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Kurukshetra News: शहर की निगरानी कर रहे सात सीसीटीवी कैमरे, 193 निष्क्रिय
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कुरुक्षेत्र। पुलिस लाइन के बाहर खराब होने के बाद लटकते सीसीटीवी कैमरे। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। नगर परिषद की ओर से वर्ष 2018 में 45 लाख रुपये खर्च कर 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे शहर के विभिन्न चौराहों व अन्य जगहों पर लगाए गए थे। इसके लिए जिला सचिवालय में उपायुक्त कार्यालय के साथ ही कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया था।
इससे शहर की सुरक्षा व्यवस्था और अपराधियों को पकड़ने में पुलिस की राह आसान हुई थी, लेकिन अफसोस इस बात का है कि इन कैमरों में से महज सात ही काम कर रहे हैं, बाकी के 193 खराब पड़े हैं। अनेक कैमरे तो कई पिछले दो साल से ज्यादा समय से खराब है, जिन्हें ठीक करवाने के लिए पुलिस व नगर प्रशासन के बीच कई बार पत्राचार हो चुका है। नगर प्रशासन शहर को सुरक्षित होने का दम भर रहा है तो पुलिस यातायात व्यवस्था से लेकर हर प्रकार के अपराध पर अंकुश लगाने के लिए सदैव तत्पर होने का दावा कर रही है लेकिन इसमें अधिकारी कितने संजीदा है, यह अंदाजा 45 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद बंद पड़ी तीसरी आंख से लगाया जा सकता है। इसका फायदा बदमाश वाहन चालक तक उठा रहे हैं जो वारदात व हादसे के बाद आसानी से निकल जाते हैं। इन कैमरों को लेकर एक बार जिला उपायुक्त ने पुलिस व नगर परिषद की बैठक भी करवाई, जिसमें सामने आया कि जिस कंपनी ने कैमरे लगाए थे उसे उसकी पूरी राशि अदा नहीं की गई तो उसने कैमरे बंद कर दिए। जिला उपायुक्त ने नगर परिषद से बात कर कुछ राशि जारी भी करवाई थी। उसके बाद भी कैमरे चल नहीं पाए। क्योंकि तब तक आधे से ज्यादा कैमरे खराब हो चुके थे।
इसलिए जरूरी है तीसरी आंख ः हादसे व वारदात भी अक्सर होती रहती है। इसके बाद भी पुलिस इन कैमरों को ठीक करवाने के लिए नगर परिषद के सहारे बैठी है।
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कुरुक्षेत्र। नगर परिषद की ओर से वर्ष 2018 में 45 लाख रुपये खर्च कर 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे शहर के विभिन्न चौराहों व अन्य जगहों पर लगाए गए थे। इसके लिए जिला सचिवालय में उपायुक्त कार्यालय के साथ ही कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया था।
इससे शहर की सुरक्षा व्यवस्था और अपराधियों को पकड़ने में पुलिस की राह आसान हुई थी, लेकिन अफसोस इस बात का है कि इन कैमरों में से महज सात ही काम कर रहे हैं, बाकी के 193 खराब पड़े हैं। अनेक कैमरे तो कई पिछले दो साल से ज्यादा समय से खराब है, जिन्हें ठीक करवाने के लिए पुलिस व नगर प्रशासन के बीच कई बार पत्राचार हो चुका है। नगर प्रशासन शहर को सुरक्षित होने का दम भर रहा है तो पुलिस यातायात व्यवस्था से लेकर हर प्रकार के अपराध पर अंकुश लगाने के लिए सदैव तत्पर होने का दावा कर रही है लेकिन इसमें अधिकारी कितने संजीदा है, यह अंदाजा 45 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद बंद पड़ी तीसरी आंख से लगाया जा सकता है। इसका फायदा बदमाश वाहन चालक तक उठा रहे हैं जो वारदात व हादसे के बाद आसानी से निकल जाते हैं। इन कैमरों को लेकर एक बार जिला उपायुक्त ने पुलिस व नगर परिषद की बैठक भी करवाई, जिसमें सामने आया कि जिस कंपनी ने कैमरे लगाए थे उसे उसकी पूरी राशि अदा नहीं की गई तो उसने कैमरे बंद कर दिए। जिला उपायुक्त ने नगर परिषद से बात कर कुछ राशि जारी भी करवाई थी। उसके बाद भी कैमरे चल नहीं पाए। क्योंकि तब तक आधे से ज्यादा कैमरे खराब हो चुके थे।
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इसलिए जरूरी है तीसरी आंख ः हादसे व वारदात भी अक्सर होती रहती है। इसके बाद भी पुलिस इन कैमरों को ठीक करवाने के लिए नगर परिषद के सहारे बैठी है।

कुरुक्षेत्र। पुलिस लाइन के बाहर खराब होने के बाद लटकते सीसीटीवी कैमरे। संवाद

कुरुक्षेत्र। पुलिस लाइन के बाहर खराब होने के बाद लटकते सीसीटीवी कैमरे। संवाद
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