फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Seven craftsmen of Madhya Pradesh are also engaged in the festival, Kurukshetra

Kurukshetra News: मध्यप्रदेश के सात शिल्पकार भी महोत्सव में लगा रहे चार चांद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Nov 2022 08:30 AM IST
विज्ञापन
Seven craftsmen of Madhya Pradesh are also engaged in the festival, Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के चलते ब्रह्मसरोवर तट पर लगे क्राफ्ट मेले में मध्य प्? - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में ब्रह्मसरोवर के तटों पर जहां 23 राज्यों की शिल्पकला का संगम बना हुआ है, वहीं महोत्सव में पहली बार मध्य प्रदेश से पहुंचे शिल्पकारों की शिल्पकला पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रही है। महोत्सव में पहली बार मध्यप्रदेश को पार्टनर स्टेट बनाया गया है। इस राज्य से सात शिल्पकार अपनी-अपनी शिल्पकला को लेकर महोत्सव में पहुंचे हैं।
ब्रह्मसरोवर के चारों तरफ शिल्पकला की खूबसूरती पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित कर रही है। वहीं मध्यप्रदेश से आए सात शिल्पकार भी इसमें चार चांद लगा रहे हैं। इनमें मोहम्मद सिराज जूट क्राफ्ट, विजय कुमार खरादी वुड टावयस, कमलेश कुमार राठौर एम्ब्रोएडेड क्रास्टेड, मोसीन खान जरी गुड्स, बिमलेश कुमार डॉल एडं टायॅस, मोहम्मद सोहल हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग, नजीर मुज्जफर जरी एंड जरी गुड्स की शिल्पकला को लेकर पहुंचे हैं। इन शिल्पकारों को जनजाति संग्रहालय भोपाल के माध्यम से पहली बार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में भेजा गया है। विदित हो कि इसमें मध्यप्रदेश को पार्टनर राज्य और नेपाल को पार्टनर देश के रूप में आमंत्रित किया गया है।
विज्ञापन

नर्मदा नदी के तट पर जन्मी गोंड ट्राइबल आर्ट बनी चर्चा का विषय
मध्यप्रदेश के बीच से बहने वाली नर्मदा नदी के तट पर बसे गांव डिंडोरी की गोंड ट्राइबल आर्ट्स विश्व में प्रसिद्ध है। यह अपने आप में एक अनोखी शिल्पकला है। इसके लिए एक्रेलिक्स रंग और कैनवस का प्रयोग किया जाता है। इस शिल्पकला को महोत्सव में आने वाले पर्यटक भी खूब सराह रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

मध्य प्रदेश के गांव ढिंढौरी से आए संतु सिंह टेकम का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पहली बार आए हैं। उन्होंने बताया कि इस पेंटिंग कला को गोंड ट्राइबल आर्ट के नाम से जाना जाता है। यह आर्ट पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इस कला को वर्ष 2006 से अडॉप्ट किया गया और इसे लेकर उन्हें दिल्ली, लखनऊ सहित अन्य राज्यों में विशेष प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित भी किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह कैनवस पर एक्रिलिक रंग से ब्रश के माध्यम से की जाती है। इस महोत्सव में पृथ्वी और पर्यावरण थीम पर कैनवस पेंटिंग बनाकर लाए हैं। इसकी कीमत एक हजार से लेकर 55 हजार रुपये तक है।

जरी के सूट और कढ़ाई वाले बटुए भी कर रहे आकर्षित
मध्यप्रदेश की शिल्पकार यास्मीन खान महोत्सव में जरी के सूट और बटुए बनाकर लाई हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 10 सालों से जरी की कढ़ाई के सूट और बटुए बनाने के साथ-साथ ज्वैलरी तैयार करने का काम कर रही हैं। इस कला को मध्य प्रदेश में खूब प्रसिद्घि मिली है। यहां भी इस कला के काफी कद्रदान हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed