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मदर्स डे पर टकटकी लगाए रहीं मुरझाई आंखें, नहीं आया लाल

Mon, 15 May 2017 12:28 AM IST
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला Updated Mon, 15 May 2017 12:28 AM IST
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जिनके चेहरे पर खुशियां लाने के लिए जीवन गुजार दिया वे लाल आज भी अपनी माताओं के मुरझाए चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए नहीं पहुंचे। जिलेभर में मदर्स डे पर कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए, मगर वृद्धाश्रमों में रहने वाली माताएं दिनभर क्या सोच रही हैं, इस बारे में कुरुक्षेत्र आकाश नगर स्थित प्रेरणा संस्था के वृद्धाश्रम में जानकारी ली तो यहां रहने वाली कई माताओं के आंखों में आंसू छलक आए।

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क्योंकि इनमें कुछ अपने इकलौते लाल के तिरस्कार की बदौलत यहां रहने को विवश हैं, तो कोई दो, तीन, चार और पांच बेटों की मां होने के बावजूद वृद्धा आश्रम की शरण लिए है। मां के प्रति श्रद्धा सम्मान और सेवा का भाव रखने वाले बच्चों के लिए भले मदर्स डे के मायने हों, मगर शांति देवी, कृष्णा देवी, ऊषा रानी, वीना, उर्मिला, वर्षा शर्मा के लिए मदर्स डे के मायने बेहद डरावने और किसी अभिशाप जैसे हैं।
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कुरुक्षेत्र के प्रेरणा वृद्धा आश्रम में जीवन बसर करने के विवश यह बुजुर्ग माताएं अब भूल चुकी हैं कि जीवन में कभी कोई ऐसा अवसर आने वाला है कि उनका लाल उन्हें चेहरे पर खुशियां लाने के लिए यहां मदर्स डे या माता-बेटे के रिश्तों को सम्मान देगा। अमर उजाला ने जब उपरोक्त वृद्धा आश्रम में रह रही इन माताओं से बात की तो इनमें से कुछ ने तो यह पूछने पर यह बताने से भी इंकार कर दिया कि उनका कोई बेटा भी है। यहां बता दें कि इनमें ज्यादातर माताएं पिछले 9,10 और 12 साल से यहां रह रही हैं। इस बीच एकआध अवसर ऐसा आया जब उनकी कोई सुध लेने परिवार या रिश्तेदार यहां पहुंचा, मगर अब यह स्वीकार कर चुके हैं कि उनका संस्कार यही वृद्धा आश्रम है और इस वृद्धा आश्रम की व्यवस्था संभाल रही रेणु खुंगर ही उनकी असली औलाद है। जो इनकी बेटी, बेटा, बहू और रिश्तेदार और सब कुछ वही है।
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रेणु खुंगर के मुताबिक आश्रम में इनके रहने के लिए पूरे प्रबंध हैं। वह इन सभी बुजुर्गों में अपनी मां को देखती हैं। इन सभी के कमरों में टीवी और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध हैं, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी ना हो। रेणु खुंगर के मुताबिक आंखों में आंसू छलक आते हैं जब वे अपनी दर्द भरी कहानी सुनाती हैं।

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