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Kurukshetra News: छात्र पर हमला करने के मामले में एक को जमानत व दूसरे की याचिका खारिज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 26 Sep 2025 03:28 AM IST
सार

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय छात्रावास हमले के मामले में आरोपी साहिल को अदालत ने जमानत दे दी। हमले का नेतृत्व करने वाले मनीष की जमानत याचिका सबूतों और अपराध की गंभीरता के कारण खारिज कर दी गई।

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One man gets bail and the other's plea rejected in the case of assault on a student

विस्तार


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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के छात्रावास में रह रहे एक छात्र पर हमला करने के मामले में आरोपी साहिल सहरावत को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार ने नियमित जमानत दे दी। हमले का नेतृत्व करने के आरोपी मनीष की याचिका को खारिज कर दिया गया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 191(3), 190, 115(2), 118(1), 117(2), 118(2), 351(3) के तहत मामला दर्ज है।


एफआईआर के अनुसार 26-27 मई की रात करीब 12:45 बजे विवि के बीए एलएलबी के छात्र उदय और उनके मित्र अमनदीप बुलेट मोटरसाइकिल पर खाना लेने कैंपस से बाहर गए थे। उनके मित्र गुरनाम ने सूचना दी कि उनके दोस्त को हॉस्टल में परेशान किया जा रहा है। उदय, अमनदीप, राहुल और रोहित पहले देवी लाल हॉस्टल पहुंचे और फिर भीम हॉस्टल गए, जहां पीएचएसओ समूह के छह से सात युवक नशे की हालात में हंगामा कर रहे थे। इनमें मनीष रामगढ़िया, कृष जाट, रोबिन पैगा और सचिन ढिल्लो शामिल थे।
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गाली-गलौज के बाद स्थिति बिगड़ी और उदय गुर्जर धर्मशाला चला गया। बाद में मनीष के नेतृत्व में 15-16 नकाबपोश व्यक्तियों ने गंडासियों और डंडों से उदय पर हमला किया। उदय के बाएं घुटने और दाहिनी टांग पर गंभीर चोटें आईं। हमलावरों ने धमकी दी कि अगला निशाना गुरनाम होगा।
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जांच में उदय की सात चोटें की पुष्टि हुई, मनीष से खून से सनी गंडासी बरामद हुई, सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और कॉल डिटेल रिकॉर्ड एकत्र किए गए। इसके बाद साहिल को 1 जून को गिरफ्तार किया गया, जो विश्वविद्यालय का छात्र भी नहीं है। उसके साथ मनीष व सचिन को भी काबू कर लिया गया।



साहिल के वकील ने तर्क दिया कि सह-आरोपी सचिन को उच्च न्यायालय ने 19 सितंबर को जमानत दी है और इस मामले में साहिल का रोल समान है। जांच पूरी हो चुकी है और वह एक जून से हिरासत में है तो लंबी हिरासत के आधार पर जमानत दी जाए। वहीं मनीष के वकील ने तर्क दिया कि सह-आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। वह मामले की जांच पूरी हो गई है और मनीष का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।




लोक अभियोजक नवनीत सिंह ने दोनाें की जमानत याचिका कर विरोध किया लेकिन न्यायाधीश ने समानता के सिद्धांत और सह-आरोपियों की जमानत को देखते हुए साहिल को एक लाख रुपये के मुचलके और समान राशि की जमानत पर रिहा करने। वह मनीष के हमले के दौरान नेतृत्व करने व अपराध की गंभीरता और साक्ष्यों को देखते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी।
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