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रत्नावली महोत्सव : हरियाणवी रागनी प्रतियोगिता में परंपरा और सुरों की जुगलबंदी से गूंजा मंच, दर्शक हुए गदगद

Sat, 01 Nov 2025 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Sat, 01 Nov 2025 01:41 AM IST
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Ratnavali Festival: The stage resounded with the jugalbandi of tradition and tunes in the Haryanvi Ragini competition, leaving the audience enthralled.
कुरुक्षेत्र। बलकार।
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय रत्नावली महोत्सव में अंतिम दिन हरियाणवी रागनी प्रतियोगिता ने दर्शकों का दिल जीत लिया। मंच पर जब ढोलक की थाप और सारंगी की सुर लहराई और पूरा परिसर हरियाणवी संस्कृति की मधुर बयार में डूब गया। रागनी की यह संगीतमय शाम केवल कला का प्रदर्शन नहीं बल्कि लोक संस्कृति की विरासत को सहेजने का प्रयास भी रही।
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इस प्रतियोगिता में बुजुर्ग कलाकारों के साथ युवा रागनी गायक भी मंच पर उतरे। जहां बुजुर्गों ने परंपरा और गायकी की गंभीरता दिखाई। वहीं युवाओं ने नई ऊर्जा और आधुनिक सोच के साथ रागनी में ताजगी भरी। इस अनूठे संगम ने दर्शकों को लोक कला की गहराई का अहसास कराया। युवाओं ने बताया कि रागनी की प्रस्तुति के लिए बड़े बुजुर्गों के पास बैठक मार्गदर्शन लिया और शिक्षकों के सहयोग से इसे तैयार किया।
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संस्कृति को जिंदा रखने का बड़ा मंच
कार्यक्रम में आए 72 वर्षीय दर्शक फतेह सिंह ने पुराने दौर को याद करते हुए कहा कि पहले रागनी समाज को दिशा देती थी, संस्कार सिखाती थी। आज के कुछ नए रागनी गायक सिर्फ ताल और तड़क-भड़क पर ध्यान देते हैं, सामाजिक मुद्दे कम हो गए हैं। रत्नावली जैसे मंच युवाओं को फिर सही दिशा दे रहे हैं, यह गर्व की बात है।
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कलाकार कम, जिम्मेदारी बड़ी
दर्शक बलकार सिंह ने कहा कि आज रागनी कहने वाले कलाकार बहुत कम रह गए हैं। परंपरागत रागनी सीखने और सिखाने की ललक भी घट रही है। ऐसे में रत्नावली का यह प्रयास बहुत सराहनीय है। यह मंच नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ रहा है। रागनी सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज सुधार का माध्यम है। इस तरह की प्रतियोगिता को और बड़े स्तर पर आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि अधिक युवा जुड़ें और कला को आगे बढ़ाएं।

युवाओं का जोश और नई सोच

प्रतियोगिता में उतरे युवा कलाकारों ने सामाजिक मुद्दों, किसानों के संघर्ष, ग्रामीण जीवन और नए भारत की तस्वीर को रागनी में पिरोया। कुछ युवाओं ने महिला सशक्तिकरण और शिक्षा जैसे विषयों पर भी प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। युवा प्रतिभागी मयंक ने कहा कि हम नई पीढ़ी हैं, पर हमारी संस्कृति हमारी पहचान है। हम इसे आधुनिक दौर में भी जिंदा रखेंगे।

कुरुक्षेत्र। बलकार।

कुरुक्षेत्र। बलकार।

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