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Kurukshetra News: पिछले सीजन का चावल वापस लिया न हुआ लंबित समस्याओं का समाधान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2026 01:53 AM IST
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Recovering rice from the previous season and resolving pending issues
पिहोवा। धान खरीद को लेकर इस बार किसानों व सरकार को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। सरकार न पिछले साल का चावल वापस ले पाई है और न ही राइस मिलर्स की लंबित अन्य मांगों का समाधान हो पाया है, ऐसे में मिलर्स धान खरीद से इन्कार कर चुके हैं।
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मिलर्स स्पष्ट कर चुके हैं कि पिछले सीजन का चावल वापस नहीं लिया गया और मिलर्स की लंबित समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो मिलर खरीफ सीजन में धान की खरीद में हिस्सा नहीं लेंगे। इस बार व्यापारी चाहते हैं कि सरकार खुद खरीद करके माल उठाए और मिलर्स को थोड़ा-थोड़ा करके आवंटित करे। हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन के उपप्रधान जनक राज सिंगला का कहना है कि पिछले सीजन का चावल अभी तक एफसीआई की ओर से वापस नहीं लिया गया है इस कारण मिलर्स के पास नया धान रखने और उसकी मिलिंग शुरू करने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं बची है। सिंगला ने कहा कि वे किसानों के साथ हैं।
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किसान 17 प्रतिशत से कम नमी की धान लेकर आएं ताकि व्यापारी व किसान दोनों को परेशानी न हो। उन्होंने मिलिंग पॉलिसी-2026 में सिक्योरिटी को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि जब खरीद एजेंसियां स्वयं धान की खरीद और उसके भंडारण की जिम्मेदारी संभालेंगी, तो इतनी बड़ी सुरक्षा राशि निर्धारित करने का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए।
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तय मानकों पर भी उठाए जा रहे सवाल
मिलर्स ने सरकार से सुरक्षा राशि कम करने तथा मिलर्स के हित में मिलिंग पॉलिसी में आवश्यक संशोधन करने की मांग की है। जनक राज सिंगला ने धान की गुणवत्ता के निर्धारित मानकों को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि धान में नमी, ब्रोकन, डेमेज और डिसकलर्ड धान से संबंधित मानकों को व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। विशेष रूप से हाइब्रिड धान में मिलिंग के दौरान ब्रोकन अधिक होने की समस्या को ध्यान में रखते हुए खरीद एजेंसियों को पहले से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा बोनस दिए जाने की घोषणा के बावजूद पिछले करीब दो वर्षों से बोनस का भुगतान लंबित है। इसके अलावा धान की लिफ्टिंग, भुगतान और अन्य प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में भी मिलर्स को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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