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Kurukshetra News: लापरवाही... नियमों से दूर चल रहे सफलता के घर
Sun, 17 May 2026 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 17 May 2026 01:05 AM IST
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रवींद्र नैन
पानीपत। जिले में एसएससी, एचएसएससी, सीजीएल, आईएएस, बैंकिंग और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले 400 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं लेकिन इनमें से अधिकांश संस्थान बुनियादी सुरक्षा और सरकारी मानकों से कोसों दूर हैं। हरियाणा निजी कोचिंग संस्थान पंजीकरण व विनियमन अधिनियम लागू होने के बावजूद जिले में कितने संस्थान पंजीकृत हैं, इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड प्रशासन या शिक्षा विभाग के पास उपलब्ध नहीं है।
अभियान के पहले दिन बिशन स्वरूप कॉलोनी स्थित दो कोचिंग संस्थानों की पड़ताल में सामने आया कि दोनों सेंटर किराए की इमारतों की पहली मंजिल पर संचालित हो रहे हैं। तीन से चार कमरों को छोटे-छोटे केबिन में बांटकर 8 से 10 कक्षाएं चलाई जा रही हैं। प्रवेश और निकास के लिए केवल एक संकरा रास्ता है जो सीढि़यों से होकर जाता है। एक संस्थान में खिड़कियां सड़क की ओर खुलती हैं, जबकि दूसरे में वेंटिलेशन और प्राकृतिक रोशनी की समुचित व्यवस्था तक नहीं मिली।
सबसे गंभीर बात यह रही कि दोनों संस्थानों में अग्निशमन यंत्र नहीं मिले। फायर एनओसी का रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं कराया गया। आसपास की गलियां इतनी संकरी हैं कि आपात स्थिति में दमकल वाहन सीधे अंदर नहीं पहुंच सकते। भवनों के बाहर गलियों में जनरेटर रखे गए हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है।
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-- फीस लाख तक लेकिन रिकॉर्ड नहीं
इन संस्थानों में एसएससी और एचएसएससी की कोचिंग के लिए लगभग 9500 रुपये, सीजीएल के लिए 20 हजार रुपये और आईएएस तैयारी के लिए एक लाख रुपये तक फीस वसूली जा रही है। फीस एकमुश्त या दो किस्तों में ली जाती है लेकिन अधिकतर संस्थानों में फीस का व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं मिला। पहले संस्थान में 9 और दूसरे संस्थान में 7 शिक्षक कार्यरत मिले, जिनकी न्यूनतम योग्यता स्नातकोत्तर बताई गई।
-- कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस
शिक्षा विभाग की ओर से गैर-पंजीकृत कोचिंग सेंटरों की कोई नियमित निगरानी, जांच या रिकॉर्ड व्यवस्था नहीं है। विभागीय स्तर पर अब तक किसी सेंटर पर ठोस कार्रवाई भी नहीं की गई। पिछले वर्ष उपायुक्त के आदेश पर नगर निगम ने करीब 60 सेंटरों को नोटिस जरूर भेजे थे, लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पड़ताल में सामने आई प्रमुख बातें-
- जिले में 400 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित।
- अधिकांश संस्थानों के पास पंजीकरण नहीं।
- फायर एनओसी और अग्निशमन उपकरणों का अभाव।
- संकरी गलियों और एकमात्र रास्ते से बढ़ा खतरा।
- 9500 रुपये से 1 लाख रुपये तक फीस।
- शिक्षा विभाग के पास संस्थानों का सटीक रिकॉर्ड नहीं।
- पिछले साल 60 सेंटरों को नोटिस, कार्रवाई शून्य।
जिले में बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर बिना किसी स्पष्ट निगरानी और मानकों के संचालित हो रहे हैं। नियम सभी शिक्षण संस्थानों पर समान रूप से लागू होने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों का हित सुरक्षित रह सके। - बिजेंद्र मान, जिलाध्यक्ष, सहोदय स्कूल एसोशिएशन
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पानीपत। जिले में एसएससी, एचएसएससी, सीजीएल, आईएएस, बैंकिंग और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले 400 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं लेकिन इनमें से अधिकांश संस्थान बुनियादी सुरक्षा और सरकारी मानकों से कोसों दूर हैं। हरियाणा निजी कोचिंग संस्थान पंजीकरण व विनियमन अधिनियम लागू होने के बावजूद जिले में कितने संस्थान पंजीकृत हैं, इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड प्रशासन या शिक्षा विभाग के पास उपलब्ध नहीं है।
अभियान के पहले दिन बिशन स्वरूप कॉलोनी स्थित दो कोचिंग संस्थानों की पड़ताल में सामने आया कि दोनों सेंटर किराए की इमारतों की पहली मंजिल पर संचालित हो रहे हैं। तीन से चार कमरों को छोटे-छोटे केबिन में बांटकर 8 से 10 कक्षाएं चलाई जा रही हैं। प्रवेश और निकास के लिए केवल एक संकरा रास्ता है जो सीढि़यों से होकर जाता है। एक संस्थान में खिड़कियां सड़क की ओर खुलती हैं, जबकि दूसरे में वेंटिलेशन और प्राकृतिक रोशनी की समुचित व्यवस्था तक नहीं मिली।
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सबसे गंभीर बात यह रही कि दोनों संस्थानों में अग्निशमन यंत्र नहीं मिले। फायर एनओसी का रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं कराया गया। आसपास की गलियां इतनी संकरी हैं कि आपात स्थिति में दमकल वाहन सीधे अंदर नहीं पहुंच सकते। भवनों के बाहर गलियों में जनरेटर रखे गए हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है।
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इन संस्थानों में एसएससी और एचएसएससी की कोचिंग के लिए लगभग 9500 रुपये, सीजीएल के लिए 20 हजार रुपये और आईएएस तैयारी के लिए एक लाख रुपये तक फीस वसूली जा रही है। फीस एकमुश्त या दो किस्तों में ली जाती है लेकिन अधिकतर संस्थानों में फीस का व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं मिला। पहले संस्थान में 9 और दूसरे संस्थान में 7 शिक्षक कार्यरत मिले, जिनकी न्यूनतम योग्यता स्नातकोत्तर बताई गई।
शिक्षा विभाग की ओर से गैर-पंजीकृत कोचिंग सेंटरों की कोई नियमित निगरानी, जांच या रिकॉर्ड व्यवस्था नहीं है। विभागीय स्तर पर अब तक किसी सेंटर पर ठोस कार्रवाई भी नहीं की गई। पिछले वर्ष उपायुक्त के आदेश पर नगर निगम ने करीब 60 सेंटरों को नोटिस जरूर भेजे थे, लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पड़ताल में सामने आई प्रमुख बातें-
- जिले में 400 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित।
- अधिकांश संस्थानों के पास पंजीकरण नहीं।
- फायर एनओसी और अग्निशमन उपकरणों का अभाव।
- संकरी गलियों और एकमात्र रास्ते से बढ़ा खतरा।
- 9500 रुपये से 1 लाख रुपये तक फीस।
- शिक्षा विभाग के पास संस्थानों का सटीक रिकॉर्ड नहीं।
- पिछले साल 60 सेंटरों को नोटिस, कार्रवाई शून्य।
जिले में बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर बिना किसी स्पष्ट निगरानी और मानकों के संचालित हो रहे हैं। नियम सभी शिक्षण संस्थानों पर समान रूप से लागू होने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों का हित सुरक्षित रह सके। - बिजेंद्र मान, जिलाध्यक्ष, सहोदय स्कूल एसोशिएशन