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Kurukshetra News: फूलगढ़-भेरियां में रियाज का शव सुपुर्द-ए-खाक
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कुरुक्षेत्र / पिहोवा। असमानपुर गांव में मुस्लिम समुदाय और ग्रामीणों के बीच हंगामे के बाद रविवार को दूसरे गांव के कब्रिस्तान में परिजनों ने शव को सुपुर्द-ए-खाक किया। सुबह थाने में मुस्लिम समुदाय असमानपुर गांव में वक्फ बोर्ड की जमीन में कब्रिस्तान नहीं दिखा सका।
गौरतलब है कि शनिवार को रियाज के शव को दफनाने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग और ग्रामीण आमने-सामने हो गए थे। इस पर पुलिस ने दोनों पक्ष को समझाकर सुबह खाने में तलब किया था। रविवार को दोनों पक्ष थाने में पहुंचे। पुलिस ने मामले को सुलझाने के लिए तहसीलदार से मदद की सिफारिश की। राजस्व विभाग के रिकॉर्ड से साफ हो गया कि असमानपुर गांव में वक्फ बोर्ड की जमीन पर कहीं भी कब्रिस्तान की जगह नहीं पाई गई। इस पर मुस्लिम समुदाय के लोग राजी हो गए। उन्होंने फूलगढ़-भेरियां गांव में रियाज के शव को रीति के मुताबिक दफना दिया। उधर, भविष्य में इस तरह का कोई मामला न भड़के, उसके लिए पुलिस ने प्रशासन को जगह की निशानदेही कराने के लिए पत्र भेजने का निर्णय लिया है।
खेती के लिए बोर्ड की जमीन
गांव के पूर्व सरपंच नरेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में वक्फ बोर्ड की जमीन खेती योग्य है। इस पर खेती ही होती रही है। बोर्ड अपनी मर्जी से जमीन को ठेके पर देता है। हालांकि इस बार खाली है। शायद बोर्ड ने जमीन को खेती के लिए नहीं दिया है।
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गांव में करीब पौने छह एकड़ जमीन वक्फ बोर्ड की
थाना प्रभारी विक्रांत ने बताया कि राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक असमानपुर गांव में करीब पौने छह एकड़ जमीन वक्फ बोर्ड के नाम पर दर्ज है। इस जमीन पर कहीं भी कब्रिस्तान के लिए कोई जगह चिह्नित नहीं है। इस मामले को पुलिस अधीक्षक की जानकारी में लाया गया है। आगे इस तरह को कोई मामला न हो उसके लिए प्रशासन को पत्र भेजकर जगह की निशानदेही की सिफारिश की जाएगी। बोर्ड की ओर से जमीन पर किसी के कब्जा करने की शिकायत भी पुलिस के पास नहीं है।
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गौरतलब है कि शनिवार को रियाज के शव को दफनाने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग और ग्रामीण आमने-सामने हो गए थे। इस पर पुलिस ने दोनों पक्ष को समझाकर सुबह खाने में तलब किया था। रविवार को दोनों पक्ष थाने में पहुंचे। पुलिस ने मामले को सुलझाने के लिए तहसीलदार से मदद की सिफारिश की। राजस्व विभाग के रिकॉर्ड से साफ हो गया कि असमानपुर गांव में वक्फ बोर्ड की जमीन पर कहीं भी कब्रिस्तान की जगह नहीं पाई गई। इस पर मुस्लिम समुदाय के लोग राजी हो गए। उन्होंने फूलगढ़-भेरियां गांव में रियाज के शव को रीति के मुताबिक दफना दिया। उधर, भविष्य में इस तरह का कोई मामला न भड़के, उसके लिए पुलिस ने प्रशासन को जगह की निशानदेही कराने के लिए पत्र भेजने का निर्णय लिया है।
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खेती के लिए बोर्ड की जमीन
गांव के पूर्व सरपंच नरेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में वक्फ बोर्ड की जमीन खेती योग्य है। इस पर खेती ही होती रही है। बोर्ड अपनी मर्जी से जमीन को ठेके पर देता है। हालांकि इस बार खाली है। शायद बोर्ड ने जमीन को खेती के लिए नहीं दिया है।
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गांव में करीब पौने छह एकड़ जमीन वक्फ बोर्ड की
थाना प्रभारी विक्रांत ने बताया कि राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक असमानपुर गांव में करीब पौने छह एकड़ जमीन वक्फ बोर्ड के नाम पर दर्ज है। इस जमीन पर कहीं भी कब्रिस्तान के लिए कोई जगह चिह्नित नहीं है। इस मामले को पुलिस अधीक्षक की जानकारी में लाया गया है। आगे इस तरह को कोई मामला न हो उसके लिए प्रशासन को पत्र भेजकर जगह की निशानदेही की सिफारिश की जाएगी। बोर्ड की ओर से जमीन पर किसी के कब्जा करने की शिकायत भी पुलिस के पास नहीं है।