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कोई हंसते-हंसते तो कोई निराश होकर पहुंचा स्कूल, पहले दिन 50 फीसदी रही हाजिरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Sep 2021 01:20 AM IST
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Parents are not showing interest in sending their children to school now
17 माह बाद बुधवार को चौथी और पांचवीं कक्षा के स्कूल खुले तो बच्चे स्कूल जाने से कतरा रहे थे। पहले दिन स्कूल पहुंचने वाले बच्चों की संख्या 50 फीसदी रही। सुबह साढ़े 8 बजे से ही बच्चे स्कूल पहुंचना शुरू हो गए थे। नौ बजे तक ज्यादातर बच्चे अपनी कक्षाओं में पहुंच गए थे। सबसे पहले शिक्षक ने बच्चों को कोरोना संक्रमण से बचाव के प्रति जागरूक किया और फिर बच्चों को उनके पाठ्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया। यही नहीं बच्चों का ध्यान पढ़ाई की तरफ आकर्षित करने में शिक्षकों ने बच्चों को मोटिवेट किया। इस दौरान शिक्षकों ने बच्चे से कोरोना काल में उनकी दिनचर्या के बारे में पूछा और भविष्य में अपनी पढ़ाई को बेहतरीन ढंग से सुचारु रखने के टिप्स भी बताए।
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पहले दिन स्कूलों में बच्चों की कम संख्या का कारण अभिभावकों की असहमति भी बताई जा रही है। स्कूल में भेजने के लिए अभिभावकों द्वारा सहमति पत्र दिया जाना अनिवार्य है, लेकिन ज्यादातर अभिभावक अभी बच्चों को स्कूल में भेजने के लिए रुचि नहीं दिखा रहे।
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हालांकि शिक्षक अभिभावकों को मोटिवेट करके विश्वास दिला रहे हैं कि स्कूल में सभी बच्चे सुरक्षित हैं। संक्रमण को जहन में रखते हुए स्कूलों में कोविड गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। स्कूल में प्रवेश देने से पूर्व बच्चों की थर्मल स्क्रीनिंग करने के साथ-साथ सैनिटाइज किया गया। इसके पश्चात सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बच्चों को अलग-अलग बेंच पर बैठाकर पढ़ाया गया। जिलेभर के स्कूलों में सभी शिक्षक व बच्चे कोरोना गाइडलाइन का पालन करते नजर आए।
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हालांकि स्कूल जाने से पहले जहां कुछ बच्चे उत्साहित नजर आए, तो कुछ निराश। कुछ बच्चे तो ऐसे थे जो रोते हुए स्कूल पहुंचे। राजकीय प्राथमिक पाठशाला थानेसर में चौथी व पांचवी कक्षा के मात्र 25 बच्चे ही स्कूल पहुंचे। इनमें चौथी कक्षा के 13 बच्चे और पांचवीं कक्षा के 12 बच्चे शामिल हैं। वहीं हथीरा स्कूल में दोनों कक्षाओं के 74 में से 37, बीड पिपली स्कूल में 41 में से 23 और रामगढ़ स्कूल में 25 में से 14 बच्चे स्कूल पहुंचे।
ऑनलाइन पढ़ाई में होती थी दिक्कत : मानसी
पांचवीं कक्षा की छात्रा मानसी ने बताया कि उन्हें स्कूल में आना अच्छा लगता है, लेकिन कोविड के चलते पिछले करीब डेढ़ साल से घरों में ही कैद थे। वैसे तो घर पर ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन क्लास में जो टीचर समझाते हैं, वह ऑनलाइन समझ नहीं आता।
घर नहीं था कोई स्मार्ट फोन, ट्यूशन पर जाकर करती थी पढ़ाई : राधिका
छात्रा राधिका ने बताया कि उनके घर में कोई स्मार्ट फोन नहीं था। वह ट्यूशन पर जाकर ही अपनी पढ़ाई पूरी करती थी। स्कूल की ओर से ट्यूशन टीचर के मोबाइल पर होमवर्क भेजा जाता था। फिर ट्यूशन टीचर की मदद से होमवर्क करती थी। अब उसे स्कूल आकर काफी अच्छा लग रहा है।
काफी प्रभावित हुई पढ़ाई : विशाल
चौथी कक्षा के छात्र विशाल का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से उनकी शिक्षा काफी प्रभावित हो गई है। ऑनलाइन पढ़ाई भी कराई जा रही थी, लेकिन बेहतरीन ढंग से पढ़ाई न होने के कारण शिक्षा प्रभावित हो रही थी।
घर पर नहीं था स्मार्ट फोन, बहन करा रही थी पढ़ाई : शिवानी
छात्रा शिवानी का कहना है कि उनके पास कोई स्मार्ट फोन नहीं था। बड़ी बहन ही उनकी पढ़ाई करा रही थी। स्कूल में टीचर द्वारा समझाने और ऑनलाइन पढ़ाई में काफी अंतर है, क्योंकि जो वह स्कूल में पढ़ते हैं वह अच्छी तरह समझ में आ जाता है। ऑनलाइन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कोविड गाइडलाइन का किया गया पालन : नीलम रानी
राजकीय प्राथमिक स्कूल की मुख्य अध्यापिका नीलम रानी ने बताया कि स्कूल खुलने से पहले सभी कमरों को अच्छी तरह से सैनिटाइज कराया गया। वहीं स्कूल में प्रवेश करने से पहले सभी बच्चों की थर्मल स्क्रीनिंग के साथ-साथ सैनिटाइज भी कराया गया। विद्यार्थियों के अभिभावकों की ओर से अनुमति पत्र दिए जाने पर ही बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिया गया। जो बच्चे अनुमति पत्र नहीं लेकर आए उनको यह पत्र लाना अनिवार्य किया गया।

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सतनाम सिंह भट्टी ने कहा कि बच्चों की हाजिरी ऑनलाइन लगती है, जिसका सीधा रिकॉर्ड पंचकूला जाता है। वहां से रिकॉर्ड बाद में आता है। फिलहाल उनके अनुसार पहले दिन 50 प्रतिशत बच्चे स्कूल में आए हैं।
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