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भगवान भोलेनाथ एवं माता पार्वती की पूजा से है रंगभरी एकादशी : जगन्नाथ
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कुरुक्षेत्र। श्री मारकंडेश्वर महादेव मंदिर ठसका मीरां जी में रंगभरी एकादशी के अवसर पर श्रद्धालुओं की ओर से भगवान भोलेनाथ एवं माता पार्वती की पूजा मंत्रोच्चार के साथ की गई।
अखिल भारतीय श्री मारकंडेश्वर जनसेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत जगन्नाथ पुरी ने बताया कि रंगभरी एकादशी का संबंध भगवान भोलेनाथ एवं माता पार्वती से है। शेष सभी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा होती है। यह हर साल फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रंगभरी एकादशी मनाई जाती है। इसी दिन आंवला एकादशी या आमलकी एकादशी भी होती है। उन्होंने बताया कि यह एक ऐसा दिन है कि श्रद्धालु भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की पूजा करते हैं। साल भर में ऐसे मौके बहुत कम आते हैं।
उन्होंने बताया कि रंगभरी एकादशी के दिन विवाह के बाद पहली बार भगवान शिव माता पार्वती को लेकर अपनी नगरी काशी आए थे। तब शिव गणों और भक्तों ने माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ का गुलाल से स्वागत किया था। तब से हर साल रंगभरी एकादशी पर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा होती है। रंगभरी एकादशी पर पूजन उपरांत आरती हुई और प्रसाद वितरित किया।
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अखिल भारतीय श्री मारकंडेश्वर जनसेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत जगन्नाथ पुरी ने बताया कि रंगभरी एकादशी का संबंध भगवान भोलेनाथ एवं माता पार्वती से है। शेष सभी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा होती है। यह हर साल फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रंगभरी एकादशी मनाई जाती है। इसी दिन आंवला एकादशी या आमलकी एकादशी भी होती है। उन्होंने बताया कि यह एक ऐसा दिन है कि श्रद्धालु भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की पूजा करते हैं। साल भर में ऐसे मौके बहुत कम आते हैं।
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उन्होंने बताया कि रंगभरी एकादशी के दिन विवाह के बाद पहली बार भगवान शिव माता पार्वती को लेकर अपनी नगरी काशी आए थे। तब शिव गणों और भक्तों ने माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ का गुलाल से स्वागत किया था। तब से हर साल रंगभरी एकादशी पर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा होती है। रंगभरी एकादशी पर पूजन उपरांत आरती हुई और प्रसाद वितरित किया।
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