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Kurukshetra News: मीरी-पीरी संस्थान अब एचएसजीएमसी के अधीन, झींडा बोले- संगत की जीत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 13 May 2026 01:11 AM IST
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miri piri institute is now under hsgmc, jhinda said - victory
शाहाबाद। मीरी-पीरी संस्थान में पहुंचने पर पत्रकारों से बातचीत करते एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश
शाहाबाद। मीरी पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च की सेवा संभाल अब हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी करेगी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद न केवल मंगलवार को कमेटी मुख्यालय व संस्थान में दिनभर हलचल रही बल्कि हरियाणा कमेटी ने इस दिशा में काम भी शुरू कर दिया है।
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कमेटी अध्यक्ष जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा सुबह ही पदाधिकारियों व सदस्यों के साथ संस्थान पहुंचे। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए इसे संगत की बड़ी जीत करार दी और कहा कि अब पूरी तरह से सेवा संभाल कर ली जाएगी। संस्थान को चलाने के लिए बोर्ड बनाया जाएगा जिसका चेयरमैन कमेटी का अध्यक्ष ही रहेगा और संस्थान का नाम भी नहीं बदला जाएगा। यहां काम कर रहे चिकित्सक व अन्य कर्मियों के कार्य की भी समीक्षा की जाएगी और जो सही कार्य करेगा उसे ज्यों का त्यों रखा जाएगा।
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उन्होंने कहा कि हरियाणा कमेटी के पक्ष में फैसला आना हरियाणा की सिख संगत के लिए बहुत गौरव की बात है। उन्होंने एसजीपीसी से अपील की कि वे इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में न ले जाएं। उनकी इस अपील को बलदेव सिंह कैमपुरी सहित सदस्यों व सिख नेताओं ने स्वीकार किया। इस पर झींडा ने आभार भी जताया।
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उन्होंने कहा कि हरियाणा की गठित पिछली कमेटी से गलती हुई थी जोकि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बावजूद इस संस्थान पर कब्जा लेने के बजाय मीरी-पीरी संस्थान में सात डॉक्टरों का पैनल बनाया गया था। इसके खिलाफ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने न्यायालय में याचिका दायर की थी। हालांकि अदालत ने एसजीपीसी की याचिका खारिज कर दी जिसके बाद अब संस्थान का संचालन एचएसजीएमसी के अधीन होगा।

उन्होंने बताया कि यहां के सीईओ संदीप इंद्र सिंह चीमा की ओर से उन्हें जानकारी दी कि मीरी-पीरी संस्थान को चलाने में हर महीने लगभग तीन करोड़ 12 लाख रुपये का खर्च आता है, जबकि आमदनी करीब एक करोड़ 26 लाख रुपये है। इस तरह संस्थान हर माह लगभग एक करोड़ 85 लाख रुपये के घाटे में चल रहा है। अब आगे का पूरा खर्च हरियाणा कमेटी वहन करेगी।
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