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अनुसंधान मानव को नया ज्ञान प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण उपकरण : डाॅ. सुदेश
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कुरुक्षेत्र। सेठ नवरंग राय लोहिया जयराम कन्या महाविद्यालय में रिसर्च मेथोडोलॉजी इन सोशल साइंसेज विषय पर उच्चतर शिक्षा विभाग पंचकूला द्वारा अनुमोदित ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। डॉ. सुदेश ने कहा कि अनुसंधान मानव को नया ज्ञान प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। इस संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में डाॅ. सीआर ड्रोलिया रिटायर्ड प्रोफेसर मनोविज्ञान विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, विशिष्ट अतिथि के रूप में डाॅ. सुनीता अरोड़ा राजकीय कन्या महाविद्यालय गुरुग्राम, रिसोर्स पर्सन के रूप में डाॅ. विनोद कुमार एसोसिएट प्रो. लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी फगवाड़ा रहे।
सर्वप्रथम महाविद्यालय की प्राचार्य डाॅ. सुदेश रावल व संगोष्ठी की संयोजिका अंजू सैनी ने विषय वस्तु की रूपरेखा प्रस्तुत की। डाॅ. सुनीता अरोड़ा ने कहा कि अनुसंधान पद्धति को कई अकादमिक विषयों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, मनोविज्ञान, सामाजिक कार्य, नर्सिंग, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पुस्तकालय अध्ययन, औषधि विज्ञान में कई तरीके से सहायक विषय के रूप में पढ़ाया जाता है। यह किसी भी राष्ट्र और समाज के विकास के लिए सूचना प्राप्त करने की एक महत्वपूर्ण विधा है।
मुख्य अतिथि डाॅ. ड्रोलिया ने शोध प्रक्रिया की सटीक एवं सारगर्भित व्याख्या प्रस्तुत की। रिसोर्स पर्सन डाॅ. विनोद कुमार ने शोध पर बल देते हुए कहा कि हमारी शोध प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें हमारा ज्ञान प्रदर्शित हो, हमारा व्यक्तित्व झलके और विषय ऐसा होना चाहिए जो समाज के लिए उपयोगी हो। प्राचार्या डाॅ. सुदेश रावल ने कहा कि शोध प्रक्रिया एक ऐसा विषय है जो हम सबके लिए बहुत उपयोगी है।
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सर्वप्रथम महाविद्यालय की प्राचार्य डाॅ. सुदेश रावल व संगोष्ठी की संयोजिका अंजू सैनी ने विषय वस्तु की रूपरेखा प्रस्तुत की। डाॅ. सुनीता अरोड़ा ने कहा कि अनुसंधान पद्धति को कई अकादमिक विषयों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, मनोविज्ञान, सामाजिक कार्य, नर्सिंग, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पुस्तकालय अध्ययन, औषधि विज्ञान में कई तरीके से सहायक विषय के रूप में पढ़ाया जाता है। यह किसी भी राष्ट्र और समाज के विकास के लिए सूचना प्राप्त करने की एक महत्वपूर्ण विधा है।
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मुख्य अतिथि डाॅ. ड्रोलिया ने शोध प्रक्रिया की सटीक एवं सारगर्भित व्याख्या प्रस्तुत की। रिसोर्स पर्सन डाॅ. विनोद कुमार ने शोध पर बल देते हुए कहा कि हमारी शोध प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें हमारा ज्ञान प्रदर्शित हो, हमारा व्यक्तित्व झलके और विषय ऐसा होना चाहिए जो समाज के लिए उपयोगी हो। प्राचार्या डाॅ. सुदेश रावल ने कहा कि शोध प्रक्रिया एक ऐसा विषय है जो हम सबके लिए बहुत उपयोगी है।
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