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रक्त की कमी से किसी की मौत न हो, यह सबकी जिम्मेदारी
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अमर उजाला फाउंडेशन, सर्व समाज कल्याण सेवा समिति एवं युवा सेवा समिति पिहोवा के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को पार्थ ब्लड बैंक में 155 वां रक्तदान शिविर लगाया गया। शिविर में समिति की जिला कोऑर्डिनेटर एवं मुख्यातिथि अविनाश कौर ने खुद 14वीं बार रक्तदान किया। इनके अलावा भी दर्जनभर रक्तदाता रक्तदान कर पुण्य के भागीदार बने। समिति के प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर सैनी व संरक्षक नरेश सैनी ने बताया कि शिविर युवा सेवा समिति के महासचिव संदीप कश्यप की बिटिया जैस्मिन कश्यप के चौथे जन्मदिन के उपलक्ष में लगाया गया। मुख्य अतिथि एवं समिति की जिला कोऑर्डिनेटर अविनाश कौर ने कहा कि रक्तदान करना पुण्य का कार्य है। रक्तदाता द्वारा किया गया रक्तदान असंख्य लोगों को नया जीवन प्रदान करता है। स्वस्थ मनुष्य को हर तीन माह बाद रक्तदान करते रहने चाहिए। युवा सेवा समिति के प्रधान जसबीर सिंह व महासचिव संदीप कश्यप ने कहा कि रक्त किसी की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण है। हर स्वस्थ व्यक्ति को कम से कम 3 माह के अंतराल में एक बार रक्तदान जरूरी करना चाहिए। समिति के प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर सैनी ने रक्तदाताओं से आहवान किया कि वे बढ़ चढ़कर रक्तदान करें। समिति द्वारा 7 अगस्त को पिहोवा के गांव सैसा व 8 अगस्त को हिसार में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। संरक्षक नरेश सैनी ने बताया कि समिति द्वारा शिविर के माध्यम से लोगों को रक्तदान के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है ताकि रक्त के अभाव में किसी भी मरीज की जान जोखिम में न पड़े। शिविर में जशन, राकेश कुमार, अविनाश कौर, सतीश कुमार, राधेश्याम, संदीप कुमार, गुरविंदर सिंह, हर्षित, आशीष, दिनेश, जोगीराम, सागर, रिंकू राम, कर्मवीर सिंह सैनी व अमनदीप ने रक्तदान किया। शिविर में पुनीत सेतिया, स्नेहा, गुरमीत गुरमीत आर्य भटेडी, सतीश निमवाला, संदीप कश्यप, रविंद्र कश्यप आदि मौजूद रहे। शिविर में पार्थ ब्लड बैंक के डॉ. श्वेता सैनी के नेतृत्व में संजीव वर्मा, मोनिका सैनी, अंकुश व चेतन ने रक्त संग्रहित किया।
सर्व समाज कल्याण सेवा समिति की जिला कोऑडिनेटर अविनाश कौर ने शिविर में 14वीं बार रक्तदान किया। इससे पहले वे कई रक्तदान शिविरों में रक्तदान कर चुकी हैं। संसार में रक्त का कोई अन्य विकल्प नहीं है। उन्होंने महिलाओं से अपील की है कि रक्तदान करने के लिए युवा और पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी आगे आए, क्योंकि हम रक्तदान करके न जाने कितनों की अनमोल जान बचा सकते हैं।
सतीश कुमार ने पहली बार रक्तदान किया। इस दौरान उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि रक्तदान करके उन्हें बहुत खुशी हुई। हर व्यक्ति को रक्तदान करना चाहिए, इससे शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती है, बल्कि नई ऊर्जा का संचार होता है। रक्तदान करना बहुत ही पुण्य का कार्य है। रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है।
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एलएनजेपी अस्पताल के लैब मुख्य तकनीकी अधिकारी कर्मवीर सैनी ने 53 वर्ष की आयु में 14वीं बार रक्तदान किया। कहा कि अक्सर लोग ब्लड देने से डरते या संकोच करते हैं, जबकि यह आपके लिए ही फायदेमंद है। इससे आपके शरीर में नया खून बनता है और आप पहले से ज्यादा चुस्त दुरुस्त बनते हैं।
रक्तदाता संदीप कश्यप ने चौथी बार रक्तदान किया। उन्होंने कहा कि हमारे द्वारा दिया गया रक्त किसी के काम आएगा, यह मेरे लिए बहुत ही खुशी की बात है। आज पहली बार रक्तदान किया बहुत ही खुशी हुई। कहा कि जहां भी रक्त की जरूरत हो वहां हमे इंसानियत दिखाते हुए सबसे पहले रक्तदान करना चाहिए।
राधे श्याम ने पहली बार रक्तदान किया। रक्तदान करने को लेकर पहले उन्हें थोड़ी घबराहट जरूर हुई, लेकिन रक्तदान करके अच्छा महसूस किया। कहा कि रक्त किसी भी लैब या फैक्टरी में नहीं बनाया जा सकता है। इसलिए मनुष्य को रक्तदान करने के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए।
गुरजिंदर सिंह 7 बार रक्तदान कर चुके हैं। उनका कहना है कि रक्तदान करने से शरीर में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होती है। रक्तदान करने वाले का शरीर स्वस्थ रहता है। वह किसी प्रकार की बीमारी का शिकार नहीं होता है। आप भी रक्तदान कर दूसरों का जीवन बचा सकते हैं।
जसबीर सिंह ईशाक खुद 13 बार रक्तदान कर चुके हैं। उनका कहना है कि रक्तदान करके शरीर में किसी भी प्रकार की कमजोरी नहीं आती है। बल्कि इससे नया खून तेजी से बनता है, जिससे रक्त का संचार ठीक होता है और स्फूर्ति आती है। रक्तदान करने में हमें देरी नहीं करनी चाहिए। स्वस्थ आदमी को 3 माह में कम से कम एक बार रक्तदान की जरूर करना चाहिए रक्तदान मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा दान है
जोगी राम ने कहा कि रक्तदान महादान है। एक व्यक्ति रक्तदान कर किसी जरूरतमंद लोगों की जान बचा सकता है और जाने अंजाने व्यक्ति से रक्त का रिश्ता बन जाता है। आपके रक्त की एक यूनिट से तीन मरीजों की जान बच सकती है। तो मरीजों की जान बचाने के लिए रक्तदान करिए।कहा कि किसी भी स्वस्थ व्यक्ति द्वारा दान किया गया रक्त शरीर में फिर से 24 घंटे में बन जाता है। इससे शरीर पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
सर्व समाज कल्याण सेवा समिति के प्रधान रामेश्वर सैनी ने कहा कि जब किसी अपने का जीवन खतरे में हो तब रक्त की महता समझ में आती है। आज हमारे द्वारा किया गया रक्त दान केसी जरूरतमंद के जीवन को बचाने में सहायक होगा। रक्त के लिए कभी किसी का जीवन समाप्त न हो इस बात की जिम्मेदारी हम सब पर है। कहा कि सभी लोगों को जागरूक करें और समय-समय पर सभी को रक्तदान करना चाहिेए।
समिति के मीडिया प्रभारी तरुण वधवा का कहना है कि संस्था द्वारा समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित कराए जा रह हैं। कहा कि एक यूनिट रक्त से प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और सीआरबीसी बनते हैं। प्लाज्मा का उपयोग जले हुए मरीज और प्रसूताओं के इलाज में किया जाता है। प्लेटलेट्स का डेंगू, वायरल फीवर, सेप्टीसीमिया और मलेरिया के मरीजों के उपयोग में इस्तेमाल होता है। एनमिक और थेलेसीमिया के मरीजों के इलाज में सीआरबीसी की जरूरत पड़ती है।
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सर्व समाज कल्याण सेवा समिति की जिला कोऑडिनेटर अविनाश कौर ने शिविर में 14वीं बार रक्तदान किया। इससे पहले वे कई रक्तदान शिविरों में रक्तदान कर चुकी हैं। संसार में रक्त का कोई अन्य विकल्प नहीं है। उन्होंने महिलाओं से अपील की है कि रक्तदान करने के लिए युवा और पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी आगे आए, क्योंकि हम रक्तदान करके न जाने कितनों की अनमोल जान बचा सकते हैं।
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सतीश कुमार ने पहली बार रक्तदान किया। इस दौरान उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि रक्तदान करके उन्हें बहुत खुशी हुई। हर व्यक्ति को रक्तदान करना चाहिए, इससे शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती है, बल्कि नई ऊर्जा का संचार होता है। रक्तदान करना बहुत ही पुण्य का कार्य है। रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है।
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एलएनजेपी अस्पताल के लैब मुख्य तकनीकी अधिकारी कर्मवीर सैनी ने 53 वर्ष की आयु में 14वीं बार रक्तदान किया। कहा कि अक्सर लोग ब्लड देने से डरते या संकोच करते हैं, जबकि यह आपके लिए ही फायदेमंद है। इससे आपके शरीर में नया खून बनता है और आप पहले से ज्यादा चुस्त दुरुस्त बनते हैं।
रक्तदाता संदीप कश्यप ने चौथी बार रक्तदान किया। उन्होंने कहा कि हमारे द्वारा दिया गया रक्त किसी के काम आएगा, यह मेरे लिए बहुत ही खुशी की बात है। आज पहली बार रक्तदान किया बहुत ही खुशी हुई। कहा कि जहां भी रक्त की जरूरत हो वहां हमे इंसानियत दिखाते हुए सबसे पहले रक्तदान करना चाहिए।
राधे श्याम ने पहली बार रक्तदान किया। रक्तदान करने को लेकर पहले उन्हें थोड़ी घबराहट जरूर हुई, लेकिन रक्तदान करके अच्छा महसूस किया। कहा कि रक्त किसी भी लैब या फैक्टरी में नहीं बनाया जा सकता है। इसलिए मनुष्य को रक्तदान करने के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए।
गुरजिंदर सिंह 7 बार रक्तदान कर चुके हैं। उनका कहना है कि रक्तदान करने से शरीर में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होती है। रक्तदान करने वाले का शरीर स्वस्थ रहता है। वह किसी प्रकार की बीमारी का शिकार नहीं होता है। आप भी रक्तदान कर दूसरों का जीवन बचा सकते हैं।
जसबीर सिंह ईशाक खुद 13 बार रक्तदान कर चुके हैं। उनका कहना है कि रक्तदान करके शरीर में किसी भी प्रकार की कमजोरी नहीं आती है। बल्कि इससे नया खून तेजी से बनता है, जिससे रक्त का संचार ठीक होता है और स्फूर्ति आती है। रक्तदान करने में हमें देरी नहीं करनी चाहिए। स्वस्थ आदमी को 3 माह में कम से कम एक बार रक्तदान की जरूर करना चाहिए रक्तदान मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा दान है
जोगी राम ने कहा कि रक्तदान महादान है। एक व्यक्ति रक्तदान कर किसी जरूरतमंद लोगों की जान बचा सकता है और जाने अंजाने व्यक्ति से रक्त का रिश्ता बन जाता है। आपके रक्त की एक यूनिट से तीन मरीजों की जान बच सकती है। तो मरीजों की जान बचाने के लिए रक्तदान करिए।कहा कि किसी भी स्वस्थ व्यक्ति द्वारा दान किया गया रक्त शरीर में फिर से 24 घंटे में बन जाता है। इससे शरीर पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
सर्व समाज कल्याण सेवा समिति के प्रधान रामेश्वर सैनी ने कहा कि जब किसी अपने का जीवन खतरे में हो तब रक्त की महता समझ में आती है। आज हमारे द्वारा किया गया रक्त दान केसी जरूरतमंद के जीवन को बचाने में सहायक होगा। रक्त के लिए कभी किसी का जीवन समाप्त न हो इस बात की जिम्मेदारी हम सब पर है। कहा कि सभी लोगों को जागरूक करें और समय-समय पर सभी को रक्तदान करना चाहिेए।
समिति के मीडिया प्रभारी तरुण वधवा का कहना है कि संस्था द्वारा समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित कराए जा रह हैं। कहा कि एक यूनिट रक्त से प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और सीआरबीसी बनते हैं। प्लाज्मा का उपयोग जले हुए मरीज और प्रसूताओं के इलाज में किया जाता है। प्लेटलेट्स का डेंगू, वायरल फीवर, सेप्टीसीमिया और मलेरिया के मरीजों के उपयोग में इस्तेमाल होता है। एनमिक और थेलेसीमिया के मरीजों के इलाज में सीआरबीसी की जरूरत पड़ती है।