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Kurukshetra News: खुद चुनौतियों से लड़ी मीरा, कशीदा कारीगरी से 500 महिलाओं को दिया रोजगार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 16 Dec 2023 01:56 AM IST
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Meera herself fought the challenges and provided employment to 500 women through embroidery work.
कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर तट पर सरस मेले में काशीदा कारीगरी से तैयार किए गए वॉल हैंगिग को खरीदती
कुरुक्षेत्र। आर्थिक स्थिति खराब होने से जिंदगी में कई तरह की समस्याएं आईं। कई चुनौतियों का सामना किया। इन समस्याओं का सामना करते हुए मीरा ने कशीदा कारीगरी से न केवल अपने आपको आत्मनिर्भर बनाया बल्कि आज 500 अन्य महिलाओं को भी रोजगार देकर उनके सपनों को पंख लगाए हैं। राजस्थान के बाड़मेर जिले के सांवा गांव की रहने वाली मीरा देवी कशीदा कारीगरी में माहिर है, जो कि पिछले कई वर्ष से राजस्थान की संस्कृति को बेड कवरों और कपड़ों पर हाथ से उकेरती रही है।
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हाथ की कारीगरी को लेकर अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के सरस मेले में पहुंची मीरा देवी की कला लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही है। महोत्सव में स्टॉल पर प्रदर्शित किए गए बेड कवर, कुशन कवर, मेज पॉश, वॉल पेंटिंग और कई तरह के पर्स आकर्षण का केंद्र बने हुए है। कशीदा कारीगरी से तैयार किए इस सामान को पांडुचेरी, मद्रास, केरल, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, बंगलुरु, चेन्नई, मुंबई, दिल्ली, सूरजकुंड मेले सहित कई अन्य मेलों में प्रदर्शित कर चुकी है।
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मीरा देवी ने साल 2019 में 14 महिलाओं को साथ जोड़ मां चामुंडा स्वयं सहायता समूह खड़ा किया और धीरे-धीरे और महिलाएं जुड़ी तो कारवां 36 तक जा पहुंचा और अब गांव की 500 महिलाओं को भी समूह के माध्यम से रोजगार मिला। अब गांव के हर घर में महिलाओं की और से कशीदा कारीगरी की जाने लगी। आर्थिक परिस्थितियों का सामना कर रही महिलाओं के सपने अब साकार होने लगे।
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रोजगार के लिए महिला नहीं जाती घर से बाहर
मीरा देवी का कहना है कि शुरू में 14 महिलाओं को स्वयं सहायता समूह के साथ जोड़ा गया था, काम की मांग ज्यादा हुई तो 22 महिलाओं को फिर समूह से जोड़ा गया। देशभर के मेलों में हिस्सा लेना शुरू किया तो कशीदा कारीगरी की मांग ज्यादा होने लगी, इसके बाद गांव की 500 महिलाओं को भी समूह के माध्यम से कशीदा कारीगरी का काम दिया गया, जिससे उन्हें रोजगार मिला और उनकी आर्थिक स्थिति ठीक हुई, अब बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ने लगे हैं और गांव की कोई भी महिला रोजगार के लिए घर से बाहर नहीं जाती।

कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर तट पर सरस मेले में काशीदा कारीगरी से तैयार किए गए वॉल हैंगिग को खरीदती

कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर तट पर सरस मेले में काशीदा कारीगरी से तैयार किए गए वॉल हैंगिग को खरीदती

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