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नवरात्र विशेष : मां काली के आठ स्वरूपों में से एक है भद्रकाली शक्तिपीठ, जहां आज भी है घोड़े चढ़ाने की परंपरा
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कुरुक्षेंत्र। श्रीदेवी कूप भद्रकाली मंदिर। संवाद
कुरुक्षेत्र। नौ अप्रैल से शुरू हुए नवरात्र उत्सव के चलते हर कोई श्रद्धा के भवसागर में डूबा है। मंदिरों में अल सुबह से देर रात तक मां के जयकारे गूंज रहे हैं तो वहीं पूजा अर्चना से लेकर भंडारे व अन्य आयोजन के चलते पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। इसी बीच प्रदेश का एकमात्र शक्तिपीठ देवी कूप मां भद्रकाली मंदिर में भी हर रोज श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। मां काली के आठ स्वरूपों में से एक माने जाने वाले श्रीदेवीकूप की मान्यता महाभारतकालीन है, जहां मन्नत पूरी होने पर घोड़े चढ़ाए जाने की परंपरा आज भी है।
ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान शिव सती की मृत देह को लेकर ब्रह्मांड में घूमने लगे तो भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र के जरिए सती के शरीर को कई हिस्सों में बांट दिया। जहां-जहां देवी सती के अंग गिरे वहां पर शक्तिपीठ की स्थापना की गई। ऐसे में स्थित देशभर में 52 शक्तिपीठों में से एक यह भी है। पुराणों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण और बलराम का यहां मुंडन संस्कार भी करवाया गया था। मंदिर का संबंध महाभारत काल से भी माना जाता है। युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को मां भद्रकाली की पूजा-अर्चना करने को कहा था।
राष्ट्रपति तक हो चुके मां के समक्ष नतमस्तक
शक्तिपीठ में राष्ट्रपति से लेकर उपराष्ट्रपति तक नतमस्तक होकर मान्यता अनुसार घोड़े भी चढ़ा चुके हैं। मंदिर में पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, गृहमंत्री अमित शाह व उनकी धर्मपत्नी सोनल शाह, मारिशस के राष्ट्रपति, हिमाचल के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला, प्रणव मुखर्जी के पुत्र सांसद अभिजीत मुखर्जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, कई प्रदेशों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित विभिन्न प्रांतों के दिग्गज राजनेता यहां पहुंच चुके हैं तो वहीं सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एवं उच्चाधिकारी मां भद्रकाली शक्तिपीठ में पूजा अर्चना कर चुके हैं।
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शनिवार को मां भद्रकाली की पूजा का अहम महत्व : सतपाल
पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा बताते हैं कि महाभारत के दौरान पूजा अर्चना करते हुए अर्जुन ने कहा था कि युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद वे यहां पर घोड़ा चढ़ाने आएंगे। युद्ध जीतने के बाद अर्जुन ने माता को अपना श्रेष्ठ घोड़ा अर्पित किया था तभी से ऐसी मान्यता है कि यहां पर श्रद्धालु सोने, चांदी व मिट्टी के घोड़े चढ़ाते हैं। शनिवार को मां भद्रकाली की विशेष पूजा अर्चना होती है और नवरात्रों के समय में मां के पूजन का सबसे उत्तम समय माना जाता है। नौ नवरात्रों के प्रत्येक दिन एक देवी का पूजन होता है। हर नवरात्र उत्सव के दौरान यहां खास व्यवस्था की जाती है और यहां की जाने वाली पूजा अर्चना का प्रसार देश-विदेश तक होता है। व्रतधारी भक्तों को प्रत्येक दिन एक कन्या का पूजन करना चाहिए और फल का ही सेवन करना सबसे उत्तम है।
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ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान शिव सती की मृत देह को लेकर ब्रह्मांड में घूमने लगे तो भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र के जरिए सती के शरीर को कई हिस्सों में बांट दिया। जहां-जहां देवी सती के अंग गिरे वहां पर शक्तिपीठ की स्थापना की गई। ऐसे में स्थित देशभर में 52 शक्तिपीठों में से एक यह भी है। पुराणों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण और बलराम का यहां मुंडन संस्कार भी करवाया गया था। मंदिर का संबंध महाभारत काल से भी माना जाता है। युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को मां भद्रकाली की पूजा-अर्चना करने को कहा था।
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राष्ट्रपति तक हो चुके मां के समक्ष नतमस्तक
शक्तिपीठ में राष्ट्रपति से लेकर उपराष्ट्रपति तक नतमस्तक होकर मान्यता अनुसार घोड़े भी चढ़ा चुके हैं। मंदिर में पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, गृहमंत्री अमित शाह व उनकी धर्मपत्नी सोनल शाह, मारिशस के राष्ट्रपति, हिमाचल के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला, प्रणव मुखर्जी के पुत्र सांसद अभिजीत मुखर्जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, कई प्रदेशों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित विभिन्न प्रांतों के दिग्गज राजनेता यहां पहुंच चुके हैं तो वहीं सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एवं उच्चाधिकारी मां भद्रकाली शक्तिपीठ में पूजा अर्चना कर चुके हैं।
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शनिवार को मां भद्रकाली की पूजा का अहम महत्व : सतपाल
पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा बताते हैं कि महाभारत के दौरान पूजा अर्चना करते हुए अर्जुन ने कहा था कि युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद वे यहां पर घोड़ा चढ़ाने आएंगे। युद्ध जीतने के बाद अर्जुन ने माता को अपना श्रेष्ठ घोड़ा अर्पित किया था तभी से ऐसी मान्यता है कि यहां पर श्रद्धालु सोने, चांदी व मिट्टी के घोड़े चढ़ाते हैं। शनिवार को मां भद्रकाली की विशेष पूजा अर्चना होती है और नवरात्रों के समय में मां के पूजन का सबसे उत्तम समय माना जाता है। नौ नवरात्रों के प्रत्येक दिन एक देवी का पूजन होता है। हर नवरात्र उत्सव के दौरान यहां खास व्यवस्था की जाती है और यहां की जाने वाली पूजा अर्चना का प्रसार देश-विदेश तक होता है। व्रतधारी भक्तों को प्रत्येक दिन एक कन्या का पूजन करना चाहिए और फल का ही सेवन करना सबसे उत्तम है।

कुरुक्षेंत्र। श्रीदेवी कूप भद्रकाली मंदिर। संवाद

कुरुक्षेंत्र। श्रीदेवी कूप भद्रकाली मंदिर। संवाद