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धूलगढ़ की पाठशाला ने निजी स्कूलों को छोड़ा पीछे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 18 Jul 2022 01:06 AM IST
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Pathshala of Dhulgarh left behind private schools
शिक्षक विद्यार्थियों का भविष्य संवारते हैं, लेकिन विद्यार्थियों के साथ-साथ कोई सरकारी स्कूलों को ही संवार दे ऐसे शिक्षक बहुत कम हैं। पवन मित्तल जिले के ऐसे ही शिक्षक हैं जो जिस स्कूल में गए वहां की काया ही बदल डाली। चार स्कूलों में अपनी सेवाएं दे कर उन्होंने इन स्कूलों की पहचान प्रदेश स्तर तक करा दी। गांव सारसा के स्कूल को तो वे राष्ट्रीय स्तर तक ले गए। पवन मित्तल की बदौलत इस स्कूल को प्रधानमंत्री स्कूल स्वच्छता अभियान में राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। अब उनकी शिक्षिका पत्नी भी उनके कार्य में सहयोग दे रही हैं और ग्रामीण स्कूलों की बेटियों को राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा दिलवा चुकी हैं।
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राजकीय प्राथमिक पाठशाला धूलगढ़ गुलडेहरा के मुख्य शिक्षक पवन मित्तल व उनकी शिक्षिका पत्नी रेणुका मित्तल की लगन ही है कि आज गांव का स्कूल निजी स्कूलों को सुंदरता और शिक्षा में टक्कर दे रहा है। दोनों की मेहनत से ही स्कूल ने खंड स्तर व फिर जिला स्तर पर मुख्यमंत्री स्कूल सुंदरीकरण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया। पवन मित्तल बताते हैं कि उन्होंने धूलगढ़ गुलडेहरा स्कूल में 22 अगस्त 2016 को ज्वाइन किया था। उसका प्रथम ध्येय स्कूल में अच्छा वातावरण तैयार करना था। इसके लिए उन्होंने स्कूल की दोनों पार्कों को व्यवस्थित कराया। आज दोनों पार्कों की सुंदरता देखते ही बनती है। इसी की बदौलत स्कूल को पुरस्कार मिला। पुरस्कार में मिली डेढ़ लाख रुपये की राशि से 12 कमरों की स्कूल बिल्डिंग को बेहतर रूप दिया गया। कक्षाओं व कॉरिडोर में मेटिंग कराई गई। प्रत्येक कक्षा में शिक्षक के बैठने के लिए बेहतर कुर्सी व मेज का प्रबंध कराया।
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स्कूल जितना सुंदर है यहां की शिक्षा भी इतनी ही बेहतर है। पहले जहां स्कूल में गांव के ही बच्चे बहुत कम आया करते थे, लेकिन जब से पवन मित्तल ने स्कूल की काया पलटी तब से स्कूल में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इतना ही नहीं आसपास के पांच गांव से बच्चे भी घर से 10 से 15 किमी दूर इसी स्कूल में पढ़ने के लिए आते हैं। लॉकडाउन में पवन मित्तल ने इस सभी विद्यार्थियों को घर-घर जाकर भी पढ़ाया था।
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पवन मित्तल ने बच्चों की सुविधा के लिए स्कूल में वाईफाई लगवाया और सभी कक्षाओं को स्मार्ट बनवा दिया। इतना ही नहीं कक्षाओं में डिजिटल बोर्ड भी लगवाए। पवन मित्तल ने बताया कि कुछ अभिभावक सरकारी स्कूल में बच्चों को वर्दी की वजह से नहीं भेजते थे तो उन्होंने शिक्षा विभाग से अनुमति लेकर स्कूल में बच्चों की वर्दी ही बदल दी। अब कोई देखकर पहचान ही नहीं पाता कि यह बच्चा निजी स्कूल का है या सरकारी। इतना ही नहीं स्कूल की बिल्डिंग को देखकर कोई कह ही नहीं सकता कि ये सरकारी स्कूल है। स्कूल की रंग बिरंगी बनाया गया है। इन पर कार्टून बनाए गए हैं और स्लोगन लिखे गए हैं।
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