज्ञान को अपने जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाएं।
कार्यक्रम के अंतर्गत अमन कुमार (सहायक प्रबंधक) व गुलशन कुमार (प्रोजेक्ट सहायक) के निर्देशन में विद्यार्थियों को 25 समूहों में विभाजित कर रॉकेट निर्माण कार्यशाला कराई गई।
विज्ञापन
विद्यार्थियों ने अपने-अपने मॉडल रॉकेट प्रसिद्ध वैज्ञानिकों सीवी रमन, आर्यभट्ट, मैक्सवेल, आइंस्टीन आदि के नाम पर तैयार किए। इनमें से 14 रॉकेट को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया जिसने कार्यक्रम का आकर्षण और भी बढ़ा दिया। प्रक्षेपण के दौरान विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। इस अनुभव ने उन्हें विज्ञान और नवाचार की ओर प्रेरित किया।
विज्ञापन
इस मौके पर जिला विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. तरसेम कौशिक, सतबीर कौशिक, धर्मवीर मौजूद रहे। संस्था के संयोजक महिपाल शर्मा ने विद्यार्थियों को अंतरिक्ष दिवस शपथ दिलाई तथा संस्था की गतिविधियों से अवगत करवाया। वरिष्ठ सदस्य प्रो. किया धरमवीर ने अंतरिक्ष विज्ञान विषय पर ओपन क्विज आयोजित की, जिसमें विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया।
विज्ञापन
वैज्ञानिक सोच, सृजनात्मकता और सामूहिक कार्य शैली का प्रतीक रॉकेट निर्माण : कौशिक
कार्यक्रम में मुख्यातिथि जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक ने कहा कि रॉकेट निर्माण और उसका प्रक्षेपण केवल एक प्रयोग भर नहीं है, बल्कि यह हमारी वैज्ञानिक सोच, सृजनात्मकता और सामूहिक कार्य शैली का प्रतीक है। विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रयोगशालाओं और कार्यशालाओं के माध्यम से ही उसका वास्तविक ज्ञान प्राप्त होता है। आज के बच्चे ही कल के वैज्ञानिक, शोधकर्ता और नीति-निर्माता हैं। यदि आप जिज्ञासु बने रहेंगे और निरंतर प्रयोग करते रहेंगे तो आने वाले समय में निश्चित ही भारत को अंतरिक्ष विज्ञान की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे। विद्यार्थी केवल प्रतियोगिता में भाग लेने तक ही सीमित न रहें, बल्कि विज्ञान को अपने जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाएं।
कार्यक्रम के अंतर्गत अमन कुमार (सहायक प्रबंधक) व गुलशन कुमार (प्रोजेक्ट सहायक) के निर्देशन में विद्यार्थियों को 25 समूहों में विभाजित कर रॉकेट निर्माण कार्यशाला कराई गई।