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राष्ट्रपति ने युवाओं को दिया सफलता का मंत्र: बोलीं- आंधी, तूफान और बारिश में भी डटे रहने जितने मजबूत बनें
Sun, 01 Nov 2026 03:25 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
अमर उजाला नेटवर्क, कुरुक्षेत्र
अमर उजाला नेटवर्क, कुरुक्षेत्र
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Sun, 01 Nov 2026 03:25 PM IST
सार
कुरुक्षेत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को गुरुकुल कुरुक्षेत्र में छात्रों और युवाओं को सफलता का मंत्र दिया। महान स्वतंत्रता सेनानी स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती के बलिदान शताब्दी समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचीं राष्ट्रपति ने कहा कि जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। धैर्य, संयम, आत्मविश्वास और निरंतर परिश्रम ही व्यक्ति को हर चुनौती से पार पाने की शक्ति देते हैं।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कुरुक्षेत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को गुरुकुल कुरुक्षेत्र में छात्रों और युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती के बलिदान शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। राष्ट्रपति ने जीवन में सफलता के लिए धैर्य, आत्मविश्वास और निरंतर परिश्रम का महत्व बताया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि जीवन में कोई शॉर्टकट नहीं होता। लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और लगातार प्रयास से कोई भी मंजिल असंभव नहीं रहती। उन्होंने आत्ममंथन और आत्म सुधार को भी जरूरी बताया। राष्ट्रपति ने युवाओं को असफलताओं से निराश न होकर उनसे सीखने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास और स्वयं को बेहतर बनाने की ललक ही सफलता की ओर ले जाती है। राष्ट्रपति ने युवाओं को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहने का संदेश दिया। उन्होंने देश के विकास में प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। मुर्मू ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब हर वर्ग राष्ट्र निर्माण में योगदान देगा।
प्राकृतिक खेती और युवा शक्ति
राष्ट्रपति ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर कृषि करना समय की मांग है। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और टिकाऊ कृषि पद्धतियां भविष्य के लिए जरूरी हैं। मुर्मू ने स्पष्ट किया कि युवा शक्ति देश की महत्वपूर्ण पूंजी है। अनुशासन, आत्मविश्वास और परिश्रम से युवा राष्ट्र को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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चुनौतियों का सामना करने का आह्वान
राष्ट्रपति गुरुकुल के आचार्यों द्वारा किए गए मलखंभ करतबों को देखकर अभिभूत हुईं। उन्होंने कहा कि इससे भारत का भविष्य उज्ज्वल होने का यकीन होता है। कड़ी धूप में बैठे छात्रों से उन्होंने कहा कि यही परीक्षाएं जीवन को मजबूत बनाती हैं। उन्होंने युवाओं को आंधी, तूफान और बारिश में भी डटे रहने जितना मजबूत बनने का आह्वान किया। राष्ट्रपति ने कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, सत्य और सही मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए तथा हमेशा अपने मूल्यों पर आगे बढ़ना चाहिए।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि जीवन में कोई शॉर्टकट नहीं होता। लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और लगातार प्रयास से कोई भी मंजिल असंभव नहीं रहती। उन्होंने आत्ममंथन और आत्म सुधार को भी जरूरी बताया। राष्ट्रपति ने युवाओं को असफलताओं से निराश न होकर उनसे सीखने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास और स्वयं को बेहतर बनाने की ललक ही सफलता की ओर ले जाती है। राष्ट्रपति ने युवाओं को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहने का संदेश दिया। उन्होंने देश के विकास में प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। मुर्मू ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब हर वर्ग राष्ट्र निर्माण में योगदान देगा।
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प्राकृतिक खेती और युवा शक्ति
राष्ट्रपति ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर कृषि करना समय की मांग है। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और टिकाऊ कृषि पद्धतियां भविष्य के लिए जरूरी हैं। मुर्मू ने स्पष्ट किया कि युवा शक्ति देश की महत्वपूर्ण पूंजी है। अनुशासन, आत्मविश्वास और परिश्रम से युवा राष्ट्र को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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चुनौतियों का सामना करने का आह्वान
राष्ट्रपति गुरुकुल के आचार्यों द्वारा किए गए मलखंभ करतबों को देखकर अभिभूत हुईं। उन्होंने कहा कि इससे भारत का भविष्य उज्ज्वल होने का यकीन होता है। कड़ी धूप में बैठे छात्रों से उन्होंने कहा कि यही परीक्षाएं जीवन को मजबूत बनाती हैं। उन्होंने युवाओं को आंधी, तूफान और बारिश में भी डटे रहने जितना मजबूत बनने का आह्वान किया। राष्ट्रपति ने कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, सत्य और सही मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए तथा हमेशा अपने मूल्यों पर आगे बढ़ना चाहिए।