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बारिश और ओलों से पकी फसलों को नुकसान
ब्यूरो,अमर उजाला/कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 08 Apr 2016 12:53 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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गुरुवार बाद दोपहर कुरुक्षेत्र में काली घटाएं छा गई तो समीप लगते शाहबाद क्षेत्र में लगभग साढ़े 4 बजे अचानक तेज बारिश आई व जमकर ओले गिरे। जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। दो दिनों से हल्के-हल्के बादल छाये हुए थे। हालांकि सुबह से ही मौसम बिलकुल साफ बना हुआ था लेकिन अचानक आकाश में काली घटा छा गई और धुआंधार बारिश शुरू हो गई। अनाज मंडी में अपनी फसल बेचने आए किसानों को भी काफी नुकसान हुआ। किसानों ने अपनी गेहूं को सूखने के लिए डाला हुआ था और जिस समय गेहूं सूखकर भराई के लिए तैयार हुई अचानक बारिश शुरू हो गई और सूखा हुआ गेहूं फिर से बिग गया। हालांकि शाहाबाद में तो हल्की ओलावृष्टि हुई। लेकिन नजदीकी गांवों तंगौर, कठवा व कलसाना में भारी ओलावृष्टि हुई है। कठवा के सरपंच अमरिंद्र सिंह ने बताया कि ओलावृष्टि से प्याज की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है वहीं गेहूं व सूरजमुखी की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। उधर घटा व आई तेज हवाओं को देख अनाज मंडी थानेसर व पिपली में किसानों में हड़कंप सा मच गया। अधिकतर किसानों ने अधिकारियों द्वारा गेहूं में नमी बताए जाने के बाद गेहूं सुखाई हुई थी और आसमान में छाए बादल व बारिश के आसार को देख किसान इस गेहूं को समेटने के लिए दौड़ पड़े।
मौसम का मिजाज बिगड़ने से किसानों की सांसें अटकीं
बाबैन में इस बार वर्षा के कारण व ओलावृटि के कारण किसानों को पहले ही फसलों में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वही आज ओलों के साथ भारी बरसात होने से किसानों की सांसे थम गई। अब अप्रैल माह शुरु हो चुका है और इस माह में गेहुं की फसल लगभग पक्क कर तैयार हो गई है, लेकिन अब यही वर्षा किसानों की पकी फसल के लिए नुक्सानदेह साबित हो सकती है। काबिलेगौर है कि बाबैन क्षेत्र में पिछले तीन-चार दिनों से सही मौसम चल रहा था, लेकिन अब अचानक मौसम के मिजाज बदल जाने के कारण क्षेत्र के किसानों में चिंता घर कर गई है और अपनी मेहनत द्वारा पैदा किऐ गऐ पीले सोने रुपी गेहुं की फसल को नुक्सान होने के डऱ से किसानों ंकी संासें थम सी गई हैं। इस क्षेत्र में पिछले सप्ताह से ही किसानों द्वारा गेहुं की फसल की कटाई का काम शुरु कर दिया गया था व मंडी मे गेहू की आवक तेज हो गई थी। क्षेत्र के प्रगतिशील किसान सतबीर रामपुरा,अनिल मरचेहडी, राजेंद्र बेरथला,महिंद्र सिंह महुआखेड़ी,विक्रम महुआखेड़ी, महिंद्र कलरलमाजरा आदि का कहना है कि गेहुं के एक एकड़ पर लगभग 12हजार करीब खर्चा आ जाता है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में ज्यादातर एक-दो एकड़ वाले किसान हैं और उनकी आर्थिक स्थिति इस जमीन पर निर्भर करती है। यदि वर्षा से उनकी गेहुं की फसल को नुक्सान होता है तो ऐसे किसानों की आर्थिक रूप से रीड़ टूट सकती है।
मंडी में शेड छोटा
अनाज मंडी बाबैन में प्रर्याप्त मात्र में शेड न होने के कारण किसानों को खराब मौसम में अपनी फसलों को संभालने में भारी परेशानी होती है और मंडी में आई उनकी फसल खराब हो जाती है। किसानों और व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि मंडी का और विस्तार करके मंडी में ज्यादा शैड बनवाए जाएं ताकि किसानों को खराब मौसम में अपनी फसलों को खराब होने से बचानें में कोई परेशानी न आए।
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मौसम का मिजाज बिगड़ने से किसानों की सांसें अटकीं
बाबैन में इस बार वर्षा के कारण व ओलावृटि के कारण किसानों को पहले ही फसलों में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वही आज ओलों के साथ भारी बरसात होने से किसानों की सांसे थम गई। अब अप्रैल माह शुरु हो चुका है और इस माह में गेहुं की फसल लगभग पक्क कर तैयार हो गई है, लेकिन अब यही वर्षा किसानों की पकी फसल के लिए नुक्सानदेह साबित हो सकती है। काबिलेगौर है कि बाबैन क्षेत्र में पिछले तीन-चार दिनों से सही मौसम चल रहा था, लेकिन अब अचानक मौसम के मिजाज बदल जाने के कारण क्षेत्र के किसानों में चिंता घर कर गई है और अपनी मेहनत द्वारा पैदा किऐ गऐ पीले सोने रुपी गेहुं की फसल को नुक्सान होने के डऱ से किसानों ंकी संासें थम सी गई हैं। इस क्षेत्र में पिछले सप्ताह से ही किसानों द्वारा गेहुं की फसल की कटाई का काम शुरु कर दिया गया था व मंडी मे गेहू की आवक तेज हो गई थी। क्षेत्र के प्रगतिशील किसान सतबीर रामपुरा,अनिल मरचेहडी, राजेंद्र बेरथला,महिंद्र सिंह महुआखेड़ी,विक्रम महुआखेड़ी, महिंद्र कलरलमाजरा आदि का कहना है कि गेहुं के एक एकड़ पर लगभग 12हजार करीब खर्चा आ जाता है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में ज्यादातर एक-दो एकड़ वाले किसान हैं और उनकी आर्थिक स्थिति इस जमीन पर निर्भर करती है। यदि वर्षा से उनकी गेहुं की फसल को नुक्सान होता है तो ऐसे किसानों की आर्थिक रूप से रीड़ टूट सकती है।
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मंडी में शेड छोटा
अनाज मंडी बाबैन में प्रर्याप्त मात्र में शेड न होने के कारण किसानों को खराब मौसम में अपनी फसलों को संभालने में भारी परेशानी होती है और मंडी में आई उनकी फसल खराब हो जाती है। किसानों और व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि मंडी का और विस्तार करके मंडी में ज्यादा शैड बनवाए जाएं ताकि किसानों को खराब मौसम में अपनी फसलों को खराब होने से बचानें में कोई परेशानी न आए।
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