राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में मंगलवार को सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने सीमेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन किया। इस ऑनलाइन कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक पद्मश्री डॉ. सतीश कुमार ने की। इस अवसर पर राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि आजादी के 75वें वर्ष में हमें अगले 15 वर्षों के लिए योजना बनाने की जरूरत है। यह भारत का समय है और हमें युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए देश में ऐसे और उत्कृष्टता केंद्रों की आवश्यकता है, क्योंकि इंजीनियरिंग के छात्रों को भी कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने की आवश्यकता है। आंकड़े बताते हैं कि 25 प्रतिशत से कम स्नातक वास्तव में रोजगार योग्य हैं। सीमेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस एनआईटी कुरुक्षेत्र के प्रमुख प्रो. ब्रह्मजीत सिंह ने बताया कि एनआईटी में सीमेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस उद्योग, शिक्षाविदों और सरकारी एजेंसियों के सहयोग से स्वदेशी निर्माण के लिए क्षमताओं को विकसित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। सीमेंस डिजिटल इंडस्ट्रीज सॉफ्टवेयर के प्रबंधक निदेशक श्रीप्रकाश चौधरी ने चौथी औद्योगिक क्रांति और उद्योग में शिक्षाविदों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने उद्योग के बारे में छात्रों और शोधार्थियों की जागरूकता पर भी जोर दिया। प्रबंध निद-ेशक विश्वनाथ पादुर ने डीआरडीओ परियोजनाओं के बारे में बताया। एनआईटी निदेशक डॉ. सतीश कुमार ने कहा कि एनआईटी कुरुक्षेत्र ने प्रौद्योगिकी के विशिष्ट क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए इस सीमेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की गई है। कहा कि केंद्र माइंड टू मार्केट की अवधारणा के साथ जुड़ा हुआ है, जिसका अर्थ है कि केंद्र के पास उत्पाद और प्रक्रिया विकास दोनों की सुविधा और क्षमता है। उद्योग 4.0 के आगमन के साथ, उद्योग एक मजबूत उत्पाद जीवन चक्र प्रबंधन इको-सिस्टम विकसित करने की मांग कर रहे हैं, जहां ग्राहक की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उत्पाद को डिजाइन, विश्लेषण, निर्मित, निगरानी और निरीक्षण किया जा सकता है। सीमेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन सभी आवश्यकताओं को अपनी 11 अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं के माध्यम से पूरा करता है। बताया कि केंद्र मुख्य रूप से कार्यों, रेस्तरां, त्योहारों और टेकअवे सेवाओं में व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक को बदलने के लिए सौ प्रतिशत बायोडिग्रेडेबल और कम्पोस्टेबल टेबलवेयर के लिए मेक इन इंडिया स्वदेशी विनिर्माण समाधान करके प्लास्टिक कचरे के मुद्दे को संबोधित करने की दिशा में काम कर रहा है। परियोजना की योजना सीएसआईआर लैब एएमपीआरआई, भोपाल के सहयोग से बनाई गई है, जिसे कृषि अपशिष्ट से घटक बनाने का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने बताया कि एनआईटी कुरुक्षेत्र शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान एवं विकास संगठनों और उद्योग के साथ सहयोग के नेटवर्क का विस्तार करने की योजना बना रहा है, ताकि उनकी समस्याओं के अभिनव समाधान विकसित किए जा सकें। इस मौके पर प्रो. अखिलेश स्वरूप, प्रो. सतहंस, प्रो. सुरेंद्र देसवाल और प्रो. पंकज चांदना सहित अन्य उपस्थित रहे।