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Kurukshetra News: अब इशारा करते ही पीछे-पीछे चल पड़ेगा सामान, मानव-अनुसरण रोबोट करेगा जीवन आसान
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कुरुक्षेत्र। रोबोट का बनाया गया प्रोटोटाइप मॉडल। संवाद
- फोटो : (फाइल फोटो) स्रोत : परिजन
राजरानी
कुरुक्षेत्र। आप एक इशारा करते हैं और आपका सामान अपने आप आपके पीछे-पीछे चल पड़ता है। यह कोई साइंस-फिक्शन फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र के इंजीनियरों की नई खोज है। डॉ. संतोष कुमार के मार्गदर्शन में छात्रों ने एक ऐसा मानव-अनुसरण रोबोट बनाया है, जो एक इशारे पर सामान ढो सकता है। इस अनोखी तकनीक को हाल ही में पेटेंट भी मिला है, जो संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
यह रोबोट कम लागत और गजब की दक्षता का शानदार मेल है। इसमें इंटेलिजेंट ट्रैकिंग सिस्टम की ताकत है, जो मानव गतिविधियों को पढ़कर उनके पीछे चलता है और सामान को सटीकता से पहुंचाता है। गोदामों में भारी-भरकम सामान शिफ्ट करना हो, अस्पतालों में दवाइयां और उपकरण ले जाना हो, या मॉल में शॉपिंग का बोझ हल्का करना हो, यह रोबोट समय और श्रम बचाने में सक्षम होगा।
कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग से डॉ. संतोष कुमार के मार्गदर्शन में रोबोट पर छात्र अजय ठकरान, अक्षय अग्रवाल और पुलकित महाजन ने अपने कार्य से आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूत किया है। उनका कहना है कि ये ऐसी तकनीक बनाई गई है जो किफायती, पर्यावरण अनुकूल और हर किसी के लिए उपयोगी हो। रोबोट का डिजाइन हल्का और टिकाऊ है, जिसे स्थानीय संसाधनों से बनाया गया है।
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हाथ के इशारों पर इस तरह से कार्य करेगा रोबोट
डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि यह रोबोट एक विजन-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम पर काम करता है। यह रोबोट एक व्हील-बेस्ड सिस्टम है। इसके कैमरे पहले इंसान को कपड़े, रंग, ऊंचाई से पहचानते हैं और फिर उसी व्यक्ति को एल्गोरिदम की मदद से फॉलो करना शुरू करता। इसमें लगे सेंसर रास्ते में आने वाली बाधाओं को पहचानते हैं। रोबोट अपने मार्ग को खुद ही समायोजित करता है। इसे खास तरह के हाथ के इशारे से ऑन या ऑफ किया जा सकता है। यानी किसी बटन या रिमोट की जरूरत नहीं। उपयोगकर्ता जैसे ही इशारा करता है, रोबोट एक्टिव हो जाता है और सामान लेकर उसके पीछे-पीछे चल पड़ता है। इसमें विजन बेस्ड ट्रैकिंग, अल्ट्रासोनिक सेंसर और हैंड जेस्चर डिटेक्शन सिस्टम लगाया गया जो इसे एक स्मार्ट और ऑटोमेटिक मूवमेंट की क्षमता प्रदान करती है।
कोरोना महामारी से रोबोट बनाने की मिली थी प्रेरणा
डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि यह रोबोट खासकर कोविड जैसे महामारी के समय में अस्पतालों और कंटेनमेंट जोन में सहायक हो सकता है। जैसे ड्रोन निगरानी के लिए इस्तेमाल हुए, वैसे ही यह रोबोट बिना इंसानी संपर्क के मरीजों तक उपकरण पहुंचाने में मदद कर सकता है। उन्हें भी इसी महामारी से ये रोबोट बनाने की प्रेरणा मिली थी। इसमें लगा कैमरा मानव की छवि को पहचानता है और एक बॉक्स के माध्यम से उसे मार्क करता है। अल्ट्रासोनिक सेंसर यह सुनिश्चित करता है कि रोबोट और इंसान के बीच एक सुरक्षित दूरी बनी रहे।
एनआईटी निदेशक ने डॉ. संतोष और उनकी टीम को दी बधाई
एनआईटी निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी का कहना है कि संस्थान के शिक्षक और विद्यार्थी शोध के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं, जिसके लिए संस्थान भी हर तरह की सुविधाओं के लिए प्रतिबद्ध है। तकनीक ही देश का आधार है। इस ओर कार्य कर विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जाना आसान होगा। उनका कहना है कि किसी भी प्रोजेक्ट पर पेटेंट मिलना संस्थान के लिए गौरवमयी क्षण होता है। उन्होंने डॉ. संतोष कुमार व उनकी टीम को बधाई दी।
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कुरुक्षेत्र। आप एक इशारा करते हैं और आपका सामान अपने आप आपके पीछे-पीछे चल पड़ता है। यह कोई साइंस-फिक्शन फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र के इंजीनियरों की नई खोज है। डॉ. संतोष कुमार के मार्गदर्शन में छात्रों ने एक ऐसा मानव-अनुसरण रोबोट बनाया है, जो एक इशारे पर सामान ढो सकता है। इस अनोखी तकनीक को हाल ही में पेटेंट भी मिला है, जो संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
यह रोबोट कम लागत और गजब की दक्षता का शानदार मेल है। इसमें इंटेलिजेंट ट्रैकिंग सिस्टम की ताकत है, जो मानव गतिविधियों को पढ़कर उनके पीछे चलता है और सामान को सटीकता से पहुंचाता है। गोदामों में भारी-भरकम सामान शिफ्ट करना हो, अस्पतालों में दवाइयां और उपकरण ले जाना हो, या मॉल में शॉपिंग का बोझ हल्का करना हो, यह रोबोट समय और श्रम बचाने में सक्षम होगा।
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कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग से डॉ. संतोष कुमार के मार्गदर्शन में रोबोट पर छात्र अजय ठकरान, अक्षय अग्रवाल और पुलकित महाजन ने अपने कार्य से आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूत किया है। उनका कहना है कि ये ऐसी तकनीक बनाई गई है जो किफायती, पर्यावरण अनुकूल और हर किसी के लिए उपयोगी हो। रोबोट का डिजाइन हल्का और टिकाऊ है, जिसे स्थानीय संसाधनों से बनाया गया है।
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हाथ के इशारों पर इस तरह से कार्य करेगा रोबोट
डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि यह रोबोट एक विजन-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम पर काम करता है। यह रोबोट एक व्हील-बेस्ड सिस्टम है। इसके कैमरे पहले इंसान को कपड़े, रंग, ऊंचाई से पहचानते हैं और फिर उसी व्यक्ति को एल्गोरिदम की मदद से फॉलो करना शुरू करता। इसमें लगे सेंसर रास्ते में आने वाली बाधाओं को पहचानते हैं। रोबोट अपने मार्ग को खुद ही समायोजित करता है। इसे खास तरह के हाथ के इशारे से ऑन या ऑफ किया जा सकता है। यानी किसी बटन या रिमोट की जरूरत नहीं। उपयोगकर्ता जैसे ही इशारा करता है, रोबोट एक्टिव हो जाता है और सामान लेकर उसके पीछे-पीछे चल पड़ता है। इसमें विजन बेस्ड ट्रैकिंग, अल्ट्रासोनिक सेंसर और हैंड जेस्चर डिटेक्शन सिस्टम लगाया गया जो इसे एक स्मार्ट और ऑटोमेटिक मूवमेंट की क्षमता प्रदान करती है।
कोरोना महामारी से रोबोट बनाने की मिली थी प्रेरणा
डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि यह रोबोट खासकर कोविड जैसे महामारी के समय में अस्पतालों और कंटेनमेंट जोन में सहायक हो सकता है। जैसे ड्रोन निगरानी के लिए इस्तेमाल हुए, वैसे ही यह रोबोट बिना इंसानी संपर्क के मरीजों तक उपकरण पहुंचाने में मदद कर सकता है। उन्हें भी इसी महामारी से ये रोबोट बनाने की प्रेरणा मिली थी। इसमें लगा कैमरा मानव की छवि को पहचानता है और एक बॉक्स के माध्यम से उसे मार्क करता है। अल्ट्रासोनिक सेंसर यह सुनिश्चित करता है कि रोबोट और इंसान के बीच एक सुरक्षित दूरी बनी रहे।
एनआईटी निदेशक ने डॉ. संतोष और उनकी टीम को दी बधाई
एनआईटी निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी का कहना है कि संस्थान के शिक्षक और विद्यार्थी शोध के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं, जिसके लिए संस्थान भी हर तरह की सुविधाओं के लिए प्रतिबद्ध है। तकनीक ही देश का आधार है। इस ओर कार्य कर विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जाना आसान होगा। उनका कहना है कि किसी भी प्रोजेक्ट पर पेटेंट मिलना संस्थान के लिए गौरवमयी क्षण होता है। उन्होंने डॉ. संतोष कुमार व उनकी टीम को बधाई दी।

कुरुक्षेत्र। रोबोट का बनाया गया प्रोटोटाइप मॉडल। संवाद- फोटो : (फाइल फोटो) स्रोत : परिजन