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बैरिकेड तोड़ा लेकिन आगे नहीं बढ़ पाए युवा सिख
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
Updated Wed, 06 Aug 2014 12:33 AM IST
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एचएसजीएमसी के नेताओं के अल्टीमेटम बेअसर साबित हो रहा है। पिछले पांच दिनों में एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिह झींडा और उनके संगठन में युवा विंग के प्रदेशाध्यक्ष अमरिंद्र सिंह अरोड़ा ने जो अल्टीमेटम दिए वे परवान नहीं चढ़ सके।
बता दें कि करनाल में एक अगस्त 2014 को एचएसजीएमसी युवा विंग के अध्यक्ष अमरिंद्र सिंह अरोड़ा ने ऐलान किया था कि एचएसजीएमसी की सिख जत्थेबंदियों के साथ युवा विंग 5 अगस्त 2014 को कुरुक्षेत्र के छठी पातशाही गुरुद्वारे का कामकाज संभाल लेगा।
लेकिन मंगलवार को ऐसा कुछ भी पुलिस ने नहीं होने दिया। गुरुद्वारा छठी पातशाही में भारी संख्या में हथियारबंद निहंग और टास्कफोर्स के अलावा एसजीपीसी समर्थक युवाओं के जत्थे मौजूद थे।
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जैसे ही बैरियर पर हलचल मची ये लोग भी पूरी तरह तैयार होकर गेट तक पहुंच गए। हालांकि बैरियर से महज 20 कदम की दूरी पर स्थित छठी पातशाही के पिछले गेट का दरवाजा बंद किया हुआ था। गुरुद्वारे के इसी गेट से छोटे-बड़े वाहनों की एंट्री होती है।
अगर पुलिस आंदोलनकारियों को न रोकती तो हालात बिगड़ सकते थे। खास बात ये है कि 14 वर्षों से जो संगठन हरियाणा में अलग गुरुद्वारा कमेटी के लिए संघर्षरत है।
उनकी रणनीति में अंतर और अपरिपक्वता दिख रही है। जाहिर है कि 5 अगस्त को कब्जे का ऐलान करने के बाद कुरुक्षेत्र में 2 अगस्त को ही छठी पातशाही गुरुद्वारे का कब्जा लेने के लिए एचएसजीएमसी निकल पड़ी थी।
अब चार दिन से झींडा, नलवी, जोगा सिंह सहित संगठन की पूरी लीडरशिप छठी पातशाही के गेट तक नहीं पहुंच सकी। वहीं ऐलान की निर्धारित तारीख को एचएसजीएमसी का युवा विंग भी अपने ऐलान को साकार करने में विफल रहा।
यूथ विंग 5 अगस्त की निर्धारित तारीख को एक जत्थे के रूप में पंजाब सरकार और एसजीपीसी नेताओं के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कुरुक्षेत्र में सीधा मोर्चा स्थल पर पहुंचा।
यहां बिना रुके पुलिस बैरिकेड तोड़ने की पूरी आक्रामकता दिखाई और इसे पार करने का प्रयास किया। इस कार्रवाई में सिर्फ 3-4 युवा सिख ही बैरीगेट पार कर सके।
अधिकतर आगे बढ़ नहीं पाए। स्थिति को बेकाबू होता देख पुलिस ने भी आक्रमकता दिखाई। लेकिन बगैर लाठी डंडे चलाए इन्हें मोर्चा स्थल की ओर से बैरंग लौटा दिया।
इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारी दोनों काफी देर तक जूझते दिखे। पूरी कार्रवाई में पुलिस सफल रही। जिसकी बदौलत आंदोलनकारियों को पीछे हटने पर विवश होना पड़ा।
वहीं दूसरा अल्टीमेटम 3 अगस्त 2014 को एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा ने पुलिस-प्रशासन और सरकार को दिया था कि एक घंटे के भीतर अगर छठी पातशाही गुरुद्वारे में मौजूद टास्कफोर्स व अन्य हथियार बंद लोगों को बाहर नहीं निकाला तो गंभीर परिणाम होंगे।
बता दें कि अभी तक टास्कफोर्स के अलावा अगले दिन और बड़ी संख्या में दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के लोग छठी पातशाही में डेरा डाल चुके हैं। विवाद आज गहराता जा रहा है।
पुलिस कप्तान नदारद, जूझ रहे उपकप्तान
सड़क पर एचएसजीएमसी और एसजीपीसी विवाद से तनाव चौथे दिन जारी है। चार दिन में मंगलवार को तीसरी बार गुरुद्वारे पर कब्जे के प्रयास में पुलिस के बैरीकेड तोड़े।
गुरुद्वारे के आसपास भारी संख्या में पुलिस मुस्तैद है और आसपास का एरिया सील, लेकिन इन चार दिनों के भीतर एक बार भी कुरुक्षेत्र के पुलिस कप्तान अश्विनी शैणवी मौके पर नहीं पहुंचे।
जबकि कुरुक्षेत्र मुख्यालय के डीएसपी सतीश गौतम, शाहाबाद के डीएसपी शीतल सिंह और पिहोवा के डीएसपी गोरखपाल यहां तैनात किए हैं।
पुलिस को पहले जमकर छकाया, फिर पानी पिलाया
एचएसजीएमसी के युवा विंग ने मोर्चा स्थल पर पहुंचकर अचानक अफरातफरी मचा दी और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
इन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करने पड़ी और जैसे-तैसे पुलिस ने हालात पर काबू पाया। हालांकि पुलिस को छकाने के बाद मोरचे पर बैठे सेवादारों ने तुरंत बाद इन पुलिस कर्मियों की जमकर जलसेवा भी की।
मोर्चे से कई गुणा ज्यादा छठी पातशाही में
मोर्चे पर रात को 100 लोगों से भी कम लोग मौजूद दिखे। जबकि युवा विंग के बैरिकेड तोड़ने की घटना के दौरान भी 200 से भी कम एचएसजीएमसी समर्थक दिखे।
वहीं छठी पातशाही गुरुद्वारे में इससे कई गुणा अधिक संख्या नजर आई। अधिकांश के पास घातक हथियार भी दिखे। इनके पास राइफलें, पिस्तौल, तलवारे, बर्छे, गंडासे, डंडें, हाकियों और भालें नजर आए।
अमर उजाला की खबर से मिली ढील
अमर उजाला ने मंगलवार को मरीजों, यात्रियों, व्यापारियों की समस्या को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद विश्वकर्मा चौक से अंबेडकर चौक और अंबेडकर चौक से मीरी-पीरी चौक तक लगे बैरियर हटाकर ट्रैफिक खोल दिया गया। इससे लोगों को खासी राहत मिली।
वहीं एक पैट्रोल पंप के अलावा करीब 100 दुकानदारों का कारोबार ठप होने से बच गया। हालांकि सिखों की मोर्चाबंदी अभी जारी है। लेकिन एक पैट्रोल पंप सहित करीब 100 दुकानदारों का कारोबार अभी भी ठप है। करीब 500 मीटर के दायरे में नाकाबंदी चल रही है।
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बता दें कि करनाल में एक अगस्त 2014 को एचएसजीएमसी युवा विंग के अध्यक्ष अमरिंद्र सिंह अरोड़ा ने ऐलान किया था कि एचएसजीएमसी की सिख जत्थेबंदियों के साथ युवा विंग 5 अगस्त 2014 को कुरुक्षेत्र के छठी पातशाही गुरुद्वारे का कामकाज संभाल लेगा।
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लेकिन मंगलवार को ऐसा कुछ भी पुलिस ने नहीं होने दिया। गुरुद्वारा छठी पातशाही में भारी संख्या में हथियारबंद निहंग और टास्कफोर्स के अलावा एसजीपीसी समर्थक युवाओं के जत्थे मौजूद थे।
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जैसे ही बैरियर पर हलचल मची ये लोग भी पूरी तरह तैयार होकर गेट तक पहुंच गए। हालांकि बैरियर से महज 20 कदम की दूरी पर स्थित छठी पातशाही के पिछले गेट का दरवाजा बंद किया हुआ था। गुरुद्वारे के इसी गेट से छोटे-बड़े वाहनों की एंट्री होती है।
अगर पुलिस आंदोलनकारियों को न रोकती तो हालात बिगड़ सकते थे। खास बात ये है कि 14 वर्षों से जो संगठन हरियाणा में अलग गुरुद्वारा कमेटी के लिए संघर्षरत है।
उनकी रणनीति में अंतर और अपरिपक्वता दिख रही है। जाहिर है कि 5 अगस्त को कब्जे का ऐलान करने के बाद कुरुक्षेत्र में 2 अगस्त को ही छठी पातशाही गुरुद्वारे का कब्जा लेने के लिए एचएसजीएमसी निकल पड़ी थी।
अब चार दिन से झींडा, नलवी, जोगा सिंह सहित संगठन की पूरी लीडरशिप छठी पातशाही के गेट तक नहीं पहुंच सकी। वहीं ऐलान की निर्धारित तारीख को एचएसजीएमसी का युवा विंग भी अपने ऐलान को साकार करने में विफल रहा।
यूथ विंग 5 अगस्त की निर्धारित तारीख को एक जत्थे के रूप में पंजाब सरकार और एसजीपीसी नेताओं के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कुरुक्षेत्र में सीधा मोर्चा स्थल पर पहुंचा।
यहां बिना रुके पुलिस बैरिकेड तोड़ने की पूरी आक्रामकता दिखाई और इसे पार करने का प्रयास किया। इस कार्रवाई में सिर्फ 3-4 युवा सिख ही बैरीगेट पार कर सके।
अधिकतर आगे बढ़ नहीं पाए। स्थिति को बेकाबू होता देख पुलिस ने भी आक्रमकता दिखाई। लेकिन बगैर लाठी डंडे चलाए इन्हें मोर्चा स्थल की ओर से बैरंग लौटा दिया।
इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारी दोनों काफी देर तक जूझते दिखे। पूरी कार्रवाई में पुलिस सफल रही। जिसकी बदौलत आंदोलनकारियों को पीछे हटने पर विवश होना पड़ा।
वहीं दूसरा अल्टीमेटम 3 अगस्त 2014 को एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा ने पुलिस-प्रशासन और सरकार को दिया था कि एक घंटे के भीतर अगर छठी पातशाही गुरुद्वारे में मौजूद टास्कफोर्स व अन्य हथियार बंद लोगों को बाहर नहीं निकाला तो गंभीर परिणाम होंगे।
बता दें कि अभी तक टास्कफोर्स के अलावा अगले दिन और बड़ी संख्या में दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के लोग छठी पातशाही में डेरा डाल चुके हैं। विवाद आज गहराता जा रहा है।
पुलिस कप्तान नदारद, जूझ रहे उपकप्तान
सड़क पर एचएसजीएमसी और एसजीपीसी विवाद से तनाव चौथे दिन जारी है। चार दिन में मंगलवार को तीसरी बार गुरुद्वारे पर कब्जे के प्रयास में पुलिस के बैरीकेड तोड़े।
गुरुद्वारे के आसपास भारी संख्या में पुलिस मुस्तैद है और आसपास का एरिया सील, लेकिन इन चार दिनों के भीतर एक बार भी कुरुक्षेत्र के पुलिस कप्तान अश्विनी शैणवी मौके पर नहीं पहुंचे।
जबकि कुरुक्षेत्र मुख्यालय के डीएसपी सतीश गौतम, शाहाबाद के डीएसपी शीतल सिंह और पिहोवा के डीएसपी गोरखपाल यहां तैनात किए हैं।
पुलिस को पहले जमकर छकाया, फिर पानी पिलाया
एचएसजीएमसी के युवा विंग ने मोर्चा स्थल पर पहुंचकर अचानक अफरातफरी मचा दी और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
इन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करने पड़ी और जैसे-तैसे पुलिस ने हालात पर काबू पाया। हालांकि पुलिस को छकाने के बाद मोरचे पर बैठे सेवादारों ने तुरंत बाद इन पुलिस कर्मियों की जमकर जलसेवा भी की।
मोर्चे से कई गुणा ज्यादा छठी पातशाही में
मोर्चे पर रात को 100 लोगों से भी कम लोग मौजूद दिखे। जबकि युवा विंग के बैरिकेड तोड़ने की घटना के दौरान भी 200 से भी कम एचएसजीएमसी समर्थक दिखे।
वहीं छठी पातशाही गुरुद्वारे में इससे कई गुणा अधिक संख्या नजर आई। अधिकांश के पास घातक हथियार भी दिखे। इनके पास राइफलें, पिस्तौल, तलवारे, बर्छे, गंडासे, डंडें, हाकियों और भालें नजर आए।
अमर उजाला की खबर से मिली ढील
अमर उजाला ने मंगलवार को मरीजों, यात्रियों, व्यापारियों की समस्या को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद विश्वकर्मा चौक से अंबेडकर चौक और अंबेडकर चौक से मीरी-पीरी चौक तक लगे बैरियर हटाकर ट्रैफिक खोल दिया गया। इससे लोगों को खासी राहत मिली।
वहीं एक पैट्रोल पंप के अलावा करीब 100 दुकानदारों का कारोबार ठप होने से बच गया। हालांकि सिखों की मोर्चाबंदी अभी जारी है। लेकिन एक पैट्रोल पंप सहित करीब 100 दुकानदारों का कारोबार अभी भी ठप है। करीब 500 मीटर के दायरे में नाकाबंदी चल रही है।