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Kurukshetra News: प्राकृतिक खेती स्कीम को लेकर हुई बैठक
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कुरुक्षेत्र। सांसद नवीन जिंदल के दिशा मीटिंग में दिए गए आदेशानुसार पशुपालन विभाग के अधिकारियों एवं जिला के गौशाला संचालकों के साथ बैठक का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को प्राकृतिक खेती स्कीम के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उप कृषि निदेशक डाॅ. कर्मचंद ने बताया कि किसान प्राकृतिक खेती पोर्टल पर पंजीकरण करवा सकते हैं। किसान को विभाग की और से घनजीवा अमृत, जीवा अमृत, दशप्रणी, अग्निअस्त, बह्यअस्त इत्यादि बनाने के लिए ड्रम अनुदान पर दिए जाते हैं। किसान को अधिकतम चार ड्रम रुपये तीन हजार अनुदान राशि दिया जा सकता है। दो एकड़ या इससे अधिक प्राकृतिक खेती करने वाले किसान को देसी गाय खरीदने हेतु विभाग की ओर से अधिकतम रुपये 30 हजार की राशि अनुदान पर दी जा रही है।
प्राकृतिक खेती करने वाले पोर्टल पर पंजीकृत किसानों को प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण संस्थान, कुरुक्षेत्र में तीन दिवसीय निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे प्रशिक्षणार्थियों को प्राकृतिक खेती के बारे में गहनता से बताया जाता है तथा फील्ड भ्रमण करवाकर प्रदर्शन प्लाटों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाता है।
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प्राकृतिक खेती को सफल बनाने के लिए देसी गाय का गोबर व गोमूत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। उन्होंने गोशाला संचालकों से अपील की कि गोशाला के कर्मचारियों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण संस्थान में दिलवाया जाए और देसी गाय के गोबर व गोमूत्र से घनजीवा अमृत व जीव अमृत बनाकर इनका व्यावसायिक रूप से प्रयोग किया जाए, जिससे गौशाला की आमदनी बढ़ेगी और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। इस मौके पर डाॅ. जसबीर पंवार, उप मंडल अधिकारी, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, जिला के गौशाला संचालक राजबीर सिंह, करनैल सिंह, अमरजीत सिंह, सोमनाथ सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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उप कृषि निदेशक डाॅ. कर्मचंद ने बताया कि किसान प्राकृतिक खेती पोर्टल पर पंजीकरण करवा सकते हैं। किसान को विभाग की और से घनजीवा अमृत, जीवा अमृत, दशप्रणी, अग्निअस्त, बह्यअस्त इत्यादि बनाने के लिए ड्रम अनुदान पर दिए जाते हैं। किसान को अधिकतम चार ड्रम रुपये तीन हजार अनुदान राशि दिया जा सकता है। दो एकड़ या इससे अधिक प्राकृतिक खेती करने वाले किसान को देसी गाय खरीदने हेतु विभाग की ओर से अधिकतम रुपये 30 हजार की राशि अनुदान पर दी जा रही है।
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प्राकृतिक खेती करने वाले पोर्टल पर पंजीकृत किसानों को प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण संस्थान, कुरुक्षेत्र में तीन दिवसीय निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे प्रशिक्षणार्थियों को प्राकृतिक खेती के बारे में गहनता से बताया जाता है तथा फील्ड भ्रमण करवाकर प्रदर्शन प्लाटों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाता है।
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प्राकृतिक खेती को सफल बनाने के लिए देसी गाय का गोबर व गोमूत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। उन्होंने गोशाला संचालकों से अपील की कि गोशाला के कर्मचारियों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण संस्थान में दिलवाया जाए और देसी गाय के गोबर व गोमूत्र से घनजीवा अमृत व जीव अमृत बनाकर इनका व्यावसायिक रूप से प्रयोग किया जाए, जिससे गौशाला की आमदनी बढ़ेगी और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। इस मौके पर डाॅ. जसबीर पंवार, उप मंडल अधिकारी, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, जिला के गौशाला संचालक राजबीर सिंह, करनैल सिंह, अमरजीत सिंह, सोमनाथ सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।