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रोडवेज अधिकारियों की लापरवाही पड़ रही कर्मचारियों पर भारी
ब्यूरो, अमर उजाला/कुरुक्षेत्र
Updated Thu, 28 Apr 2016 01:06 AM IST
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हरियाणा रोडवेज कुरुक्षेत्र मेन डिपो में अधिकारियों की लापरवाही यहां के कर्मचारियों पर भारी पड़ती जा रही है। मेन डिपो की टंकी का दूषित पानी इस्तेमाल करने से रोडवेज कर्मचारियों को चर्म रोग की शिकायत होने लगी है। कमाल तो ये है कि पिछले कुछ महीनों में करीब तीन बार टंकी की सफाई कराने को लेकर दरख्वास्त देने के बावजूद विभाग द्वारा कोई एक्शन नहीं लिया गया। कुरुक्षेत्र मेन डिपो के कंडक्टर जय कुमार ने बताया कि टंकी का दूषित पानी पीने से उन्हें शरीर पर खुजली महसूस होने लगी।
इसके बाद टांग पर ज्यादा एलर्जी हुई तो डाक्टर को दिखाया, उन्होंने चर्म रोग की शिकायत बताई। उन्होंने आरोप लगाया कि मेन डिपो में कंडक्टर नवीन शर्मा, रुपेंद्र सिंह, ड्राइवर लक्ष्मण सिंह सहित कम से कम 20 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्हें टंकी का दूषित पानी उपयोग करने से चर्म रोग होने लगा है, लेकिन अधिकारियों के रवैये से से वे आगे नहीं आते।
आरोप लगाया कि कुरुक्षेत्र मेन डिपो में पिछले कई वर्षों से टंकी की सफाई नहीं की गई। लेकिन, सफाई के नाम पर बिल जरूर तैयार कर दिया जाता है। जय कुमार ने आरोप लगाया कि रोडवेज विभाग के कुरुक्षेत्र डिपो में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है। कोई बोलता है तो उसको जान बूझकर प्रताड़ित किया जाता है।
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मानसिक रूप से भी और कागजी कार्रवाई करके भी। उन्होंने कहा कि आवाज उठाने के कारण जिस ड्राइवर या कंडक्टर को सुबह-सुबह चार्जशीट किया गया हो, वह दिनभर मानसिक रूप से परेशान रहता है। ऐसे में कोई दुर्घटना घटना कोई अचंभे की बात नहीं है। इसमें सारा कसूर अधिकारियों का है, जो कर्मचारियों को बेवजह परेशान करते हैं।
जानकारी हासिल करते हुये ये आया सामने
जानकारी जुटाने पर सामने आया कि हाल ही में उक्त समस्या बारे शिकायत की गई थी, जोकि बिल्डिंग क्लर्क द्वारा रिसीव की गई। इस बाबत बिल्डिंग क्लर्क सुनील और सुरेश ने स्वीकार भी किया कि उन्हें लगभग दो महीने पहले टंकी की सफाई कराने को लेकर कर्मचारियों की तरफ से अर्जी मिली है।
लेकिन, सफाई कराई गई या नहीं, इस पर वे चुप्पी साध गये। लेकिन, संबंधित जानकारी देने से क्लर्क कतराते नजर आए। बोले कि इसके बारे में अधिकारी बताएंगे।
आखिर कौन है जिम्मेदार....
फिलहाल कुछ कर्मचारियों को एलर्जिक प्राब्लम हुई है। ऐसे ही चलता रहा तो समस्या निश्चित ही बढ़ेगी। उस पर बिल्डिंग क्लर्क सारी बात सामने लाने के मूड में नहीं हैं। जीएम सीट पर नहीं मिलते और न ही फोन उठाते। यहां प्रश्न उठता है कि उपरोक्त समस्या पर जवाब न देने के लिये आखिर कौन जिम्मेदार है? जवाबदेही से बचते बिल्डिंग क्लर्क या फिर रोडवेज महाप्रबंधक।
जीएम पर प्रताड़ित करने का आरोप
महाप्रबंधक रोहताश सिंह द्वारा कर्मचारियों पर बेवजह दबाव बनाकर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है और इसकी शिकायत सीएम विंडो में भी दी है। बुधवार को दी शिकायत में कहा गया कि पिछले कुछ समय से जीएम रोहताश सिंह सहित अन्य अधिकारी उन्हें जान बूझकर परेशान कर रहे हैं। कंडक्टर रोहताश आट्टा प्रजापत ने आरोप लगाया कि जीएम द्वारा बेवजह कर्मियों पर इल्जाम लगाकर दबाव बनाया जाता है और आवाज उठाने पर चार्जशीट कर दिया जाता है। उन्होंने सीएम से प्रार्थना की है कि रोडवेज की रीढ़ कहे जाने वाले ड्राइवर और कंडक्टरों पर हो रहे अत्याचारों को रोका जाए। जीएम समेत जो अधिकारी दोषी हैं, उन पर कार्रवाई की जाए। जय कुमार ने कहा कि इस विषय में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को भी शिकायत करेंगे।
जीएम सीट पर ही नहीं मिलते.....
जब रोडवेज मेन डिपो के जीएम रोहताश सिंह से बात करनी चाही तो पता चला कि वे सीट पर ही नहीं हैं। कई बार फोन मिलाया गया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया। बता दें कि पिछले कुछ माह से यही सिलसिला चल रहा है। न तो जीएम सीट पर मिलते और न ही अपनी जवाबदेही के लिये फोन उठाते।
ध्यान नहीं कब कराई थी सफाई : विजेंद्र
रोडवेज कुरुक्षेत्र मेन डिपो अधीक्षक विजेंद्र कुमार ने कहा कि पानी की टंकी की सफाई कब कराई गई थी, उनके ध्यान नहीं है। इस बारे में बिल्डिंग क्लर्क से पता करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारी द्वारा अधिकारियों पर प्रताड़ित करने के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वह बेबुनियाद हैं।
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इसके बाद टांग पर ज्यादा एलर्जी हुई तो डाक्टर को दिखाया, उन्होंने चर्म रोग की शिकायत बताई। उन्होंने आरोप लगाया कि मेन डिपो में कंडक्टर नवीन शर्मा, रुपेंद्र सिंह, ड्राइवर लक्ष्मण सिंह सहित कम से कम 20 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्हें टंकी का दूषित पानी उपयोग करने से चर्म रोग होने लगा है, लेकिन अधिकारियों के रवैये से से वे आगे नहीं आते।
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आरोप लगाया कि कुरुक्षेत्र मेन डिपो में पिछले कई वर्षों से टंकी की सफाई नहीं की गई। लेकिन, सफाई के नाम पर बिल जरूर तैयार कर दिया जाता है। जय कुमार ने आरोप लगाया कि रोडवेज विभाग के कुरुक्षेत्र डिपो में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है। कोई बोलता है तो उसको जान बूझकर प्रताड़ित किया जाता है।
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मानसिक रूप से भी और कागजी कार्रवाई करके भी। उन्होंने कहा कि आवाज उठाने के कारण जिस ड्राइवर या कंडक्टर को सुबह-सुबह चार्जशीट किया गया हो, वह दिनभर मानसिक रूप से परेशान रहता है। ऐसे में कोई दुर्घटना घटना कोई अचंभे की बात नहीं है। इसमें सारा कसूर अधिकारियों का है, जो कर्मचारियों को बेवजह परेशान करते हैं।
जानकारी हासिल करते हुये ये आया सामने
जानकारी जुटाने पर सामने आया कि हाल ही में उक्त समस्या बारे शिकायत की गई थी, जोकि बिल्डिंग क्लर्क द्वारा रिसीव की गई। इस बाबत बिल्डिंग क्लर्क सुनील और सुरेश ने स्वीकार भी किया कि उन्हें लगभग दो महीने पहले टंकी की सफाई कराने को लेकर कर्मचारियों की तरफ से अर्जी मिली है।
लेकिन, सफाई कराई गई या नहीं, इस पर वे चुप्पी साध गये। लेकिन, संबंधित जानकारी देने से क्लर्क कतराते नजर आए। बोले कि इसके बारे में अधिकारी बताएंगे।
आखिर कौन है जिम्मेदार....
फिलहाल कुछ कर्मचारियों को एलर्जिक प्राब्लम हुई है। ऐसे ही चलता रहा तो समस्या निश्चित ही बढ़ेगी। उस पर बिल्डिंग क्लर्क सारी बात सामने लाने के मूड में नहीं हैं। जीएम सीट पर नहीं मिलते और न ही फोन उठाते। यहां प्रश्न उठता है कि उपरोक्त समस्या पर जवाब न देने के लिये आखिर कौन जिम्मेदार है? जवाबदेही से बचते बिल्डिंग क्लर्क या फिर रोडवेज महाप्रबंधक।
जीएम पर प्रताड़ित करने का आरोप
महाप्रबंधक रोहताश सिंह द्वारा कर्मचारियों पर बेवजह दबाव बनाकर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है और इसकी शिकायत सीएम विंडो में भी दी है। बुधवार को दी शिकायत में कहा गया कि पिछले कुछ समय से जीएम रोहताश सिंह सहित अन्य अधिकारी उन्हें जान बूझकर परेशान कर रहे हैं। कंडक्टर रोहताश आट्टा प्रजापत ने आरोप लगाया कि जीएम द्वारा बेवजह कर्मियों पर इल्जाम लगाकर दबाव बनाया जाता है और आवाज उठाने पर चार्जशीट कर दिया जाता है। उन्होंने सीएम से प्रार्थना की है कि रोडवेज की रीढ़ कहे जाने वाले ड्राइवर और कंडक्टरों पर हो रहे अत्याचारों को रोका जाए। जीएम समेत जो अधिकारी दोषी हैं, उन पर कार्रवाई की जाए। जय कुमार ने कहा कि इस विषय में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को भी शिकायत करेंगे।
जीएम सीट पर ही नहीं मिलते.....
जब रोडवेज मेन डिपो के जीएम रोहताश सिंह से बात करनी चाही तो पता चला कि वे सीट पर ही नहीं हैं। कई बार फोन मिलाया गया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया। बता दें कि पिछले कुछ माह से यही सिलसिला चल रहा है। न तो जीएम सीट पर मिलते और न ही अपनी जवाबदेही के लिये फोन उठाते।
ध्यान नहीं कब कराई थी सफाई : विजेंद्र
रोडवेज कुरुक्षेत्र मेन डिपो अधीक्षक विजेंद्र कुमार ने कहा कि पानी की टंकी की सफाई कब कराई गई थी, उनके ध्यान नहीं है। इस बारे में बिल्डिंग क्लर्क से पता करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारी द्वारा अधिकारियों पर प्रताड़ित करने के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वह बेबुनियाद हैं।