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Kurukshetra News: हमीदपुर के वैज्ञानिक स्वास्तिक सैनी का चंद्रयान मिशन में रहा अहम योगदान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Aug 2023 01:38 AM IST
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Scientist Swastik Saini of Hamidpur had an important contribution in Chandrayaan mission
कुरुक्षेत्र/ बाबैन। चंद्रयान-3 की चांद पर सफल लैंडिंग हुई तो क्षेत्र का गांव हमीदपुर भी चमक उठा। इसके पीछे गांव के होनहार वैज्ञानिक स्वास्तिक सैनी रहे, जो चंद्रयान-3 मिशन की टीम का अहम हिस्सा रहे। मिशन की इस सफलता पर परिवार व गांव में खुशी की लहर दौड़ गई तो हर कोई स्वास्तिक सैनी पर नाज कर रहा है।
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गांव सुनारिया के राजकीय मीडिल स्कूल के मुख्याध्यापक मास्टर कुलवंत सिंह शास्त्री के मुताबिक बेटे स्वास्तिक मिशन को लेकर पहले भी अक्सर चर्चा करते थे। वे बताते थे कि इस बार हर वैज्ञानिक उत्साह से भरपूर लबरेज है और पूरी उम्मीद है कि यह मिशन सफल होगा। अब मिशन सफल हुआ तो बेटे ने फोन कर माता-पिता को भी बधाई दी। जैसे ही उनके मोबाइल की घंटी बजी तो परिवार व पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।
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चंद्रयान के कैमरे से लेकर इलेक्ट्राॅनिक आइटम किए तैयार
स्वास्तिक सैनी फिलहाल इसरो के अहमदाबाद कार्यालय में वैज्ञानिक के तौर पर तैनात है। इसी कार्यालय में ही चंद्रयान के कैमरों से लेकर अन्य इलेक्ट्रोनिक्स सामान को अंतिम रूप दिया गया। इसमें उनका अहम योगदान रहा है। इन्हीं कैमरों की बदौलत ही आज पूरी दुनिया चांद की तस्वीरें देख पाई है। आज इस सफलता पर स्वातिक सैनी को भी पूरा गर्व है।
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गीता निकेतन विद्यालय का रहा छात्र
स्वास्तिक सैनी गीता निकेतन आवासीय विद्यालय का छात्र रहा है। पिता कुलवंत सिंह बताते हैं कि वह 10वीं व 12वीं से लेकर हर कक्षा में मेधावी रहा। उसकी बचपन से ही वैज्ञानिक बनकर इसरो में काम करने की इच्छा रही और इसे पूरा करने के लिए आईआईटी खड़गपुर से बीटेक व एमटेक किया। वर्ष 2019 में ही नियुक्ति मिली, जिसके चार बाद ही गत जून माह में वे एसई से पदोन्नत होकर एसडी बने। 31 जून को ही पदोन्नति की घर पर पार्टी देकर गए थे। उसी दौरान कहा था कि इस बार इसरो देश को बड़ा तोहफा देने वाला है। स्वास्तिक का भाई माधव भी आईआईटी दिल्ली से वैज्ञानिक बनने के लिए बीटेक की पढ़ाई कर रहा है।

हर किसी का सीना हो गया चौड़ा : राजबीर
गांव के सरपंच राजबीर का कहना है कि स्वास्तिक जैसे वैज्ञानिकों की बदौलत ही आज हर देशवासी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। यह उनके अथक परिश्रम का परिणाम है। आज पूरा देश इन वैज्ञानिकों पर गर्व कर रहा है।



गांव का दूसरा बेटा कृष्ण कुमार भी इसरो में वैज्ञानिक
भले ही हमीदपुर छोटा गांव है, लेकिन इसी का एक और होनहार कृष्ण कुमार भी इसरो में वैज्ञानिक है। फिलहाल वह चंडीगढ़ में तैनात है। उन्होंने कुरुक्षेत्र इंजीनियरिंग कॉलेज से ही बीटेक की थी। पूरा गांव दोनों ही बेटों पर गर्व कर रहा है।
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