{"_id":"686c23192e008bb2de0fd7c0","slug":"ritas-strong-intentions-became-helpful-in-protecting-the-environment-kurukshetra-news-c-45-1-knl1024-138467-2025-07-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: रीटा के मजबूत इरादे पर्यावरण संरक्षण में बने मददगार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: रीटा के मजबूत इरादे पर्यावरण संरक्षण में बने मददगार
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। कुलबीर सिंह।
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी काम असंभव नहीं होता। इसे साकार कर दिखाया है इस्माईलाबाद कस्बे के लोटनी गांव की सरपंच रीटा रानी ने। उन्होंने पराली प्रबंधन को न केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम बनाया, बल्कि इसे आजीविका और रोजगार का भी सशक्त जरिया बना दिया है।
रीटा रानी देविका स्वयं सहायता समूह से 2020 से जुड़ी हुई है, जिन्होंने वर्ष 2022 में पराली प्रबंधन की दिशा में पहल की थी। उन्होंने ग्राम संगठन की शुरुआत की और बेलर मशीन के माध्यम से पराली को एकत्र कर उसके उचित प्रबंधन का कार्य शुरू किया।
शुरुआत में यह एक छोटा प्रयास था, लेकिन आज यह एक सफल मॉडल बन चुका है, जिससे सालाना करीब सात से आठ लाख रुपये की आमदनी हो रही है। यही नहीं, रीटा ने दर्जनों ग्रामीणों को भी इस कार्य से जोड़ा है, जिससे उन्हें भी स्थायी रोजगार मिला है।
विज्ञापन
रीटा के पति कुलबीर सिंह खुद किसान हैं और खेती-किसानी के हर पहलू को अच्छी तरह समझते हैं। रीटा और कुलबीर दोनों ने मिलकर यह कार्य आगे बढ़ाया। पराली को जलाने की बजाय उसे मशीनों से इकट्ठा कर इससे पैकेजिंग सामग्री, गत्ता और बायो फ्यूल आदि फैक्ट्रियों में सप्लाई किया जा रहा है। इससे जहां खेत की उपजाऊ क्षमता बनी रहती है, वहीं वायु प्रदूषण में भी कमी आती है। कुलबीर सिंह ने बताया कि यह कार्य धान के सीजन में किया जाता है, जिसमें गांव के करीब 70 से अधिक लोगों को गांव में ही रोजगार मिल जाता है।
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी काम असंभव नहीं होता। इसे साकार कर दिखाया है इस्माईलाबाद कस्बे के लोटनी गांव की सरपंच रीटा रानी ने। उन्होंने पराली प्रबंधन को न केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम बनाया, बल्कि इसे आजीविका और रोजगार का भी सशक्त जरिया बना दिया है।
रीटा रानी देविका स्वयं सहायता समूह से 2020 से जुड़ी हुई है, जिन्होंने वर्ष 2022 में पराली प्रबंधन की दिशा में पहल की थी। उन्होंने ग्राम संगठन की शुरुआत की और बेलर मशीन के माध्यम से पराली को एकत्र कर उसके उचित प्रबंधन का कार्य शुरू किया।
विज्ञापन
शुरुआत में यह एक छोटा प्रयास था, लेकिन आज यह एक सफल मॉडल बन चुका है, जिससे सालाना करीब सात से आठ लाख रुपये की आमदनी हो रही है। यही नहीं, रीटा ने दर्जनों ग्रामीणों को भी इस कार्य से जोड़ा है, जिससे उन्हें भी स्थायी रोजगार मिला है।
विज्ञापन
रीटा के पति कुलबीर सिंह खुद किसान हैं और खेती-किसानी के हर पहलू को अच्छी तरह समझते हैं। रीटा और कुलबीर दोनों ने मिलकर यह कार्य आगे बढ़ाया। पराली को जलाने की बजाय उसे मशीनों से इकट्ठा कर इससे पैकेजिंग सामग्री, गत्ता और बायो फ्यूल आदि फैक्ट्रियों में सप्लाई किया जा रहा है। इससे जहां खेत की उपजाऊ क्षमता बनी रहती है, वहीं वायु प्रदूषण में भी कमी आती है। कुलबीर सिंह ने बताया कि यह कार्य धान के सीजन में किया जाता है, जिसमें गांव के करीब 70 से अधिक लोगों को गांव में ही रोजगार मिल जाता है।

कुरुक्षेत्र। कुलबीर सिंह।

कुरुक्षेत्र। कुलबीर सिंह।