फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Now women's music is limited to wedding cards

Kurukshetra News: अब शादी कार्ड तक सिमट गया महिला संगीत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 16 Dec 2024 01:47 AM IST
विज्ञापन
Now women's music is limited to wedding cards
कुरुक्षेत्र। आधुनिकता के दौर में शादियों का स्वरूप भी बदल गया है। समय के साथ रीति-रिवाज और बजट में भी बदलाव हो गया। साथ ही शादी का अंदाज भी बदल गया है। रस्म-रिवाज कम होने के साथ न के बराबर हो चुके हैं।
विज्ञापन

शादी का महत्वपूर्ण हिस्सा महिला संगीत का स्वरूप भी बदल चुका है। हालांकि अब शादी के कार्ड पर महिला संगीत को जगह दी गई है, मगर उसका महत्व पहले के दौर से बिल्कुल बदल चुका है। 90 के दशक में शादी के 10-15 दिन पहले से ही घर से ढोलकी की थाप पर महिलाओं का संगीत सुनाई देता था। इसमें रिश्तेदारों से लेकर आसपास की महिलाएं भी पूरे चाव के साथ शामिल होती थी। उस दौर में महिला संगीत में फिल्मी गीतों की बजाए लोकगीत को ज्यादा महत्व दिया जाता था। साथ ही इन लोकगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास करते थे। हालांकि अब महिला संगीत का पूरा स्वरूप बदल चुका है।
विज्ञापन

अब शादी से 10-15 दिन पहले चलने वाले महिला संगीत सिर्फ एक दिन तक सिमट गया है। साथ ही इसका स्वरूप पूरी तरह से बदल चुका है। आजकल महिला संगीत में ढोलकी की थाप और लोकगीत सुनाई नहीं देते हैं। अब डीजे और फिल्मी गीतों को उसमें शामिल किया गया है। अब सिर्फ एक दिन पहले ही रस्म-रिवाज के तौर पर महिला संगीत चलता है। हालांकि अब भी गांव और छाेटे कस्बों में महिला संगीत कुछ दिन पहले शुरू होता है, मगर उसमें भी घर और आसपड़ोस की महिलाएं ही शामिल होती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन



पूरे गांव और मोहल्ले को पता चलता था घर में शादी का माहौल : कृष्णा देवी, फोटो 48
बुजुर्ग कृष्णा देवी ने बताया कि वो दौर कुछ और था, क्योंकि उस दौर में 20 दिन पहले ही लोग शादी की तैयारी करते थे। रिश्तेदार, खासकर घर की बेटियाें को 15-20 दिन पहले ससुराल से मायके बुलाया जाता था। रात को महिला संगीत में आसपास की महिलाएं शामिल होती थी। पूरे गांव और मोहल्ले को पता चलता था कि इस घर में शादी का माहौल है।



संगीत से पहले मनाए जाते थे गणेशजी : मुकेश रानी
मुकेश रानी ने बताया कि महिला संगीत की शुरुआत में सबसे पहले गणेश जी का स्मरण किया जाता था। उसके बाद महिलाएं वर-वधू की अच्छी जिंदगी के लिए मंगल गान करती थी। इसमें लोकगीत ज्यादा शामिल होते थे। संगीत के बाद सभी महिलाओं को शगुन के तौर गुलगुले, बताशे, बिस्कुट, लड्डू, बूंदी और नमकीन दिया जाता था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed