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Kurukshetra News: माता-पिता और पूर्वजों को अर्घ्य अर्पित कर तीर्थ पूजन करेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पावन ब्रह्मसरोवर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 नवंबर को अपने माता-पिता और पूर्वजों को अर्घ्य अर्पित कर पवित्र तीर्थ पूजन करेंगे। हिंदू परंपरा के अनुसार अर्घ्य समर्पण को पितरों के प्रति श्रद्धा और आभार का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है। विशेष वेदिक विधि से होने वाले इस पूजन का संचालन मां कात्यायनी देवी मंदिर पुरुषोत्तम पुरा बाग के पीठाध्यक्ष पंडित बलराम गौतम की ओर से किया जाएगा।
पूजन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सांध्यकालीन आरती भी करेंगे। सायंकाल की आरती को दिव्य प्रकाश, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का स्वरूप माना जाता है। जल की लहरों पर दीपों की झिलमिलाहट और मंत्रोच्चारण के बीच होने वाली यह आरती एक अलौकिक वातावरण का सृजन करेगी। इसे भव्य और दिव्य बनाने के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। साज-सज्जा से लेकर हर पहलू पर काम किया जा रहा है।
यह पहला अवसर होगा जब देश के किसी प्रधानमंत्री की ओर से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान ब्रह्मसरोवर पर महाआरती की जाएगी जिससे यह दिन आध्यात्मिक महत्व का एक अनोखा स्मरण बन जाएगा। प्रधानमंत्री की उपस्थिति इस आयोजन की गरिमा और धार्मिक महत्व को और अधिक प्रखर बनाएगी।
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पंडित बलराम ने बताया कि इससे पहले राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, सांसद और मंत्री इस महोत्सव में शिरकत कर चुके हैं लेकिन पहली बार प्रधानमंत्री महोत्सव में तीर्थ पूजन और आरती करेंगे। वे तीर्थ पर 20 मिनट तक पूजन और आरती करेंगे। इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
2014 में बदला आरती स्थल, नई परंपरा हुई स्थापित
पंडित बलराम गौतम बताते हैं कि वर्ष 2014 से पहले आरती सर्वेश्वर मंदिर के पास वाले घाट पर होती थी। उस समय पराशक्ति साधक वेद पाठशाला और जयराम आश्रम के वेदपाठी आरती संपन्न करवाते थे। परंतु तीर्थराज की प्रसिद्धि और श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए नया भव्य आरती स्थल तैयार किया गया। वाराणसी की गंगा आरती की तर्ज पर भव्य रूप में यह परंपरा वर्ष 2014 से शुरू हुई जिसका उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किया था। आज यही स्थान अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का प्रमुख आकर्षण है।
अब तक देश-विदेश के ये नेता कर चुके ब्रह्मसरोवर की महाआरती
ब्रह्मसरोवर की महाआरती अब तक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नेताओं का आध्यात्मिक केंद्र रही है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल, मुख्यमंत्री नायब सैनी, कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष व लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कई राज्यों के राज्यपाल व मुख्यमंत्री और मॉरीशस के राष्ट्रपति भी इस आरती में शामिल हो चुके हैं। इतिहास में पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रह्मसरोवर पर तीर्थ पूजन और महाआरती में हिस्सा लेंगे। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू भी अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में वर्ष 2022 में शामिल हुई थीं, इस दौरान उन्होंने तीर्थ पूजन किया था। वर्ष 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी गीता महोत्सव में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने तीर्थ पूजन भी किया था।
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पूजन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सांध्यकालीन आरती भी करेंगे। सायंकाल की आरती को दिव्य प्रकाश, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का स्वरूप माना जाता है। जल की लहरों पर दीपों की झिलमिलाहट और मंत्रोच्चारण के बीच होने वाली यह आरती एक अलौकिक वातावरण का सृजन करेगी। इसे भव्य और दिव्य बनाने के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। साज-सज्जा से लेकर हर पहलू पर काम किया जा रहा है।
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यह पहला अवसर होगा जब देश के किसी प्रधानमंत्री की ओर से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान ब्रह्मसरोवर पर महाआरती की जाएगी जिससे यह दिन आध्यात्मिक महत्व का एक अनोखा स्मरण बन जाएगा। प्रधानमंत्री की उपस्थिति इस आयोजन की गरिमा और धार्मिक महत्व को और अधिक प्रखर बनाएगी।
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पंडित बलराम ने बताया कि इससे पहले राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, सांसद और मंत्री इस महोत्सव में शिरकत कर चुके हैं लेकिन पहली बार प्रधानमंत्री महोत्सव में तीर्थ पूजन और आरती करेंगे। वे तीर्थ पर 20 मिनट तक पूजन और आरती करेंगे। इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
2014 में बदला आरती स्थल, नई परंपरा हुई स्थापित
पंडित बलराम गौतम बताते हैं कि वर्ष 2014 से पहले आरती सर्वेश्वर मंदिर के पास वाले घाट पर होती थी। उस समय पराशक्ति साधक वेद पाठशाला और जयराम आश्रम के वेदपाठी आरती संपन्न करवाते थे। परंतु तीर्थराज की प्रसिद्धि और श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए नया भव्य आरती स्थल तैयार किया गया। वाराणसी की गंगा आरती की तर्ज पर भव्य रूप में यह परंपरा वर्ष 2014 से शुरू हुई जिसका उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किया था। आज यही स्थान अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का प्रमुख आकर्षण है।
अब तक देश-विदेश के ये नेता कर चुके ब्रह्मसरोवर की महाआरती
ब्रह्मसरोवर की महाआरती अब तक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नेताओं का आध्यात्मिक केंद्र रही है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल, मुख्यमंत्री नायब सैनी, कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष व लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कई राज्यों के राज्यपाल व मुख्यमंत्री और मॉरीशस के राष्ट्रपति भी इस आरती में शामिल हो चुके हैं। इतिहास में पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रह्मसरोवर पर तीर्थ पूजन और महाआरती में हिस्सा लेंगे। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू भी अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में वर्ष 2022 में शामिल हुई थीं, इस दौरान उन्होंने तीर्थ पूजन किया था। वर्ष 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी गीता महोत्सव में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने तीर्थ पूजन भी किया था।