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10 फीसदी अभिभावक ही पहुंचे स्कूलों में
ब्यूरो/अमर उजाला कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 23 Aug 2015 11:40 PM IST
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शिक्षा में सुधार को लेकर रविवार को शिक्षा विभाग के आदेशों पर गांवों में सरकारी स्कूलों में अभिभावकों को आमंत्रित किया गया था लेकिन पहली बैठक में उनकी उपस्थिति कम रही।
हालांकि कुछ अभिभावकों ने शिक्षा में सुधार के लिए सुझाव भी दिए। जिला में कुल 797 स्कूलों में पढ़ने वाले 65 हजार से अधिक बच्चों के अभिभावकों में से महज 10-12 फीसदी अभिभावक ही स्कूलों में पहुंचे, जबकि कई स्कूलों में अध्यापक भी नहीं पहुंचे।
इसके पीछे शिक्षा विभाग अभिभावकों में जागरूकता न होने की कमी को मान रहा है। हालांकि उपजिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि यह पहली बैठक थी और अभिभावकों में जागरूकता की भी खासी कमी रही। अगली बैठक में यह संख्या काफी बढ़ने की उम्मीद है।
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बता दें कि जिले में पहली से आठवीं कक्षा तक के 683 और 12वीं कक्षा तक के 114 स्कूल हैं। इनमें करीब 65 हजार 391 विद्यार्थी रजिस्टर्ड हैं। रविवार को अध्यापक व अभिभावकों के बीच नई शिक्षा निति के लिए सुझाव मांगे गए। बैठक में शिक्षा विभाग की ओर से प्रश्नों के जवाब पूछे गए।
जिनमें अभिभावकों ने अपने सुझाव भी रखे। ज्योतिसर मिडिल स्कूल के सीनियर अध्यापक अलकेश मोदगिल ने बताया कि यह बैठक कारगर साबित हुई। उनके अनुसार अध्यापकों व अभिभावकों को बच्चों की समस्या से रूबरू होने का मौका मिला।
अध्यापकों ने परिजनों से विचार विमर्श किया कि अभिभावकों का कर्तव्य है कि वे स्कूल से घर आएं अपने बच्चे का होमवर्क जरूर चेक करें। छात्र होमवर्क कब पूरा कर रहा है। अपने परिजनों के सामने वह स्कूल काम करने से कतराता तो नहीं है।
स्कूल का जायजा लें अभिभावक
वहीं, अधिकतर अभिभावकों ने कहा कि वे पढ़े-लिखे नहीं है। इसके कारण उन्हें अध्यापकों द्वारा दिया गया होमवर्क समझ में नहीं आता।
अभिभावकों को चाहिए की वे स्कूल में आकर चेक करें कि अध्यापक स्कूल में आ भी रहा है या नहीं। वह बीमार है, कोई लापरवाही कर रहा है, या फिर कुछ और बात है। इन सब बातों को अभिभावक अपने बच्चों से भी पूछ सकते है। इतना ही नहीं अगर अभिभावक को स्कूल में आने में दिक्कत है तो सरपंच, पंच आदि से भी स्कूल की स्थिति का जायजा लिया जा सकता है।
ये रहे अध्यापकों के सुझाव
आदर्श राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल डॉ. बलवंत सिंह ने कहा कि सरकार का कदम सराहनीय है। पहली ही बैठक में अनेक सुझाव मिले जिसका फायदा आगामी परीक्षाओं में देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि उनके स्कूल में करीब 1150 बच्चे हैं, लेकिन स्कूल में पहुंचे कुल 22 अभिभावको में से 15 ने कहा कि स्कूल द्वारा दिया जा रहा मिड डे मील बंद कर देना चाहिए, क्योंकि हमारे बच्चे खुश होकर खाते नहीं है। वहीं बाकी बचे परिजनों ने मिड डे मील देते रहने को कहा। वहीं प्रिंसिपल ने बताया कि हमारे द्वारा एसएमएस स्कूल मैनेजमेंट कमेटी और पेरेंटस टीचर मीटिंग का शेड्यूल हर माह के अंतिम शनिवार को करने का निर्णय लिया गया है।
1 अभिभावक प्रतिदिन बच्चों का होमवर्क चेक करें
2 होमवर्क में क्या दिया वह भी जांच करें
3 स्कूल में क्या हुआ उसको प्रतिदिन जानें
5 स्कूल में अध्यापक आएं या नहीं
6 अध्यापक न आने का कारण जाने
7 अध्यापक की लापरवाही है या कुछ अन्य कारण वह भी जानें
8 सरपंच, पंच व अन्य मैनेजमेंट कमेटी से भी स्कूल संबंधी बातें कर सकते है
9 बालिका मंच पर भी फोकस करें
10 माह में एक बार स्कूल अवश्य आएं
11 बच्चे से जाने स्कूल के बारे में जानकारी लें
12 समय पर बच्चे को स्कूल भेजें
13 बच्चों को स्कूली काम करने के लिए प्रोत्साहित करें
14 गांव के पढे-लिखे नौजवान छात्र व छात्राओं से बात कर सकते हैं
15 घर पर भी बच्चे को पढ़ा सकते हैं
अभिभावकों के सुझाव
1 बोर्ड की परीक्षा वाली कक्षा पर अतिरिक्त समय दें
2 बच्चों को प्रयोगात्मक कार्य करने को दें
3 बेहतर उदाहरण देकर बात को समझाएं
4 अच्छे कार्य करने पर प्रोत्साहन दें
5 स्कूली कार्यक्रमों में बच्चों की अधिकता रखें
6 बच्चों की सहपाठी से बात कर विद्यार्थी की कमजोरी जानें
7 पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थी पर ज्यादा फोकस करें
8 स्कूल का कार्य न करवाएं
9 विभिन्न मंडल का निर्माण करें
10 प्रत्येक माह अध्यापक घर-घर जाकर छात्रों के परिजनों को छात्र संबंधी सूचना दे
11 बोली की बजाएं भाषा का प्रयोग करें
12 अंग्रेजी भाषा विषय के लिए अतिरिक्त स्कूल में समय दें
13 स्कूल के समय में परिवर्तन होना चाहिए
सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी एसपी सिंह का कहना है कि पांचवीं और आठवीं के बोर्ड को रद्द करना गलत है। इससे बच्चों और अध्यापकों में शिक्षा हासिल करने और शिक्षा देने के प्रति उदासीनता आ गई और शिक्षा के स्तर में गिरावट आ गई। इसलिए पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षा होनी अनिवार्य है। शिक्षा के सुधार के लिए सरकार की ओर से प्रयास काफी हो रहे हैं, लेकिन अभी शिक्षा स्तर को सुधारने के लिए प्रयास और भी तेज होने चाहिए।
डिप्टी डीईओ नमिता कौशिक ने बताया कि रविवार को पंचायत स्तर पर स्कूलों में अभिभावक और अध्यापकों की बैठक हुई है। जागरूकता के अभाव में अभिभावक काफी कम संख्या में पहुंचे हैं। यह बैठक काफी सार्थक रही है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट दो-तीन दिनों में पहुंच जाएगी।
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हालांकि कुछ अभिभावकों ने शिक्षा में सुधार के लिए सुझाव भी दिए। जिला में कुल 797 स्कूलों में पढ़ने वाले 65 हजार से अधिक बच्चों के अभिभावकों में से महज 10-12 फीसदी अभिभावक ही स्कूलों में पहुंचे, जबकि कई स्कूलों में अध्यापक भी नहीं पहुंचे।
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इसके पीछे शिक्षा विभाग अभिभावकों में जागरूकता न होने की कमी को मान रहा है। हालांकि उपजिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि यह पहली बैठक थी और अभिभावकों में जागरूकता की भी खासी कमी रही। अगली बैठक में यह संख्या काफी बढ़ने की उम्मीद है।
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बता दें कि जिले में पहली से आठवीं कक्षा तक के 683 और 12वीं कक्षा तक के 114 स्कूल हैं। इनमें करीब 65 हजार 391 विद्यार्थी रजिस्टर्ड हैं। रविवार को अध्यापक व अभिभावकों के बीच नई शिक्षा निति के लिए सुझाव मांगे गए। बैठक में शिक्षा विभाग की ओर से प्रश्नों के जवाब पूछे गए।
जिनमें अभिभावकों ने अपने सुझाव भी रखे। ज्योतिसर मिडिल स्कूल के सीनियर अध्यापक अलकेश मोदगिल ने बताया कि यह बैठक कारगर साबित हुई। उनके अनुसार अध्यापकों व अभिभावकों को बच्चों की समस्या से रूबरू होने का मौका मिला।
अध्यापकों ने परिजनों से विचार विमर्श किया कि अभिभावकों का कर्तव्य है कि वे स्कूल से घर आएं अपने बच्चे का होमवर्क जरूर चेक करें। छात्र होमवर्क कब पूरा कर रहा है। अपने परिजनों के सामने वह स्कूल काम करने से कतराता तो नहीं है।
स्कूल का जायजा लें अभिभावक
वहीं, अधिकतर अभिभावकों ने कहा कि वे पढ़े-लिखे नहीं है। इसके कारण उन्हें अध्यापकों द्वारा दिया गया होमवर्क समझ में नहीं आता।
अभिभावकों को चाहिए की वे स्कूल में आकर चेक करें कि अध्यापक स्कूल में आ भी रहा है या नहीं। वह बीमार है, कोई लापरवाही कर रहा है, या फिर कुछ और बात है। इन सब बातों को अभिभावक अपने बच्चों से भी पूछ सकते है। इतना ही नहीं अगर अभिभावक को स्कूल में आने में दिक्कत है तो सरपंच, पंच आदि से भी स्कूल की स्थिति का जायजा लिया जा सकता है।
ये रहे अध्यापकों के सुझाव
आदर्श राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल डॉ. बलवंत सिंह ने कहा कि सरकार का कदम सराहनीय है। पहली ही बैठक में अनेक सुझाव मिले जिसका फायदा आगामी परीक्षाओं में देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि उनके स्कूल में करीब 1150 बच्चे हैं, लेकिन स्कूल में पहुंचे कुल 22 अभिभावको में से 15 ने कहा कि स्कूल द्वारा दिया जा रहा मिड डे मील बंद कर देना चाहिए, क्योंकि हमारे बच्चे खुश होकर खाते नहीं है। वहीं बाकी बचे परिजनों ने मिड डे मील देते रहने को कहा। वहीं प्रिंसिपल ने बताया कि हमारे द्वारा एसएमएस स्कूल मैनेजमेंट कमेटी और पेरेंटस टीचर मीटिंग का शेड्यूल हर माह के अंतिम शनिवार को करने का निर्णय लिया गया है।
1 अभिभावक प्रतिदिन बच्चों का होमवर्क चेक करें
2 होमवर्क में क्या दिया वह भी जांच करें
3 स्कूल में क्या हुआ उसको प्रतिदिन जानें
5 स्कूल में अध्यापक आएं या नहीं
6 अध्यापक न आने का कारण जाने
7 अध्यापक की लापरवाही है या कुछ अन्य कारण वह भी जानें
8 सरपंच, पंच व अन्य मैनेजमेंट कमेटी से भी स्कूल संबंधी बातें कर सकते है
9 बालिका मंच पर भी फोकस करें
10 माह में एक बार स्कूल अवश्य आएं
11 बच्चे से जाने स्कूल के बारे में जानकारी लें
12 समय पर बच्चे को स्कूल भेजें
13 बच्चों को स्कूली काम करने के लिए प्रोत्साहित करें
14 गांव के पढे-लिखे नौजवान छात्र व छात्राओं से बात कर सकते हैं
15 घर पर भी बच्चे को पढ़ा सकते हैं
अभिभावकों के सुझाव
1 बोर्ड की परीक्षा वाली कक्षा पर अतिरिक्त समय दें
2 बच्चों को प्रयोगात्मक कार्य करने को दें
3 बेहतर उदाहरण देकर बात को समझाएं
4 अच्छे कार्य करने पर प्रोत्साहन दें
5 स्कूली कार्यक्रमों में बच्चों की अधिकता रखें
6 बच्चों की सहपाठी से बात कर विद्यार्थी की कमजोरी जानें
7 पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थी पर ज्यादा फोकस करें
8 स्कूल का कार्य न करवाएं
9 विभिन्न मंडल का निर्माण करें
10 प्रत्येक माह अध्यापक घर-घर जाकर छात्रों के परिजनों को छात्र संबंधी सूचना दे
11 बोली की बजाएं भाषा का प्रयोग करें
12 अंग्रेजी भाषा विषय के लिए अतिरिक्त स्कूल में समय दें
13 स्कूल के समय में परिवर्तन होना चाहिए
सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी एसपी सिंह का कहना है कि पांचवीं और आठवीं के बोर्ड को रद्द करना गलत है। इससे बच्चों और अध्यापकों में शिक्षा हासिल करने और शिक्षा देने के प्रति उदासीनता आ गई और शिक्षा के स्तर में गिरावट आ गई। इसलिए पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षा होनी अनिवार्य है। शिक्षा के सुधार के लिए सरकार की ओर से प्रयास काफी हो रहे हैं, लेकिन अभी शिक्षा स्तर को सुधारने के लिए प्रयास और भी तेज होने चाहिए।
डिप्टी डीईओ नमिता कौशिक ने बताया कि रविवार को पंचायत स्तर पर स्कूलों में अभिभावक और अध्यापकों की बैठक हुई है। जागरूकता के अभाव में अभिभावक काफी कम संख्या में पहुंचे हैं। यह बैठक काफी सार्थक रही है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट दो-तीन दिनों में पहुंच जाएगी।