{"_id":"5f61109f8ebc3e6dfb4170e9","slug":"pitar-paksh-saraswti-thirth-closed-two-days-kurukshetra-news-knl443357124","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज और कल तीर्थ पर कोई भी धार्मिक अनुष्ठान करने पर पाबंदी, उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आज और कल तीर्थ पर कोई भी धार्मिक अनुष्ठान करने पर पाबंदी, उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई
विज्ञापन
पितृ पक्ष की चौदस और अमावस पर भी पित्तरों को प्यासा रहना होगा। सरस्वती तीर्थ पर पितृ तृप्ति के लिए होने वाले पिंडदान, गति कर्म और तर्पण पर प्रशासन की ओर पाबंदी लगा दी गई है। कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने दो दिन 16 और 17 सितंबर के लिए यह फैसला लिया है। मान्यता है कि पितृ पक्ष में पित्तर पितृलोक से आकर धरती पर विचरण करते हैं तथा अपने कुल और परिवार से अपने तृप्ति की कामना करते हैं। पितृ पक्ष के दौरान समस्त जन अपने पित्तरों को प्रसन्न और उनकी तृप्ति के लिए तीर्थ पर तिल, जल, अन्न और धन का दान करते हैं तथा उनकी मुक्ति के लिए पिंडदान, गति कर्म, तर्पण और श्राद्ध करते है। सभी तीर्थों में पिहोवा के सरस्वती तीर्थ का विशेष महत्व है।
पिहोवा के सरस्वती तीर्थ को अर्द्ध गयाजी की संज्ञा दी गई है, लेकिन इस बार सरस्वती तीर्थ चौदस और अमावस पर धार्मिक अनुष्ठान पर पाबंदी लगी हुई है। रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु अपने पितरों की अक्षय मुक्ति के लिए सरस्वती तीर्थ पर पिंडदान, गति और तर्पण के लिए विश्व के कोने-कोने से पहुंचते हैं, लेकिन पिछले छह महीने से कोरोना के संक्रमण को देखते हुए प्रशासन की ओर से हर अमावस पर सरस्वती तीर्थ पर धार्मिक अनुष्ठान करने पर पाबंदी जारी है। चैत्र चौदस मेले के रद्द होने के तुरंत बाद से करीब चार महीने तक तीर्थ पर पूजा पाठ करने की इजाजत नहीं थी, लेकिन तीर्थ पुरोहितों की मांग को देखते हुए प्रशासन ने तीर्थ पर पूजा पाठ करने की इजाजत दी थी, जिसमें अमावस पर पूजा पाठ पर पाबंदी जारी रही। अब प्रशासन की ओर से पितृ पक्ष में भी चौदस और अमावस पर रोक जारी है। इसी को लेकर मंगलवार को एसडीएम सोनू राम ने कहा कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते असर को देखते हुए सरकार द्वारा जारी आदेशों के अनुसार आगामी 16 और 17 सितंबर को पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर आयोजित होने वाले अश्विन मास की चौदस व अमावस्या पर कर्मकांड और पिंडदान आदि कार्यों पर पूर्णत: प्रतिबंध रहेगा। पंजाब और दिल्ली के बार्डर के पास विशेष नाके लगाएं गए है ताकि अगर कोई श्रद्धालु इन दोनों क्षेत्रों से पिहोवा की तरफ आते है तो उन्हेें वहीं से वापस भेज दिया जाएगा, यही नहीं जो व्यक्ति ड्रेन के द्वारा आने की कोशिश करेंगे तो उन्हें भी वापस भेज दिया जाएगा। चौदस व अमावस का महत्व है और करीब 30 हजार श्रद्धालुओं के आने की संभावना रहती है, जिस कारण कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी होने की संभावना है इसलिए दोनों दिनों पर सरस्वती तीर्थ पर कोई कार्य नहीं होंगे।
इसके लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किए जाएंगे और जिलाधीश से धारा 144 लगाने का अनुरोध किया गया है। एसडीएम ने कहा कि दोनों दिन पिहोवा के सभी बाजार पूर्णत: बंद रहेंगे, किसी भी प्रकार का पूजा पाठ नहीं होगा। उन्होंने पुरोहितों, व्यापारियों तथा समाजसेवी संस्थाओं से अपील की कि जिला प्रशासन का पूर्ण सहयोग करें। एसडीएम ने यह भी कहा कि अगर कोई इन नियमों का उल्लंघन करेगा तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। एसडीएम ने कहा कि संबंधित क्षेेत्र में सभी नाके बुधवार को तड़के तीन बजे से कार्य करने लग जाएंगे तथा इन नाकों पर पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सभी बाजार बंद रहेंगे लेकिन दवाइयों की दुकानें नियमानुसार खुलेंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
पिहोवा के सरस्वती तीर्थ को अर्द्ध गयाजी की संज्ञा दी गई है, लेकिन इस बार सरस्वती तीर्थ चौदस और अमावस पर धार्मिक अनुष्ठान पर पाबंदी लगी हुई है। रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु अपने पितरों की अक्षय मुक्ति के लिए सरस्वती तीर्थ पर पिंडदान, गति और तर्पण के लिए विश्व के कोने-कोने से पहुंचते हैं, लेकिन पिछले छह महीने से कोरोना के संक्रमण को देखते हुए प्रशासन की ओर से हर अमावस पर सरस्वती तीर्थ पर धार्मिक अनुष्ठान करने पर पाबंदी जारी है। चैत्र चौदस मेले के रद्द होने के तुरंत बाद से करीब चार महीने तक तीर्थ पर पूजा पाठ करने की इजाजत नहीं थी, लेकिन तीर्थ पुरोहितों की मांग को देखते हुए प्रशासन ने तीर्थ पर पूजा पाठ करने की इजाजत दी थी, जिसमें अमावस पर पूजा पाठ पर पाबंदी जारी रही। अब प्रशासन की ओर से पितृ पक्ष में भी चौदस और अमावस पर रोक जारी है। इसी को लेकर मंगलवार को एसडीएम सोनू राम ने कहा कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते असर को देखते हुए सरकार द्वारा जारी आदेशों के अनुसार आगामी 16 और 17 सितंबर को पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर आयोजित होने वाले अश्विन मास की चौदस व अमावस्या पर कर्मकांड और पिंडदान आदि कार्यों पर पूर्णत: प्रतिबंध रहेगा। पंजाब और दिल्ली के बार्डर के पास विशेष नाके लगाएं गए है ताकि अगर कोई श्रद्धालु इन दोनों क्षेत्रों से पिहोवा की तरफ आते है तो उन्हेें वहीं से वापस भेज दिया जाएगा, यही नहीं जो व्यक्ति ड्रेन के द्वारा आने की कोशिश करेंगे तो उन्हें भी वापस भेज दिया जाएगा। चौदस व अमावस का महत्व है और करीब 30 हजार श्रद्धालुओं के आने की संभावना रहती है, जिस कारण कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी होने की संभावना है इसलिए दोनों दिनों पर सरस्वती तीर्थ पर कोई कार्य नहीं होंगे।
विज्ञापन
इसके लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किए जाएंगे और जिलाधीश से धारा 144 लगाने का अनुरोध किया गया है। एसडीएम ने कहा कि दोनों दिन पिहोवा के सभी बाजार पूर्णत: बंद रहेंगे, किसी भी प्रकार का पूजा पाठ नहीं होगा। उन्होंने पुरोहितों, व्यापारियों तथा समाजसेवी संस्थाओं से अपील की कि जिला प्रशासन का पूर्ण सहयोग करें। एसडीएम ने यह भी कहा कि अगर कोई इन नियमों का उल्लंघन करेगा तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। एसडीएम ने कहा कि संबंधित क्षेेत्र में सभी नाके बुधवार को तड़के तीन बजे से कार्य करने लग जाएंगे तथा इन नाकों पर पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सभी बाजार बंद रहेंगे लेकिन दवाइयों की दुकानें नियमानुसार खुलेंगी।
विज्ञापन