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Kurukshetra News: भविष्य संवारने की जद्दोजहद में तनाव नहीं झेल पा रहे छात्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 10 Apr 2026 03:12 AM IST
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Students are unable to bear the stress in their struggle to build their future.
कुरुक्षेत्र। एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र भविष्य संवारने की जद्दोजहद में मानसिक तनाव नहीं झेल पा रहे हैं। ऐसे मेंं वह अतिवादी कदम उठाकर मौत को गले लगा रहे हैं। स्कूली शिक्षा के बाद बेहतर जीवन बनाने के सपने संजोकर इन संस्थानों में पहुंच रहे छात्र विपरीत हालात नहीं झेल पा रहे।
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यही कारण है कि विभिन्न परिस्थितियों में मानसिक दबाव के चलते मौत को गले लगा रहे हैं। एनआईटी में ही दो माह में तीन छात्रों द्वारा आत्महत्या कर लेने से अनेक सवाल खड़े हो रहे हैं। इस तरह की घटनाओं में न केवल छात्रों की जिंदगी खत्म हो रही बल्कि परिवारों के भी सपने टूट रहे हैं। लगातार हुई तीन घटनाओं ने यहां पढ़ाई कर रहे अन्य छात्रों से लेकर कर्मियों तक को झकझोर दिया है।
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बुधवार को छात्र प्रियांशु की मौत के बाद पूरे संस्थान परिसर में मायूसी छाई रही और हर जगह इन छात्रों की मौत के पीछे के कारण जानने की उत्सुकता रही। एनआईटी में घट रही ये घटनाएं छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के दबाव को उजागर कर रही है। छात्र 10 वीं के बाद ही एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में पढ़ाई की कड़ी प्रतिस्पर्धा के लिए जेई पेपर की तैयारी में जुट जाते हैं और इसके बाद ही वह यहां तक पहुंच पाते हैं। यहां भी लगातार परीक्षाओं का बोझ, हॉस्टल जीवन की तनावपूर्ण स्थिति और भविष्य की अनिश्चितता कई छात्रों को मानसिक संकट में डाल रही है। इसी बात की कर रही हैं नौ अप्रैल, 31 मार्च व 16 फरवरी को हुई ये घटनाएं। 31 मार्च को जब नूंह जिले के रहने वाले बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर के छात्र पवन कुमार ने छात्रावास नंबर आठ के अपने कमरे में पंखे से फंदा लगाकर जान दे दी।
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प्रियांशु की मौत से करीब 10 दिन पहले ही यह दुखद घटना घटी थी। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है और जांच शुरू की थी। मृतक के कमरे से एक डायरी बरामद हुई है, जिसमें कर्ज का जिक्र मिला है। परिवार और दोस्तों ने विभिन्न आरोप लगाए हैं, पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
इससे पहले 16 फरवरी को तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले के माहेश्वरम गांव निवासी 19 वर्षीय छात्र अमगोत सिवा ने भी एनआईटी के छात्रावास में पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या की थी। वह कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के पहले सेमेस्टर का छात्र था। कमरा अंदर से बंद था और कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया। वहीं 14 सितंबर को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के छात्रावास में जींद जिले के गांव छातर निवासी 19 वर्षीय शगुन ने फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। वह बीएससी फिजिकल साइंस प्रथम वर्ष में पढ़ रही थी और लक्ष्मी बाई छात्रावास में रहती थी। उसके द्वारा ये कदम उठाने के पीछे का कोई कारण फिलहाल सामने नहीं आया है।
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