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धर्म करने के बाद भी दुखी हो सकते हैं लोग : उपेंद्र मुनि

Tue, 28 Oct 2025 02:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Tue, 28 Oct 2025 02:42 AM IST
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People can be unhappy even after practicing religion: Upendra Muni
समालखा। समालखा नई जैन स्थानक में उपेन्द्र मुनि ने बताया की धर्म करने के बाद भी लोग दुखी हो सकते हैं। इसके पांच मुख्य कारण हैं आंतरिक शुद्धि का अभाव, यदि मन में दिखावा या द्वेष है, तो पूजा-पाठ का कोई लाभ नहीं होता।दिखावा और दिखावटी धर्म अगर धर्म का पालन केवल दिखावे के लिए किया जा रहा है, तो उससे आंतरिक शांति नहीं मिलती है। उन्होंने कहा कि अपेक्षाओं का दबाव दूसरा कारण है। समाज, परिवार या खुद से अवास्तविक अपेक्षाएं रखने से तनाव और दुख उत्पन्न होता है। असमान कर्म-फल की धारणा, कभी-कभी यह मानना गलत होता है कि अच्छे कर्मों का परिणाम तुरंत और हमेशा सुखद होगा। कुछ धर्मों में यह धारणा है कि दुःख हमें हमारे पापों से अवगत कराने के लिए भी होता है। गलत कर्म या सोच, यदि व्यक्ति बुरे कर्म करता है या उसकी सोच नकारात्मक है, तो वह दुखी होगा, भले ही वह धार्मिक अनुष्ठान करता हो। गलत कर्म या सोच, यदि व्यक्ति बुरे कर्म करता है या उसकी सोच नकारात्मक है, तो वह दुखी होगा, भले ही वह धार्मिक अनुष्ठान करता हो।
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