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हमारी संस्कृति में माता का स्थान सर्वोपरि
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गीता कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में माता-पिता की आरती करते विद्यार्थी। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। गीता कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सोमवार को मातृ-पितृ पूजन और अभिभावक प्रबोधन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर सभी विद्यार्थियों के माता पिता को बुलाया गया। विद्यार्थियों ने माता-पिता की पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस मौके पर श्रीमद्भागवत गीता वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल कुलश्रेष्ठ ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने संयुक्त परिवार की परिभाषा बताई और कहा कि हमारी संस्कृति में माता का स्थान सर्वोपरि हैं। ऐसा माना जाता है कि बच्चे की सफलता के पीछे मां का ही हाथ होता है।
हमें अपनी संस्कृति की तरफ लौटना चाहिए क्योंकि आज की पाश्चात्य परंपरा रिश्तों को तोड़ रही हैं। सुबह बच्चे जल्दी उठकर माता पिता के चरण स्पर्श करके, भोजन ग्रहण करने से पहले भोजन मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से हमारा भोजन प्रसाद का रूप ले लेता है, छात्राएं वस्त्र पहनते समय अपनी मर्यादा का ध्यान रखें। बच्चे को जिस तरह के संस्कार हम बचपन में देंगे बच्चा वही सीखता है।
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बेटियां भारत का भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में ऐसी अपेक्षा की जाती है कि बालक राम, श्री कृष्ण के रूप में और बालिका माता सीता के समान एक उदाहरण पेश करें। विद्यालय प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष अशोक सिंघल, प्रबंधक भूषण गोयल, महिला प्रतिनिधि डॉ. ममता सूद ,विद्यालय प्राचार्या सुमन उपस्थित रहीं।
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कुरुक्षेत्र। गीता कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सोमवार को मातृ-पितृ पूजन और अभिभावक प्रबोधन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर सभी विद्यार्थियों के माता पिता को बुलाया गया। विद्यार्थियों ने माता-पिता की पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस मौके पर श्रीमद्भागवत गीता वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल कुलश्रेष्ठ ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने संयुक्त परिवार की परिभाषा बताई और कहा कि हमारी संस्कृति में माता का स्थान सर्वोपरि हैं। ऐसा माना जाता है कि बच्चे की सफलता के पीछे मां का ही हाथ होता है।
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हमें अपनी संस्कृति की तरफ लौटना चाहिए क्योंकि आज की पाश्चात्य परंपरा रिश्तों को तोड़ रही हैं। सुबह बच्चे जल्दी उठकर माता पिता के चरण स्पर्श करके, भोजन ग्रहण करने से पहले भोजन मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से हमारा भोजन प्रसाद का रूप ले लेता है, छात्राएं वस्त्र पहनते समय अपनी मर्यादा का ध्यान रखें। बच्चे को जिस तरह के संस्कार हम बचपन में देंगे बच्चा वही सीखता है।
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बेटियां भारत का भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में ऐसी अपेक्षा की जाती है कि बालक राम, श्री कृष्ण के रूप में और बालिका माता सीता के समान एक उदाहरण पेश करें। विद्यालय प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष अशोक सिंघल, प्रबंधक भूषण गोयल, महिला प्रतिनिधि डॉ. ममता सूद ,विद्यालय प्राचार्या सुमन उपस्थित रहीं।