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राजस्थानी लोक कलाकारों ने मोहा दर्शकों का मन
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
Updated Fri, 29 Jul 2016 12:47 AM IST
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कार्यक्रम में प्रस्तुती देते कलाकार।
- फोटो : Amar Ujala
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हरियाणा कला परिषद एवं राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के संयुक्त तत्वाधान में राजस्थानी सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम की विधिवत शुुरुआत खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष संजय भाटिया ने की। उन्होंने कहा कि भारत के प्रत्येक क्षेत्र में अलग-अलग लोक विधाएं हैं, जो सभी को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करती हैं।
वहीं हरियाणा कला परिषद के मुख्य सलाहकार रॉकी मित्तल, अतिरिक्त मुख्य सलाहकार महेश जोशी, कार्यकारिणी सदस्य नागेंद्र शर्मा तथा बीजेपी कार्यकर्ता पंकज शर्मा भी साथ रहे। कार्यक्रम का मंच संचालन विकास शर्मा ने किया। राजस्थानी लोक रंगों से सजे कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति जोधपुर से बुंदू खां लंगा और उनके कलाकारों की रही।
उन्होंने खड़ताल वादन और राजस्थानी लोक गायन की न केवल प्रस्तुति दी, बल्कि मुंह से अलग-अलग वाद्ययंत्रों की ध्वनि निकालकर लोगों का खूब मनोरंजन भी किया। इसके बाद लीला देवी और साथी कलाकारों द्वारा तेरहताल नृत्य प्रस्तुत किया गया। पश्चिमी राजस्थान के जेसलमेर स्थित बाबा रामदेबा की आराधना के लिए कामड़ जाति की महिलाओं द्वारा तेरहताल नृत्य की प्रस्तुति शानदार रही।
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महिला कलाकारों ने अपने शरीर पर तेरह जगह मंजीरे बांधकर अद्भुत नृत्य पेश किया। अलवर राजस्थान से आए यूसुफ खान एवं कलाकारों ने भंपग वादन से दर्शकों का मन मोह लिया। उन्होंने गीत या दुनिया में देख ल्यो हो रईए टर-टर द्वारा भरपूर मनोरंजित किया।
अगली प्रस्तुति विरेंद्र सिंह एवं कलाकारों द्वारा चरी नृत्य की रही, जिसमें राजस्थान की महिलाओं द्वारा पानी भरने जाते समय सिर पर कलश रखकर किए जाने वाले नृत्य का प्रस्तुतिकरण किया। केवल थाली, बांकिया और ढोल की थाप पर किए जाने वाले इस नृत्य ने खूब तालियां बटोरी। इसके बाद मोहिनी देवी ने भवाई नृत्य की प्रस्तुति दी, जोकि दर्शकों के विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
मोहिनी देवी को सिर पर आठ कलश रखकर गिलास, परात व नंगी तलवारों के ऊपर नृत्य करते देख सभी दर्शक दंग रह गए। ब्रज के साथ लगते राजस्थान से आए अशोक शर्मा एवं साथी कलाकारों ने मयूर नृत्य द्वारा भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम की प्रेमलीला दिखाई।
कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति राजस्थान के विख्यात नृत्य कालबेलिया की रही, जिसमें जोधपुर से आए रुपनाथ एवं साथी कलाकारों ने नृत्य के माध्यम से अलग-अलग करतब दिखाकर लोगों का खूब मनोरंजन किया। कार्यक्रम के अंत में अतिरिक्त मुख्य सलाहकार महेश जोशी ने हरियाणा कला परिषद, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी एवं राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों से आए कलाकारों को उनके स्वर्णिम भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।
इस अवसर पर कार्यालय प्रभारी रीटा शर्मा, परिषद से रविंद्र कुमार, रंगकर्मी शिवकुमार, नरेश सागवाल, कृष्ण पांचाल, हिसार से पंचायत सचिव लेखराज, सुरेंद्र कुमार तथा चंद्रशेखर शर्मा सहित बड़ी संख्या में कलाप्रेमियों ने कलाकारों का जमकर उत्साह बढ़ाया।
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वहीं हरियाणा कला परिषद के मुख्य सलाहकार रॉकी मित्तल, अतिरिक्त मुख्य सलाहकार महेश जोशी, कार्यकारिणी सदस्य नागेंद्र शर्मा तथा बीजेपी कार्यकर्ता पंकज शर्मा भी साथ रहे। कार्यक्रम का मंच संचालन विकास शर्मा ने किया। राजस्थानी लोक रंगों से सजे कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति जोधपुर से बुंदू खां लंगा और उनके कलाकारों की रही।
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उन्होंने खड़ताल वादन और राजस्थानी लोक गायन की न केवल प्रस्तुति दी, बल्कि मुंह से अलग-अलग वाद्ययंत्रों की ध्वनि निकालकर लोगों का खूब मनोरंजन भी किया। इसके बाद लीला देवी और साथी कलाकारों द्वारा तेरहताल नृत्य प्रस्तुत किया गया। पश्चिमी राजस्थान के जेसलमेर स्थित बाबा रामदेबा की आराधना के लिए कामड़ जाति की महिलाओं द्वारा तेरहताल नृत्य की प्रस्तुति शानदार रही।
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महिला कलाकारों ने अपने शरीर पर तेरह जगह मंजीरे बांधकर अद्भुत नृत्य पेश किया। अलवर राजस्थान से आए यूसुफ खान एवं कलाकारों ने भंपग वादन से दर्शकों का मन मोह लिया। उन्होंने गीत या दुनिया में देख ल्यो हो रईए टर-टर द्वारा भरपूर मनोरंजित किया।
अगली प्रस्तुति विरेंद्र सिंह एवं कलाकारों द्वारा चरी नृत्य की रही, जिसमें राजस्थान की महिलाओं द्वारा पानी भरने जाते समय सिर पर कलश रखकर किए जाने वाले नृत्य का प्रस्तुतिकरण किया। केवल थाली, बांकिया और ढोल की थाप पर किए जाने वाले इस नृत्य ने खूब तालियां बटोरी। इसके बाद मोहिनी देवी ने भवाई नृत्य की प्रस्तुति दी, जोकि दर्शकों के विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
मोहिनी देवी को सिर पर आठ कलश रखकर गिलास, परात व नंगी तलवारों के ऊपर नृत्य करते देख सभी दर्शक दंग रह गए। ब्रज के साथ लगते राजस्थान से आए अशोक शर्मा एवं साथी कलाकारों ने मयूर नृत्य द्वारा भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम की प्रेमलीला दिखाई।
कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति राजस्थान के विख्यात नृत्य कालबेलिया की रही, जिसमें जोधपुर से आए रुपनाथ एवं साथी कलाकारों ने नृत्य के माध्यम से अलग-अलग करतब दिखाकर लोगों का खूब मनोरंजन किया। कार्यक्रम के अंत में अतिरिक्त मुख्य सलाहकार महेश जोशी ने हरियाणा कला परिषद, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी एवं राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों से आए कलाकारों को उनके स्वर्णिम भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।
इस अवसर पर कार्यालय प्रभारी रीटा शर्मा, परिषद से रविंद्र कुमार, रंगकर्मी शिवकुमार, नरेश सागवाल, कृष्ण पांचाल, हिसार से पंचायत सचिव लेखराज, सुरेंद्र कुमार तथा चंद्रशेखर शर्मा सहित बड़ी संख्या में कलाप्रेमियों ने कलाकारों का जमकर उत्साह बढ़ाया।