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सेवा से संत बाबा ईशर सिंह ने दिखाई सही राह : नायब सैनी
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पिहोवा। संत बाबा ईशर सिंह जी ने अपना पूरा जीवन नाम-सिमरन, गुरबाणी, कीर्तन, सेवा और मानव कल्याण के लिए समर्पित किया। उनकी साधना और सेवा की परंपरा आज भी लाखों श्रद्धालुओं को प्रेरणा दे रही है। यह विचार मुख्यमंत्री नायब सैनी ने व्यक्त किए।
वह वीरवार को जुरासी स्थित संत बाबा ईशर सिंह दरबार में संत बाबा ईशर सिंह राड़ा साहिब वालों के 51वें बरसी समागम में पहुंचे और उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।
उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी को 21 लाख रुपये का अनुदान देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि किसी महापुरुष की बरसी केवल उनके जीवन को स्मरण करने का अवसर नहीं होती, बल्कि उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का भी अवसर होती है।
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संत भले ही शरीर रूप में हमारे बीच न हों लेकिन उनकी वाणी, विचार और सेवा की परंपरा समाज को हमेशा मार्गदर्शन देती रहती है। उन्होंने संत बाबा ईशर सिंह जी के जीवन पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि उनका जन्म 5 अगस्त 1905 को पंजाब के पटियाला जिले के गांव आलोवाल में माता रतन कौर जी और सरदार राम सिंह नंबरदार के घर हुआ था। बचपन में उनका नाम गुलाब सिंह था। युवावस्था में उन्हें संत अत्तर सिंह जी रेरू साहिब वालों का सान्निध्य और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उनकी प्रेरणा से उन्होंने अमृत छका और गुलाब सिंह से ईशर सिंह बने।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि संत बाबा ईशर सिंह की शिक्षाओं में सेवा और मानव कल्याण का विशेष महत्व रहा है। सेवा और समाज के प्रति समर्पण की भावना को आगे बढ़ाना ही ऐसे महान संतों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
समागम के दौरान श्री अखंड पाठ साहिब एवं सहज पाठ साहिब के भोग, धार्मिक दीवान, संत समागम, कवि दरबार, अरदास और अमृत संचार जैसे विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हो रहे हैं।
ये आयोजन संगत को गुरु-घर से जोड़ने और संतों की शिक्षाओं को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम हैं। इस अवसर पर मुख्य जत्थेदार बाबा मनी सिंह, सुभाष सुधा, जयभगवान शर्मा, जिला परिषद चेयरपर्सन कंवलजीत कौर, बाबा सुरजीत सिंह, बाबा दिलबाग सिंह, सरपंच निशान सिंह, तुषार सैनी मौजूद रहे।
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वह वीरवार को जुरासी स्थित संत बाबा ईशर सिंह दरबार में संत बाबा ईशर सिंह राड़ा साहिब वालों के 51वें बरसी समागम में पहुंचे और उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।
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उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी को 21 लाख रुपये का अनुदान देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि किसी महापुरुष की बरसी केवल उनके जीवन को स्मरण करने का अवसर नहीं होती, बल्कि उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का भी अवसर होती है।
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संत भले ही शरीर रूप में हमारे बीच न हों लेकिन उनकी वाणी, विचार और सेवा की परंपरा समाज को हमेशा मार्गदर्शन देती रहती है। उन्होंने संत बाबा ईशर सिंह जी के जीवन पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि उनका जन्म 5 अगस्त 1905 को पंजाब के पटियाला जिले के गांव आलोवाल में माता रतन कौर जी और सरदार राम सिंह नंबरदार के घर हुआ था। बचपन में उनका नाम गुलाब सिंह था। युवावस्था में उन्हें संत अत्तर सिंह जी रेरू साहिब वालों का सान्निध्य और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उनकी प्रेरणा से उन्होंने अमृत छका और गुलाब सिंह से ईशर सिंह बने।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि संत बाबा ईशर सिंह की शिक्षाओं में सेवा और मानव कल्याण का विशेष महत्व रहा है। सेवा और समाज के प्रति समर्पण की भावना को आगे बढ़ाना ही ऐसे महान संतों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
समागम के दौरान श्री अखंड पाठ साहिब एवं सहज पाठ साहिब के भोग, धार्मिक दीवान, संत समागम, कवि दरबार, अरदास और अमृत संचार जैसे विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हो रहे हैं।
ये आयोजन संगत को गुरु-घर से जोड़ने और संतों की शिक्षाओं को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम हैं। इस अवसर पर मुख्य जत्थेदार बाबा मनी सिंह, सुभाष सुधा, जयभगवान शर्मा, जिला परिषद चेयरपर्सन कंवलजीत कौर, बाबा सुरजीत सिंह, बाबा दिलबाग सिंह, सरपंच निशान सिंह, तुषार सैनी मौजूद रहे।