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Kurukshetra News: अब झारखंड की संस्कृति को जान पाएंगे एनआईटी के विद्यार्थी
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कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में युवा संगम के अंतर्गत विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े 17 लड़कियों सहित 48 छात्रों के समूह को झारखंड के लिए रवाना किया गया। विद्यार्थियों का यह समूह एक सप्ताह के लिए झारखंड का भ्रमण करेगा और झारखंड की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक से जुड़ी कई अहम जानकारियों को हासिल करेगा। इस दल को रवाना करने के लिए संस्थान के सीनेट हॉल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें अवर शिक्षा सचिव केवी उदय किरण मुख्य अतिथि रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रो. बीवी रमणा रेड्डी ने की।
मुख्य अतिथि ने कहा कि इस तरह के भ्रमण कार्यक्रमों में हिस्सा लेने से विद्यार्थियों को कई तरह की जानकारियां हासिल होती हैं, जो कि उनके सर्वांगीण विकास के लिए सहायक होती हैं। साथ ही उन्हें दूसरे राज्यों की संस्कृति को नजदीक से जानने का अवसर मिलता है। संस्थान के निदेशक प्रो. बीवी रमणा रेड्डी ने कहा कि व्यक्तिगत दृष्टिकोण को व्यापक बनाने और आपसी सम्मान और समझ को बढ़ावा देने में ऐसी भ्रमण यात्राओं का काफी महत्व होता है। युवा संगम का उद्देश्य निरंतर सांस्कृतिक आदान-प्रदान करना और पूरे देश के युवाओं को आपस में जोड़ना है। इसके पश्चात छात्र अधिष्ठाता प्रो. दीक्षित गर्ग ने एक भारत श्रेष्ठ भारत के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा युवा संगम के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के युवाओं के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने की एक अच्छी पहल है। इससे युवा दूसरे राज्यों से कई अहम जानकारियां हासिल कर सकेंगे और उन्हें नए अनुभव मिलेंगे। इस मौके पर डीन (शैक्षणिक) प्रो. आरपी चौहान, प्रो. पीसी तिवारी, डाॅ. यशश्चंद्र द्विवेदी, डॉ. सैंथिल कुमार सहित अन्य मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि ने कहा कि इस तरह के भ्रमण कार्यक्रमों में हिस्सा लेने से विद्यार्थियों को कई तरह की जानकारियां हासिल होती हैं, जो कि उनके सर्वांगीण विकास के लिए सहायक होती हैं। साथ ही उन्हें दूसरे राज्यों की संस्कृति को नजदीक से जानने का अवसर मिलता है। संस्थान के निदेशक प्रो. बीवी रमणा रेड्डी ने कहा कि व्यक्तिगत दृष्टिकोण को व्यापक बनाने और आपसी सम्मान और समझ को बढ़ावा देने में ऐसी भ्रमण यात्राओं का काफी महत्व होता है। युवा संगम का उद्देश्य निरंतर सांस्कृतिक आदान-प्रदान करना और पूरे देश के युवाओं को आपस में जोड़ना है। इसके पश्चात छात्र अधिष्ठाता प्रो. दीक्षित गर्ग ने एक भारत श्रेष्ठ भारत के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा युवा संगम के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के युवाओं के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने की एक अच्छी पहल है। इससे युवा दूसरे राज्यों से कई अहम जानकारियां हासिल कर सकेंगे और उन्हें नए अनुभव मिलेंगे। इस मौके पर डीन (शैक्षणिक) प्रो. आरपी चौहान, प्रो. पीसी तिवारी, डाॅ. यशश्चंद्र द्विवेदी, डॉ. सैंथिल कुमार सहित अन्य मौजूद रहे।
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