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Kurukshetra News: अब पॉलिथीन अपशिष्ट से बनेंगे पेवर ब्लॉक, 50 साल तक नहीं टूटेंगी सड़कें
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कुरुक्षेत्र। प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बन चुके पॉलिथीन अपशिष्ट से अब छुटकारा मिल सकेगा। इससे सीमेंट से भी मजबूत पेवर ब्लॉक बनाए जा सकेंगे, जिनसे सड़कें और गलियों का निर्माण किया जा सकेगा। इन ब्लॉक की उम्र 50 वर्ष तक होगी, जिससे कुछ सालों में ही सड़कें और गलियां टूटने की समस्या से भी निजात मिल सकेगी।
धान छिलका, पराली व सिलिका के मिश्रण के साथ पॉलिथीन अपशिष्ट से ब्लॉक बनाए जाने पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रसायन विभाग के सहायक प्रो सोहन लाल पिछले कईं वर्षों से शोध में जुटे हैं और अब इसका परिणाम मिलते ही विभाग के साथ-साथ विश्वविद्यालय परिसर में भी खुशी की लहर है। विभाग अब इस पर पेटेंट कराने की तैयारी में जुट गया है। पॉलिथीन अपशिष्ट वर्तमान में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारक बनता जा रहा है। केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार तक इस पर पाबंदी लगाने के लिए कई बार प्रयास कर चुकी है, लेकिन आज भी यह समस्या गहराई हुई है। इस पॉलिथीन अपशिष्ट का पुन: प्रयोग कर ही इससे निपटा जा सकता है। इसी के चलते उनके जहन में भी इसके दोबारा से प्रयोग किए जाने का विचार आया, ताकि इससे बना सामान वर्षों तक चल सके। ऐसे में उन्होंने शोध शुरू किया, जिसके बाद एक फैक्ट्री में ये पेवर ब्लॉक तैयार करवाए और इनकी जांच भी कराई गई।
पॉलिथीन अपशिष्ट के साथ-साथ सड़कें टूटने की समस्या से मिलेगी निजात : प्रो सोहन लाल
प्रो. सोहन का दावा है कि इस ब्लॉक की मजबूती मार्केट में मौजूद सीमेंट ब्लॉक से ज्यादा है, बल्कि इनका वजन भी 200 से 300 ग्राम है जबकि मार्केट में मौजूद सीमेंट ब्लॉक का वजन दो से चार किलोग्राम होता है। प्लास्टिक अपशिष्ट से बने ब्लॉक की उम्र लगभग 50 साल तक होगी। ये बेहद मजबूत और आकर्षक होंगे, जिनका प्रयोग हल्के वाहनों के लिए प्रयोग की जाने वाली सड़कें, गलियां, फुटपाथ आदि पर कर सकते हैं।
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ऐसे तैयार किए जा सकते हैं पेवर ब्लॉक
प्रो सोहन लाल के मुताबिक पेवर ब्लॉक बनाने के लिए सबसे पहले अपशिष्ट पॉलिथीन को एकत्रित कर श्रेडर मशीन से इसे छोटे-छोटे टुकडे़ में काट लिया जाता है, उसके बाद कृषि अपशिष्ट जैसे चावल का छिलका और पराली को सिलिका के साथ मिश्रित कर एक्सट्रूडर मशीन से निकाला जाता है जो कि तारनुमा रूप में निकलता है, जिसे छोटी टुकडिय़ों में काटकर इंजेक्शन मोल्डिंग मशीन से गर्म करके सांचे में डाल दिया जाता है, जिससे कि वह वैसा ही आकार ले लेता है जैसी संरचना देना चाहते हैं। ब्लॉक, कुर्सी, मेज, गमले आदि के सांचे में डालकर अपशिष्ट पदार्थ से प्रयोग में आने वाली वस्तुएं बना सकते हैं।
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धान छिलका, पराली व सिलिका के मिश्रण के साथ पॉलिथीन अपशिष्ट से ब्लॉक बनाए जाने पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रसायन विभाग के सहायक प्रो सोहन लाल पिछले कईं वर्षों से शोध में जुटे हैं और अब इसका परिणाम मिलते ही विभाग के साथ-साथ विश्वविद्यालय परिसर में भी खुशी की लहर है। विभाग अब इस पर पेटेंट कराने की तैयारी में जुट गया है। पॉलिथीन अपशिष्ट वर्तमान में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारक बनता जा रहा है। केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार तक इस पर पाबंदी लगाने के लिए कई बार प्रयास कर चुकी है, लेकिन आज भी यह समस्या गहराई हुई है। इस पॉलिथीन अपशिष्ट का पुन: प्रयोग कर ही इससे निपटा जा सकता है। इसी के चलते उनके जहन में भी इसके दोबारा से प्रयोग किए जाने का विचार आया, ताकि इससे बना सामान वर्षों तक चल सके। ऐसे में उन्होंने शोध शुरू किया, जिसके बाद एक फैक्ट्री में ये पेवर ब्लॉक तैयार करवाए और इनकी जांच भी कराई गई।
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पॉलिथीन अपशिष्ट के साथ-साथ सड़कें टूटने की समस्या से मिलेगी निजात : प्रो सोहन लाल
प्रो. सोहन का दावा है कि इस ब्लॉक की मजबूती मार्केट में मौजूद सीमेंट ब्लॉक से ज्यादा है, बल्कि इनका वजन भी 200 से 300 ग्राम है जबकि मार्केट में मौजूद सीमेंट ब्लॉक का वजन दो से चार किलोग्राम होता है। प्लास्टिक अपशिष्ट से बने ब्लॉक की उम्र लगभग 50 साल तक होगी। ये बेहद मजबूत और आकर्षक होंगे, जिनका प्रयोग हल्के वाहनों के लिए प्रयोग की जाने वाली सड़कें, गलियां, फुटपाथ आदि पर कर सकते हैं।
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ऐसे तैयार किए जा सकते हैं पेवर ब्लॉक
प्रो सोहन लाल के मुताबिक पेवर ब्लॉक बनाने के लिए सबसे पहले अपशिष्ट पॉलिथीन को एकत्रित कर श्रेडर मशीन से इसे छोटे-छोटे टुकडे़ में काट लिया जाता है, उसके बाद कृषि अपशिष्ट जैसे चावल का छिलका और पराली को सिलिका के साथ मिश्रित कर एक्सट्रूडर मशीन से निकाला जाता है जो कि तारनुमा रूप में निकलता है, जिसे छोटी टुकडिय़ों में काटकर इंजेक्शन मोल्डिंग मशीन से गर्म करके सांचे में डाल दिया जाता है, जिससे कि वह वैसा ही आकार ले लेता है जैसी संरचना देना चाहते हैं। ब्लॉक, कुर्सी, मेज, गमले आदि के सांचे में डालकर अपशिष्ट पदार्थ से प्रयोग में आने वाली वस्तुएं बना सकते हैं।