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नहीं रुक रहे पराली जलाने के मामले : अभी 19 अधिकारियों पर गिर सकती है गाज
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। फसल अवशेषों में आग लगाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिखाई गई सख्ती का जिले में बड़ा असर दिखाई देने लगा है। जहां अब तक 62 किसानों पर मामले दर्ज कर करीब 40 को गिरफ्तार किया जा चुका है तो वहीं अब 19 अधिकारियों पर गाज भी गिर सकती है। इनमें सात संबंधित थाना प्रभारी के अलावा पांच खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी व कृषि विभाग के सात अधिकारी भी शामिल हैं। इन अधिकारियों को कानूनी प्रक्रिया के चलते फसल अवशेष जलने से रोकने में नाकाम रहने को लेकर अदालत में जवाब देना होगा। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा चुकी है।
यह प्रशासन की बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि संबंधित क्षेत्रों के अधिकारियों को प्रशासन की ओर से दो बार कारण बताओ नोटिस दिए गए थे, जिन पर अधिकतर ने जवाब ही नहीं दिया, जिसके बाद ही यह कदम उठाया गया। अब अदालत में कार्रवाई का सामना करना होगा। इससे पहले कृषि विभाग के चार अधिकारियों को सस्पेंड किया जा चुका है। बता दें कि जिले में अब तक हरसेक के जरिए ही 99 जगहों पर धान फसल के अवशेष जलाए जाने की सूचनाएं मिल चुकी हैं, जिनमें से 63 जगहों पर इन घटनाओं की पुष्टि भी हो चुकी है तो इन सभी किसानों के खिलाफ अलग-अलग थानों में मामले भी दर्ज कराए जा चुके हैं। पुलिस ने शुक्रवार शाम तक करीब 40 किसानों की गिरफ्तारी की। हालांकि गिरफ्तार किसानों को जमानत पर छोड़ दिया गया। उधर 59 किसानों के फार्म रिकार्ड में रेड एंट्री दर्ज की जा चुकी है तो वहीं कृषि विभाग फसल अवशेषों में आग लगाए जाने के चलते अब तक एक लाख 50 हजार रुपये जुर्माना भी वसूल चुका है।
कृषि उपनिदेशक को भी मिल चुका नोटिस
फसल अवशेष जलाए जाने की घटनाओं को लेकर जहां कृषि विभाग चार अधिकारियों को सस्पेंड करने के अलावा 15 और अधिकारियों को नोटिस दे चुका है तो वहीं खुद उप कृषि निदेशक डॉ. कर्मचंद को भी कारण बताओ नोटिस जारी हो चुका है। यहां तक कि जिला उपायुक्त को भी नोटिस हो चुका है तो अदालत में जवाब भी देना पड़ा। वहीं फसल अवशेषों में आग लगाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिखाई गई सख्ती का जिले में बड़ा असर दिखाई देने लगा है।
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दो बार नोटिस के बावजूद नहीं दिया जवाब : उपायुक्त
जिला उपायुक्त राजेश जोगपाल का कहना है कि जिन अधिकारियों के खिलाफ अदालत में प्रक्रिया चलाए जाने की कार्रवाई की गई है, उन्हें पहले दो बार फसल अवशेष जलने को लेकर कारण बताओ नोटिस दिया गया था लेकिन जवाब नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को लेकर कड़ी आपत्ति जता चुका है तो वहीं प्रदेश सरकार भी सख्त आदेश दे चुकी है। ऐसे में अधिकारियों को गंभीर होना ही होगा। किसी भी स्तर पर लापरवाही सहन नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि नियुक्त किए गए अधिकारियों को कार्रवाई के लिए सख्त दिशा-निर्देश दिए गए है ताकि पर्यावरण दूषित होने से बच सकें।
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कुरुक्षेत्र। फसल अवशेषों में आग लगाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिखाई गई सख्ती का जिले में बड़ा असर दिखाई देने लगा है। जहां अब तक 62 किसानों पर मामले दर्ज कर करीब 40 को गिरफ्तार किया जा चुका है तो वहीं अब 19 अधिकारियों पर गाज भी गिर सकती है। इनमें सात संबंधित थाना प्रभारी के अलावा पांच खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी व कृषि विभाग के सात अधिकारी भी शामिल हैं। इन अधिकारियों को कानूनी प्रक्रिया के चलते फसल अवशेष जलने से रोकने में नाकाम रहने को लेकर अदालत में जवाब देना होगा। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा चुकी है।
यह प्रशासन की बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि संबंधित क्षेत्रों के अधिकारियों को प्रशासन की ओर से दो बार कारण बताओ नोटिस दिए गए थे, जिन पर अधिकतर ने जवाब ही नहीं दिया, जिसके बाद ही यह कदम उठाया गया। अब अदालत में कार्रवाई का सामना करना होगा। इससे पहले कृषि विभाग के चार अधिकारियों को सस्पेंड किया जा चुका है। बता दें कि जिले में अब तक हरसेक के जरिए ही 99 जगहों पर धान फसल के अवशेष जलाए जाने की सूचनाएं मिल चुकी हैं, जिनमें से 63 जगहों पर इन घटनाओं की पुष्टि भी हो चुकी है तो इन सभी किसानों के खिलाफ अलग-अलग थानों में मामले भी दर्ज कराए जा चुके हैं। पुलिस ने शुक्रवार शाम तक करीब 40 किसानों की गिरफ्तारी की। हालांकि गिरफ्तार किसानों को जमानत पर छोड़ दिया गया। उधर 59 किसानों के फार्म रिकार्ड में रेड एंट्री दर्ज की जा चुकी है तो वहीं कृषि विभाग फसल अवशेषों में आग लगाए जाने के चलते अब तक एक लाख 50 हजार रुपये जुर्माना भी वसूल चुका है।
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कृषि उपनिदेशक को भी मिल चुका नोटिस
फसल अवशेष जलाए जाने की घटनाओं को लेकर जहां कृषि विभाग चार अधिकारियों को सस्पेंड करने के अलावा 15 और अधिकारियों को नोटिस दे चुका है तो वहीं खुद उप कृषि निदेशक डॉ. कर्मचंद को भी कारण बताओ नोटिस जारी हो चुका है। यहां तक कि जिला उपायुक्त को भी नोटिस हो चुका है तो अदालत में जवाब भी देना पड़ा। वहीं फसल अवशेषों में आग लगाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिखाई गई सख्ती का जिले में बड़ा असर दिखाई देने लगा है।
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दो बार नोटिस के बावजूद नहीं दिया जवाब : उपायुक्त
जिला उपायुक्त राजेश जोगपाल का कहना है कि जिन अधिकारियों के खिलाफ अदालत में प्रक्रिया चलाए जाने की कार्रवाई की गई है, उन्हें पहले दो बार फसल अवशेष जलने को लेकर कारण बताओ नोटिस दिया गया था लेकिन जवाब नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को लेकर कड़ी आपत्ति जता चुका है तो वहीं प्रदेश सरकार भी सख्त आदेश दे चुकी है। ऐसे में अधिकारियों को गंभीर होना ही होगा। किसी भी स्तर पर लापरवाही सहन नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि नियुक्त किए गए अधिकारियों को कार्रवाई के लिए सख्त दिशा-निर्देश दिए गए है ताकि पर्यावरण दूषित होने से बच सकें।