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काफी रोचक है छोटे से शहर से निकलकर 'खेल रत्न' बनने की रानी रामपाल की कहानी, पढ़ें इंटरव्यू

Wed, 19 Aug 2020 02:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला, शाहबाद(कुरुक्षेत्र)
अमर उजाला, शाहबाद(कुरुक्षेत्र) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 19 Aug 2020 02:03 PM IST
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Khel Ratna Award to Hockey Player Rani Rampal
रानी रामपाल
पिता ने तांगा हांक-हांक कर कुछ कर गुजरने की प्रेरणा दी और बेटी रानी रामपाल ने एक छोटे से शहर से निकल कर उनका नाम पूरी दुनिया में चमका दिया। पढ़ें रानी रामपाल के हॉकी 'क्वीन' बनने की रोचक कहानी...
Khel Ratna Award to Hockey Player Rani Rampal
रानी रामपाल
भारतीय हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल के लिए 2020 स्वर्णिम रहा है। 30 जनवरी, 2020 को जहां रानी ने वर्ल्ड गेम्स एथलीट ऑफ द ईयर जीता था, वहीं इसी वर्ष रानी को देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार पद्मश्री के लिए चुना गया था। अब रानी रामपाल के नाम की सिफारिश राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड के लिए की गई है। रानी रामपाल के नाम की सिफारिश खेल रत्न के लिए किए जाने से खेल जगत में खुशी है और रानी के परिजन भी बेहद खुश है।
Khel Ratna Award to Hockey Player Rani Rampal
रानी रामपाल
रानी रामपाल अर्जुन अवार्ड व हरियाणा के सर्वोच्च भीम अवार्ड को पहले से ही अपनी सफलताओं के खाते में जोड़ चुकी है। पिछले कई वर्षों से भारतीय महिला हॉकी ने रानी की कप्तानी में बेहद बढ़िया परिणाम दिए हैं। वर्ष 2017 में रानी की अगुवाई में भारतीय टीम ने एशियाई कप में सशक्त जीत हासिल की थी और वर्ष 2018 में रजत पदक जीता था। एफआईएच में रानी के निर्णायक गोल से भारतीय टीम ओलंपिक क्वालीफायर्स कर सकी।
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Khel Ratna Award to Hockey Player Rani Rampal
रानी रामपाल
बदल दिए परिवार के हालात
रानी रामपाल की हॉकी की दुनिया में आने की शुरूआत की बात की जाए तो वह समय रानी के लिए बेहद गरीबी वाला था। रानी के घर को देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता था कि शाहाबाद कस्बा के माजरी मौहल्ला के घोड़ा घाड़ी चलाने वाले रामपाल की बेटी एक दिन सचमुख में देश की रानी बेटी बनेगी। रानी ने वह कर दिखाया, जिसे देखकर हर पिता यह कह सकता है कि जिसकी बेटी देश का गौरव, उससे बड़ी अमीर और कौन।
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Khel Ratna Award to Hockey Player Rani Rampal
रानी रामपाल
पिता ने खिलाड़ियों को देख बेटी को भेजा था मैदान में
रानी के संघर्ष की कहानी पिता की मेहनत के साथ शुरू हुई थी। रानी के पिता शाहाबाद की सड़कों पर घोड़ा घाड़ी चलाया करते थे और अक्सर महिला हॉकी खिलाड़ियों को आते-जाते देखते थे। बस यहीं से पिता के दिल में बेटी को खिलाड़ी बनाने की चाह जाग उठी और वह 6 वर्षीय बेटी को एसजीएनपी स्कूल के हॉकी मैदान में कोच बलदेव सिंह के पास छोड़ जाए। जहां से रानी की हॉकी की स्वर्णिम शुरूआत हुई।
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