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भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री नंदाजी ने रखी थी जिस प्राचीन धर्मस्थल के जीर्णोद्धार की आधारशिला,उस पर कब्जा,बना दी दुकान
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भारत रत्न सम्मान से अलंकृत देश के पूर्व प्रधानमंत्री नंदाजी ने जिस प्राचीन धर्मस्थल का जीर्णोद्धार कराया था, उस मंदिर को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की नाक तले कब्जा कर दुकान बना दी गई है। यह कब हुआ ? कैसे हुआ ? किसकी अनुमति से किया गया ? इन सवालों के उत्तर जब केडीबी अधिकारियों से मांगे तो उनके पास जवाब नहीं था। हालांकि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर गगनदीप सिंह ने अमर उजाला का आभार जताते हुए त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
हद तो ये है कि केडीबी इवेंट पर इवेंट कर अपनी पीठ तो थपथपा रही है, मगर जिस शख्सियत की वजह से यह बोर्ड बना और जिस उद्देश्य से केडीबी की स्थापना की गई, उन सपनों पर बोर्ड की लापरवाही भारी पड़ रही है।
महत्वपूर्ण तथ्य ये है कि उक्त प्राचीन मंदिर केडीबी ऑफिस से चंद कदम पर ब्रह्मसरोवर तट के ग्रीन बेल्ट जोन में स्थित है। इस मंदिर की दीवार पर आज भी आधारशिला पत्थर लगा है, जिस पर लिखा है-प्राचीन दरगाहीशाह शिव मंदिर कुरुक्षेत्र, जिसका पुन: उद्धार करने के लिए मंदिर निर्माण की आधारशिला श्रीगुलजारी लालजी नंदा भूतपूर्व प्रधानमंत्री भारत सरकार के करकमलों द्वारा आज दिनांक 28-7-89 को एकादशी के दिन संपन्न हुई। यानी जब आधारशिला रखी गई थी, उस समय कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के चेयरमैन नंदाजी थे।
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उल्लेखनीय है कि महाभारतकालीन कुरुक्षेत्र के 48 कोस क्षेत्र में तीर्थों, प्राचीन मंदिरों और पौराणिक धर्मस्थलों के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिये नंदाजी के प्रयासों से 1 अगस्त 1968 को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की स्था पना हुई थी, जिसके पहले चेयरमैन नंदाजी बने थे और 1968 से 1990 तक नंदाजी ही बोर्ड के चेयरमैन रहे, इसके बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था और हरियाणा के गवर्नर ही इस बोर्ड के चेयरमैन हैं और उपाध्यक्ष हरियाणा के सीएम।
केडीबी की मौन और गौण भूमिका का नतीजा
4 जुलाई को नंदाजी के जन्मदिवस पर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने उन्हें याद किया प्रेरणा स्त्रोत भी बताया, मगर इस स्तुतिगान के साथ कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की मौन और गौण भूमिका से नंदाजी के सपनों और केडीबी के उद्देश्यों पर पलीता भी लगता नजर आया। दरअसल नंदाजी ने जिस प्राचीन मंदिर के पुनरोद्धार की आधारशिला रखी थी, उसका मेन गेट बंद और दूसरे साइड की दीवार को तोड़ कर दुकान का रास्ता बना दिया गया है।
वाह केडीबी, मंदिर पर कब्जा, गीता केंद्र किराये पर
जिस मंदिर पर कब्जा कर दुकान बनाई गई है, उसके ठीक सामने केडीबी का गीता केंद्र है। इस गीता केंद्र का उद्घाटन 1995 में हरियाणा के तत्कालीन राज्यपाल धनिकलाल मंडल ने किया था। मगर पिछले वर्षों में गीता केंद्र का अस्तित्व भी खत्म कर बोर्ड इस परिसर को केयू थाने को किराये पर दे चुका है। दु:खद पहलू ये है कि नंदा जी के जन्मदिवस, पुण्यतिथि, केडीबी स्थापना दिवस जैसे अवसरों पर दावा उनके सपनों को साकार करने का होता है।
कब्जे वाली जगह पर मल्टी नेशनल कंपनी ने ब्रांडिंग
प्राचीन मंदिर की दीवार तोड़ जिस ओर दरवाजा बनाया गया है, वहां कामर्शियल फ्रीज, दुकान का स्टाक, कोल्ड ड्रिंक की बोतलें, गैस चुल्हा, सिलिंडर, तख्ती और अन्य सामान रखा हुआ है। वहीं दुकान के बाहर एक मल्टी नेशनल कंपनी की ब्रांडिंग की गई है, जिस पर लिखा है, शिवकृपा टी स्टाल। सवाल ये भी उठ रहा है कि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की जगह पर बगैर अनुमति और कब्जे वाली जगह पर मल्टी नेशनल कंपनी ने ब्रांडिंग कैसे कर दी।
शायद ब्राह्मण सभा की है जगह : संपदा प्रबंधक
केडीबी के सीईओ के आदेश पर संपदा प्रबंधक राजीव शर्मा को जांच कार्रवाई का जिम्मा सौंपा गया है। वहीं, संपदा प्रबंधक का कहना है कि उन्हें लगता है यह मंदिर केडीबी का नहीं, बल्कि ब्राह्मण सभा है का है, लेकिन जब उन्हें बताया गया है कि ब्राह्मण सभा का नहीं, बल्कि केडीबी के अधिकार क्षेत्र की भूमि पर बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन नंदाजी द्वारा जीर्णोद्धार कराये गये इस मंदिर में धार्मिक भावना को आहत करने काम किया जा रहा है, क्योंकि प्राचीन मंदिर में शिवलिंग के साथ बैठकर एक व्यक्ति भोजन करता मिला है।
केडीबी ब्राह्मण सभा को देगी वह संभालेंगे व्यवस्था : शर्मा
केडीबी के पूर्व सदस्य एवं श्रीब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के मुख्य सलाहकार जयनारायण शर्मा का कहना है कि मंदिर सभा का नहीं है, अगर कुुरक्षेत्र विकास बोर्ड मंदिर सभा को सौंपता है तो सभा इस प्राचीन स्थल का जीर्णोद्धार कराने के साथ इसकी पवित्रता और गरिमा का भी ख्याल रखेगी।
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हद तो ये है कि केडीबी इवेंट पर इवेंट कर अपनी पीठ तो थपथपा रही है, मगर जिस शख्सियत की वजह से यह बोर्ड बना और जिस उद्देश्य से केडीबी की स्थापना की गई, उन सपनों पर बोर्ड की लापरवाही भारी पड़ रही है।
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महत्वपूर्ण तथ्य ये है कि उक्त प्राचीन मंदिर केडीबी ऑफिस से चंद कदम पर ब्रह्मसरोवर तट के ग्रीन बेल्ट जोन में स्थित है। इस मंदिर की दीवार पर आज भी आधारशिला पत्थर लगा है, जिस पर लिखा है-प्राचीन दरगाहीशाह शिव मंदिर कुरुक्षेत्र, जिसका पुन: उद्धार करने के लिए मंदिर निर्माण की आधारशिला श्रीगुलजारी लालजी नंदा भूतपूर्व प्रधानमंत्री भारत सरकार के करकमलों द्वारा आज दिनांक 28-7-89 को एकादशी के दिन संपन्न हुई। यानी जब आधारशिला रखी गई थी, उस समय कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के चेयरमैन नंदाजी थे।
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उल्लेखनीय है कि महाभारतकालीन कुरुक्षेत्र के 48 कोस क्षेत्र में तीर्थों, प्राचीन मंदिरों और पौराणिक धर्मस्थलों के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिये नंदाजी के प्रयासों से 1 अगस्त 1968 को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की स्था पना हुई थी, जिसके पहले चेयरमैन नंदाजी बने थे और 1968 से 1990 तक नंदाजी ही बोर्ड के चेयरमैन रहे, इसके बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था और हरियाणा के गवर्नर ही इस बोर्ड के चेयरमैन हैं और उपाध्यक्ष हरियाणा के सीएम।
केडीबी की मौन और गौण भूमिका का नतीजा
4 जुलाई को नंदाजी के जन्मदिवस पर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने उन्हें याद किया प्रेरणा स्त्रोत भी बताया, मगर इस स्तुतिगान के साथ कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की मौन और गौण भूमिका से नंदाजी के सपनों और केडीबी के उद्देश्यों पर पलीता भी लगता नजर आया। दरअसल नंदाजी ने जिस प्राचीन मंदिर के पुनरोद्धार की आधारशिला रखी थी, उसका मेन गेट बंद और दूसरे साइड की दीवार को तोड़ कर दुकान का रास्ता बना दिया गया है।
वाह केडीबी, मंदिर पर कब्जा, गीता केंद्र किराये पर
जिस मंदिर पर कब्जा कर दुकान बनाई गई है, उसके ठीक सामने केडीबी का गीता केंद्र है। इस गीता केंद्र का उद्घाटन 1995 में हरियाणा के तत्कालीन राज्यपाल धनिकलाल मंडल ने किया था। मगर पिछले वर्षों में गीता केंद्र का अस्तित्व भी खत्म कर बोर्ड इस परिसर को केयू थाने को किराये पर दे चुका है। दु:खद पहलू ये है कि नंदा जी के जन्मदिवस, पुण्यतिथि, केडीबी स्थापना दिवस जैसे अवसरों पर दावा उनके सपनों को साकार करने का होता है।
कब्जे वाली जगह पर मल्टी नेशनल कंपनी ने ब्रांडिंग
प्राचीन मंदिर की दीवार तोड़ जिस ओर दरवाजा बनाया गया है, वहां कामर्शियल फ्रीज, दुकान का स्टाक, कोल्ड ड्रिंक की बोतलें, गैस चुल्हा, सिलिंडर, तख्ती और अन्य सामान रखा हुआ है। वहीं दुकान के बाहर एक मल्टी नेशनल कंपनी की ब्रांडिंग की गई है, जिस पर लिखा है, शिवकृपा टी स्टाल। सवाल ये भी उठ रहा है कि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की जगह पर बगैर अनुमति और कब्जे वाली जगह पर मल्टी नेशनल कंपनी ने ब्रांडिंग कैसे कर दी।
शायद ब्राह्मण सभा की है जगह : संपदा प्रबंधक
केडीबी के सीईओ के आदेश पर संपदा प्रबंधक राजीव शर्मा को जांच कार्रवाई का जिम्मा सौंपा गया है। वहीं, संपदा प्रबंधक का कहना है कि उन्हें लगता है यह मंदिर केडीबी का नहीं, बल्कि ब्राह्मण सभा है का है, लेकिन जब उन्हें बताया गया है कि ब्राह्मण सभा का नहीं, बल्कि केडीबी के अधिकार क्षेत्र की भूमि पर बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन नंदाजी द्वारा जीर्णोद्धार कराये गये इस मंदिर में धार्मिक भावना को आहत करने काम किया जा रहा है, क्योंकि प्राचीन मंदिर में शिवलिंग के साथ बैठकर एक व्यक्ति भोजन करता मिला है।
केडीबी ब्राह्मण सभा को देगी वह संभालेंगे व्यवस्था : शर्मा
केडीबी के पूर्व सदस्य एवं श्रीब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के मुख्य सलाहकार जयनारायण शर्मा का कहना है कि मंदिर सभा का नहीं है, अगर कुुरक्षेत्र विकास बोर्ड मंदिर सभा को सौंपता है तो सभा इस प्राचीन स्थल का जीर्णोद्धार कराने के साथ इसकी पवित्रता और गरिमा का भी ख्याल रखेगी।