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किसान आंदोलन ने सवाल और चुनौतियां पैदा कीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। डॉ. ओम प्रकाश ग्रेवाल अध्ययन संस्थान ने रविवार को ‘किसानी आंदोलन और सामाजिक सरोकार’ विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान कराया गया। मुख्य वक्ता पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. बलविंद्र सिंह टिवाणा ने कृषि संकट और किसान आंदोलन के विविध पक्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आंदोलन ने भविष्य के लिए बहुत से सवाल और चुनौतियां पैदा की हैं।
डॉ. टिवाणा ने कहा कि महिलाओं की शानदार भागीदारी, पंजाब और हरियाणा के मजबूत रिश्ते, लोगों की कारपोरेट के प्रति जागरूकता, धर्मनिरपेक्षता और शांतिपूर्ण आंदोलन के प्रति विश्वास इस आंदोलन की उपलब्धियां हैं। किसान और खेतिहर मजदूर, जातिवाद तथा गांव और शहर के अंतर्विरोधों को हल करने की दिशा में किसान संगठनों को आगे बढ़ना होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. टीआर कुंडू ने कहा कि दिल्ली के किसान आंदोलन ने भारत में लोकतंत्र को मजबूत बनाने का काम किया है। यह आंदोलन वास्तव में कारपोरेट सेक्टर के खिलाफ था। वर्ष 1980 के बाद उदारीकरण की नीतियों ने आर्थिक असमानता को बढ़ा दिया है, लेकिन इससे सामाजिक जीवन की गुणवत्ता हुई है, क्योंकि नैतिकता और आर्थिक असमानता दोनों साथ साथ नहीं चल सकती। कहा कि नैतिकता के बिना समाज समाज नहीं झुंड बन जाता है।
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कार्यक्रम का संचालन प्रो. महावीर जागलान ने किया। इस मौके पर विकास साल्याण, अशोक भाटिया, डॉ. सुरेंद्र कुमार, वीबी अबरोल, डॉ. रणबीर दहिया, डॉ. संजीव ग्रेवाल, प्रमोद गौरी, धर्म सिंह, डीपी ढुल, अंजलि पूनिया, प्रो. राजेश्वरी, नरेंद्र कुमार, डॉ. आरके यादव, प्रो. सुनील कुमार सहित शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं बुद्धिजीवी कार्यक्रम में जुड़े रहे।
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कुरुक्षेत्र। डॉ. ओम प्रकाश ग्रेवाल अध्ययन संस्थान ने रविवार को ‘किसानी आंदोलन और सामाजिक सरोकार’ विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान कराया गया। मुख्य वक्ता पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. बलविंद्र सिंह टिवाणा ने कृषि संकट और किसान आंदोलन के विविध पक्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आंदोलन ने भविष्य के लिए बहुत से सवाल और चुनौतियां पैदा की हैं।
डॉ. टिवाणा ने कहा कि महिलाओं की शानदार भागीदारी, पंजाब और हरियाणा के मजबूत रिश्ते, लोगों की कारपोरेट के प्रति जागरूकता, धर्मनिरपेक्षता और शांतिपूर्ण आंदोलन के प्रति विश्वास इस आंदोलन की उपलब्धियां हैं। किसान और खेतिहर मजदूर, जातिवाद तथा गांव और शहर के अंतर्विरोधों को हल करने की दिशा में किसान संगठनों को आगे बढ़ना होगा।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. टीआर कुंडू ने कहा कि दिल्ली के किसान आंदोलन ने भारत में लोकतंत्र को मजबूत बनाने का काम किया है। यह आंदोलन वास्तव में कारपोरेट सेक्टर के खिलाफ था। वर्ष 1980 के बाद उदारीकरण की नीतियों ने आर्थिक असमानता को बढ़ा दिया है, लेकिन इससे सामाजिक जीवन की गुणवत्ता हुई है, क्योंकि नैतिकता और आर्थिक असमानता दोनों साथ साथ नहीं चल सकती। कहा कि नैतिकता के बिना समाज समाज नहीं झुंड बन जाता है।
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कार्यक्रम का संचालन प्रो. महावीर जागलान ने किया। इस मौके पर विकास साल्याण, अशोक भाटिया, डॉ. सुरेंद्र कुमार, वीबी अबरोल, डॉ. रणबीर दहिया, डॉ. संजीव ग्रेवाल, प्रमोद गौरी, धर्म सिंह, डीपी ढुल, अंजलि पूनिया, प्रो. राजेश्वरी, नरेंद्र कुमार, डॉ. आरके यादव, प्रो. सुनील कुमार सहित शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं बुद्धिजीवी कार्यक्रम में जुड़े रहे।