फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Police bid, had not the honor of deregulation, Sikhs met the poles instead of-service

पुलिस बोली, ढील की लाज नहीं रखी, सिखों ने कहा-सेवा के बदले मिले डंडे

Thu, 07 Aug 2014 12:31 AM IST
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र Updated Thu, 07 Aug 2014 12:31 AM IST
विज्ञापन
Police bid, had not the honor of deregulation, Sikhs met the poles instead of-service
कानूनी रूप से अस्तित्व में आई एचएसजीएमसी का विवाद एसजीपीसी के साथ पिछले करीब 14 वर्षों से चल रहा है। लेकिन हरियाणा की अलग कमेटी बनने का बिल पास होते ही एचएसजीएमसी नेता उत्साह में कई ऐसे कदम उठा चुके हैं।
विज्ञापन


जिससे उनकी संगठन शक्ति की मुट्ठी खुल गई। हालांकि झींडा और नलवी कुछ बातों से अच्छी तरह से वाकिफ थे। इसीलिए वे दो अगस्त को मोर्चा लगाने की बजाय, धैर्य के साथ संगत जुटाना चाहते थे।
विज्ञापन


जोश में जो हुआ, उसका परिणाम कुरुक्षेत्र में सामने आ गय। इससे एचएसजीएमसी में अंदरूनी घमासान शुरू हो चुका है। वहीं छठी पातशाही के पास से तंबू उखड़ने के बाद एसजीपीसी अमृतसर के नेताओं ने राहत की सांस ली है।
विज्ञापन
विज्ञापन


छठी पातशाही में अभी भी पूरा अमला मुस्तैद है। बुधवार को तलवारें, भाले, बर्छे लिए सिख सामने खड़े पुलिस बल के साथ जद्दोजहद करते हुए दिखे।

हालात इस कदर बिगड़े कि कई बेकसूरों का रक्त बहा। हालांकि इन हालात के लिए काफी हद तक पुलिस-प्रशासन जिम्मेदार रहा। स्टेट हाईवे पर पांच दिन से सिख मोर्चे पर डटे रहे।

कई दिनों से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। कारोबारियों को करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ा। लेकिन पुलिस प्रशासन सड़क से कब्जे हटाने की बजाय आंखें बंद किए बैठा रहा।

यहां तक की जिले के दो बडे़ अधिकारी एक बार भी मौके पर नहीं पहुंचे। हद तो तब हुई गई जब बुधवार को भी दोनों अधिकारी तब पहुंचे जब कई पुलिस कर्मी, पत्रकार और आंदोलनकारी लहूलुहान हो गए।

हलांकि सड़क रोकने के एक मामले में पांच अगस्त 2014 को नारनौंद के एक स्कूल में शिक्षकों की कमी के चलते सड़क पर प्रदर्शन करने वाले स्कूली छात्रों को हटाने के लिए पुलिस ने इस कदर लाठियां भांजी थी जैसे वे क्रिमिनल हों।

हालांकि एचएसजीएमसी के शीर्ष नेता शांतिपूर्वक मोर्चा लगाने के पक्ष में थे लेकिन फिर भी हालात बिगड़ गए।
सिखों की संख्या अधिक लेकिन हजारों में नहीं

वास्तविकता ये है कि पिछले पांच दिन में एचएसजीएमसी की मुट्ठी लगातार खुलती जा रही थी। मौके पर संगत जुटने से नेताओं की बेचैनी बढ़ रही थी।

सोमवार को सीएम से मिलने के बाद देर रात को कुरुक्षेत्र पहुंचे एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में दावा किया था कि बुधवार को कुरुक्षेत्र में इतनी संगत जुटेगी कि एसजीपीसी खुद सेवा सौंप देगी।

बुधवार को भारी संख्या में हरियाणा के सिख तो जुटे लेकिन संख्या हजारों तक नहीं पहुंची। यहां से मोर्चा हटाने की उनकी अपील खारिज हो गई। असर ये हुआ कि मरते क्या न करते। कुछ जुनूनी समर्थक आगे बढ़े और हालात उपद्रव में तब्दील हो गए।

नहीं रखी पुलिस-प्रशासन की ढील की लाज
पिछले पांच दिनों से ड्यूटी पर तैनात एक अधिकारी ने मोर्चे पर बैठे एचएसजीएमसी समर्थकों पर गिला व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले पांच दिन से पुलिस-प्रशासन ने इन्हें जितनी ढील दी थी।

उसकी भी इन्होंने लाज नहीं रखी। एक दीवार की ईंट दिखाते हुए अधिकारी ने बताया कि तीन फुट नीचे तक इस कच्ची दीवार से ईंटे उखाड़कर पुलिस पर फेंकी गई। मजबूरन पुलिस को भी लाठीचार्ज करना पड़ा।

मंगल को की सेवा बुध को पड़े डंडे
वहीं एचएसजीएमसी के कुछ समर्थकों ने बताया कि हमने तो पुलिस बल से गुरुद्वारे की सेवा संभालने की गुहार लगाई थी। यह हमारा हक है जहां पंजाब की फोर्स तैनात है।


उन्हें पुलिस नहीं खदेड़ रही है। हमने मंगलवार को पुलिस बल की लंगर के दौरान सेवा की। लेकिन बुधवार को इसका सिला पुलिस ने डंडे मारकर दिया है। पुलिस को सिखों पर लाठीचार्ज नहीं करना चाहिए था
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed