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जीवन के संघर्षों से जन्म लेती है कविता : प्रेम तिवारी
Tue, 21 Jul 2026 06:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 21 Jul 2026 06:04 AM IST
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कुरुक्षेत्र। राज्य स्तरीय कविता कार्यशाला में भाग लेते हुए अतिथि एवं मुख्या वक्ता। स्वयं
कुरुक्षेत्र। जनवादी लेखक संघ हरियाणा की ओर से डॉ. ओमप्रकाश ग्रेवाल अध्ययन संस्थान में राज्य स्तरीय कविता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 50 कवियों ने भाग लिया। पहले सत्र में सभी रचनाकारों ने अपनी कविताओं का पाठ किया, जबकि दूसरे सत्र में आमंत्रित विद्वानों ने उन पर रचनात्मक टिप्पणियां प्रस्तुत कीं।
मुख्य वक्ता केंद्रीय जनवादी लेखक संघ के संयुक्त महासचिव एवं आलोचक प्रेम तिवारी ने कहा कि कविता जीवन के संघर्षों से जन्म लेती है। जनवादी कविता समाज के वंचित, शोषित और पीड़ित वर्ग की पीड़ा को अभिव्यक्ति देती है तथा गैर-बराबरी, शोषण, जातीय उत्पीड़न, सांप्रदायिकता, दमन, तानाशाही और अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाती है। उन्होंने हरियाणवी बोली में लिखी जा रही कविता और गजल को हरियाणा की साहित्यिक पहचान बताते हुए अपनी मातृभाषा में लेखन को प्रोत्साहित किया।
कवि, समीक्षक एवं पत्रकार राधेश्याम तिवारी ने कविता में अभिधा, लक्षणा और व्यंजना के महत्व पर प्रकाश डाला। कवि एवं पत्रकार श्याम सुशील ने कहा कि कविता हमारे आसपास के जीवन से ही निकलती है और उसी की रंगत के साथ उसे अभिव्यक्ति मिलनी चाहिए। कथाकार गजेंद्र रावत ने कहा कि कविता केवल भावुकता तक सीमित न रहकर यथार्थ और सत्य की खोज से जुड़ी होनी चाहिए। उन्होंने समकालीन कविता को उपदेशात्मक के बजाय यथार्थवादी और सत्यान्वेषी बताया।
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समापन सत्र में प्रतिभागियों ने भी अपने विचार रखे। कई रचनाकारों ने भेजी गई कविताओं पर चर्चा नहीं होने का मुद्दा उठाया और कविता के कला पक्ष पर भी विस्तार से चर्चा करने की आवश्यकता जताई। कार्यशाला की अध्यक्षता जलेस के राज्य अध्यक्ष जयपाल ने की, जबकि संचालन राज्य सचिव सरदानंद राजली ने किया। कार्यशाला में कुरुक्षेत्र, अंबाला, करनाल, कैथल, हिसार, जींद, फतेहाबाद और रोहतक के रचनाकारों ने भाग लिया।
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मुख्य वक्ता केंद्रीय जनवादी लेखक संघ के संयुक्त महासचिव एवं आलोचक प्रेम तिवारी ने कहा कि कविता जीवन के संघर्षों से जन्म लेती है। जनवादी कविता समाज के वंचित, शोषित और पीड़ित वर्ग की पीड़ा को अभिव्यक्ति देती है तथा गैर-बराबरी, शोषण, जातीय उत्पीड़न, सांप्रदायिकता, दमन, तानाशाही और अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाती है। उन्होंने हरियाणवी बोली में लिखी जा रही कविता और गजल को हरियाणा की साहित्यिक पहचान बताते हुए अपनी मातृभाषा में लेखन को प्रोत्साहित किया।
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कवि, समीक्षक एवं पत्रकार राधेश्याम तिवारी ने कविता में अभिधा, लक्षणा और व्यंजना के महत्व पर प्रकाश डाला। कवि एवं पत्रकार श्याम सुशील ने कहा कि कविता हमारे आसपास के जीवन से ही निकलती है और उसी की रंगत के साथ उसे अभिव्यक्ति मिलनी चाहिए। कथाकार गजेंद्र रावत ने कहा कि कविता केवल भावुकता तक सीमित न रहकर यथार्थ और सत्य की खोज से जुड़ी होनी चाहिए। उन्होंने समकालीन कविता को उपदेशात्मक के बजाय यथार्थवादी और सत्यान्वेषी बताया।
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समापन सत्र में प्रतिभागियों ने भी अपने विचार रखे। कई रचनाकारों ने भेजी गई कविताओं पर चर्चा नहीं होने का मुद्दा उठाया और कविता के कला पक्ष पर भी विस्तार से चर्चा करने की आवश्यकता जताई। कार्यशाला की अध्यक्षता जलेस के राज्य अध्यक्ष जयपाल ने की, जबकि संचालन राज्य सचिव सरदानंद राजली ने किया। कार्यशाला में कुरुक्षेत्र, अंबाला, करनाल, कैथल, हिसार, जींद, फतेहाबाद और रोहतक के रचनाकारों ने भाग लिया।