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Kurukshetra News: श्री कालेश्वर महादेव मंदिर, जहां बिना नंदी के विराजमान है भगवान शिव

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jul 2024 07:04 AM IST
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Shri Kaleshwar Mahadev Temple, where Lord Shiva sits without Nandi.
त्रेता युग में रावण ने यहां शिव की तपस्या कर प्राप्त की थी अकाल मृत्यु पर विजय
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राजरानी
कुरुक्षेत्र। सावन में शिव भक्ति का विशेष महत्व माना जाता है। देश में प्रत्येक मंदिर की अलग-अलग मान्यता है लेकिन धर्मनगरी स्थित श्री कालेश्वर महादेव विश्व का एकमात्र मंदिर माना जाता है जहां शिवलिंग के साथ नंदी महाराज विराजमान नहीं हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में रावण ने यहां शिव की तपस्या कर अकाल मृत्यु पर विजय प्राप्त की थी। तभी से मान्यता है कि यहां पूजा करने से अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और द्वापर में दुर्योधन के बहनोई जयद्रथ ने भी इस मंदिर में तपस्या की थी।
कथाओं के मुताबिक आकाश मार्ग से गुजर रहे लंकापति रावण का विमान श्री कालेश्वर महादेव मंदिर के ऊपर से निकलते समय डगमगाने लगा। वह नीचे उतरा और यहां शिवलिंग को देखकर रुक गया। यहां उसने लंबी तपस्या की, जिससे खुश होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उससे वरदान मांगने को कहा तो रावण ने वरदान से पहले प्रार्थना की कि इस घटना का कोई साक्षी नहीं होना चाहिए। उस समय भगवान शिव ने नंदी को कैलाश पर्वत भेज दिया था। उस समय रावण ने काल पर विजय पाने का वर मांगा था। तभी से यहां भगवान शिवलिंग की पूजा बिना नंदी के ही की जाती है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना को भगवान शिव पूरा करते हैं। शिव ने रावण को काल पर विजयी होने का वरदान प्रदान किया था, इसलिए इस मंदिर का नाम कालेश्वर महादेव हैं। भगवान शिव की पूजा से काल को भी जोड़ा जा सकता है।
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पौलस्त्य ऋषि ने की थी श्री कालेश्वर मंदिर की स्थापना
मंदिर पुजारी राकेश शास्त्री ने बताया कि कालेश्वर महादेव मंदिर शिव का सिद्ध पीठ है, जिसकी स्थापना पौलस्त्य ऋषि ने की थी। श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोंद्धार सभा ने इसका जीर्णोद्धार कर विशाल रूप दिया है, इससे पहले यहां वन होता था। उन्होंने बताया कि ये स्वयंभू शिवलिंग है, जहां जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करने से हर मनोकामना पूरी होती है और अकाल मृत्यु का भय भी दूर होता है। मंदिर में स्नान करने के लिए तालाब भी है, जिसमें सरस्वती नदी का पानी आता था और लोग स्नान करते थे। यहां पर प्राचीन घाट भी स्थित है।
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शिव का प्रिय माह है सावन : जय नारायण
श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोंद्धार सभा के मुख्य सलाहकार जय नारायण ने बताया कि सावन शिव भगवान का प्रिय माह है, जिसमें शिव पूजन करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है। श्री कालेश्वर मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग है, जहां पूजा करने से काल मृत्यु का भय दूर होता है तथा नकारात्मकता दूर होती है। उन्होंने बताया कि मां भद्रकाली का मुख्य द्वार कालेश्वर महादेव मंदिर के सामने था, इसकी मान्यता है कि मां सती के पैर का टखना कालेश्वर महादेव मंदिर के सामने आकर गिरा था कि वह रोजाना भगवान शिव के दर्शन कर सकें।
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