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ब्रज की 84 कोस यात्रा की तर्ज पर अब कुरुक्षेत्र की 48 कोस यात्रा की जाएगी शुरू : मुख्यमंत्री
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कुरुक्षेत्र। ब्रज की 84 कोस यात्रा की तर्ज पर 48 कोस कुरुक्षेत्र स्थित तीर्थों की यात्रा भी शुरू की जाएगी। इसके अलावा कुरुक्षेत्र को भगवान श्री कृष्ण की नगरी मथुरा और पवित्र नगरी हरिद्वार से जोड़ने के लिए रेल सेवा शुरू की जाएगी। श्री कृष्णा सर्किट योजना के तहत महाभारत युद्ध से संबंधित 134 स्थलों को लगभग 175 करोड़ रुपये के अनुमानित लागत से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। यह एलान मुख्यमंत्री नायब सैनी ने किया। वे बुधवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के तहत आयोजित 48 कोस तीर्थ सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि गीता जन्म स्थली ज्योतिसर में 205 करोड़ रुपये के निवेश से महाभारत थीम पर आधारित ज्योतिसर अनुभव केंद्र का निर्माण भी किया जा रहा है। इस अनुभव केंद्र का हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअली उद्घाटन किया था। उन्होंने कहा कि हमें गीता के कर्म योग को अपने जीवन में उतरने वाले कर्मयोगी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की नीतियों का उद्देश्य सिर्फ नीति निर्माण करना नहीं है, बल्कि लाखों किसानों, महिलाओं और वंचितों के जीवन में बदलाव लाना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कुरुक्षेत्र की 48 कोस भूमि में 367 तीर्थ स्थल हैं, जिनमें से कुछ समय के साथ लुप्त हो गए हैं। हाल ही में सर्वेक्षण एवं दस्तावेजीकरण के पश्चात 48 कोस कुरुक्षेत्र भूमि के 164 तीर्थों की सूची में 18 नए तीर्थ जोड़े गए हैं। यह कार्य अभी भी जारी है तथा निकट भविष्य में इस सूची में और तीर्थ जुड़ने की पूरी संभावना है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में 93 विकास कार्यों के लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड को 76 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 57 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। कुरुक्षेत्र में आस्था के अनेक केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। उत्तर भारत का श्री तिरुपति बालाजी मंदिर यहां बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, जीओ गीता संस्थान, अक्षरधाम मंदिर, इस्कॉन मंदिर तथा ज्ञान मंदिर भी निर्माणाधीन हैं। मुख्यमंत्री ने 48 कोस तीर्थ पुस्तक, तीर्थ क्यूआर कोड और कुरुक्षेत्र टूर गाइड के प्रथम और द्वितीय संस्करण का भी विमोचन किया।
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तीर्थ स्थलों का पुनर्विकास करना हमारी जिम्मेदारी : स्वामी ज्ञानानंद
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि आज 18 हजार बच्चों ने गीता श्लोकों का पाठ किया, जबकि लाखों बच्चों ने ऑनलाइन इस कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने कहा कि 48 कोस क्षेत्र के तीर्थ लुप्त होने के कगार पर थे लेकिन अब इस प्राचीन धरोहर को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि आने वाली पीढ़ियां इसके बारे में जान सकें। तीर्थ स्थलों का पुनर्विकास करना और दुनिया भर से पर्यटकों को अपने गांवों की ओर आकर्षित करना भी हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
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उन्होंने कहा कि गीता जन्म स्थली ज्योतिसर में 205 करोड़ रुपये के निवेश से महाभारत थीम पर आधारित ज्योतिसर अनुभव केंद्र का निर्माण भी किया जा रहा है। इस अनुभव केंद्र का हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअली उद्घाटन किया था। उन्होंने कहा कि हमें गीता के कर्म योग को अपने जीवन में उतरने वाले कर्मयोगी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की नीतियों का उद्देश्य सिर्फ नीति निर्माण करना नहीं है, बल्कि लाखों किसानों, महिलाओं और वंचितों के जीवन में बदलाव लाना है।
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मुख्यमंत्री ने बताया कि कुरुक्षेत्र की 48 कोस भूमि में 367 तीर्थ स्थल हैं, जिनमें से कुछ समय के साथ लुप्त हो गए हैं। हाल ही में सर्वेक्षण एवं दस्तावेजीकरण के पश्चात 48 कोस कुरुक्षेत्र भूमि के 164 तीर्थों की सूची में 18 नए तीर्थ जोड़े गए हैं। यह कार्य अभी भी जारी है तथा निकट भविष्य में इस सूची में और तीर्थ जुड़ने की पूरी संभावना है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में 93 विकास कार्यों के लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड को 76 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 57 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। कुरुक्षेत्र में आस्था के अनेक केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। उत्तर भारत का श्री तिरुपति बालाजी मंदिर यहां बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, जीओ गीता संस्थान, अक्षरधाम मंदिर, इस्कॉन मंदिर तथा ज्ञान मंदिर भी निर्माणाधीन हैं। मुख्यमंत्री ने 48 कोस तीर्थ पुस्तक, तीर्थ क्यूआर कोड और कुरुक्षेत्र टूर गाइड के प्रथम और द्वितीय संस्करण का भी विमोचन किया।
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तीर्थ स्थलों का पुनर्विकास करना हमारी जिम्मेदारी : स्वामी ज्ञानानंद
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि आज 18 हजार बच्चों ने गीता श्लोकों का पाठ किया, जबकि लाखों बच्चों ने ऑनलाइन इस कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने कहा कि 48 कोस क्षेत्र के तीर्थ लुप्त होने के कगार पर थे लेकिन अब इस प्राचीन धरोहर को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि आने वाली पीढ़ियां इसके बारे में जान सकें। तीर्थ स्थलों का पुनर्विकास करना और दुनिया भर से पर्यटकों को अपने गांवों की ओर आकर्षित करना भी हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।