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Kurukshetra News: ट्यूबवेल कनेक्शन विवाद में निचली अदालत के फैसले पर रोक से इन्कार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 06 Oct 2025 01:54 AM IST
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Refusal to stay lower court's decision in tubewell connection dispute
कुरुक्षेत्र। अतिरिक्त जिला जज अमरिंदर शर्मा की अदालत ने वादी रोशन लाल द्वारा भाई के नए बोरवेल को विद्युत कनेक्शन हस्तांतरित करने पर रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने दो सितंबर को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) रेणु बाला द्वारा पारित आदेश को बरकरार रखते हुए कहा, वादी रोशनलाल अपने पक्ष में पर्याप्त सबूत उपलब्ध कराने में असफल रहे।
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यह अपील दो सितंबर को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) रेणु बाला द्वारा पारित आदेश के खिलाफ थी, जिसमें रोशन लाल की अंतरिम निषेधाज्ञा की अर्जी को खारिज किया गया था।
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रामसरण माजरा गांव के रोशनलाल (62) ने अपने भाई विक्रम सिंह और अन्य प्रतिवादियों अभिमन्यु कुमार, पवन कुमार, और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। यह मुकदमा उनके हिस्सेदारी वाले खेत से स्थित ट्यूबवेल के बिजली कनेक्शन को बिना उनकी सहमति के स्थानांतरित करने या अन्य ट्यूबवेल तक बिजली आपूर्ति लेने से रोकने के लिए था।
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रोशन लाल का दावा था कि प्रतिवादी ने उनके दूसरे खेत में नया बोरवेल स्थापित किया, जिसमें उनका कोई स्वामित्व नहीं है और पुराने कनेक्शन से अवैध रूप से बिजली खींची। विक्रम सिंह और अन्य प्रतिवादियों ने तर्क दिया कि पुराना ट्यूबवेल खराब हो चुका है और भूजल स्तर कम होने के कारण बेकार हो गया है। प्रतिवादियों ने दावा किया कि रोशन लाल की सहमति से नया बोरवेल स्थापित किया गया था और इस संबंध में 28 अप्रैल 2024 को संयुक्त आवेदन और 28 अगस्त 2024 को आपसी समझौता पत्र भी दायर किया गया था। प्रतिवादियों ने कहा कि रोशन लाल ने इन तथ्यों को छिपाया और उनकी अपील में कोई कानूनी आधार नहीं है।

अतिरिक्त जिला जज अमरिंदर शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि रोशन लाल प्रथम दृष्टया मजबूत मामला स्थापित करने में विफल रहे। स्थानीय आयुक्त द्वारा 17 जुलाई को दायर रिपोर्ट के अनुसार पुराना ट्यूबवेल कार्यशील नहीं है। और नया बोरवेल इस खेत में स्थापित किया गया है। उसके लिए संयुक्त आवेदन और समझौता पत्र की सत्यता का परीक्षण मुकदमे के दौरान होगा, लेकिन अंतरिम चरण में यह स्पष्ट नहीं है कि वादी के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। निचली अदालत ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए निर्देश दिया था कि रोशन लाल को उनकी हिस्सेदारी के अनुपात में पानी मिलेगा।
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