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हड़ताल और बारिश से बिगड़ी मंडियों की व्यवस्था
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थानेसर अनाज मंडी में बैठक करते आढ़ती। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। आढ़तियों की हड़ताल व बारिश के चलते अनाज मंडियों की व्यवस्था बिगड़ गई है। किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है और मजदूरों को परिवार का गुजारा चलाना मुश्किल हो चुका है। शनिवार को हाईवे जाम कर रहे किसानों की मांगे माने जाने के बावजूद भी मंडियों में हालात ज्यों के त्यों ही रहे।
जहां दिन भर आढ़तियों व अधिकारियों की बैठकों का दौर चलता रहा तो किसान तीन दिन से भीग रही धान को सुखाने में जुटे रहे, लेकिन शाम के समय हुई तेज बारिश ने उनकी मेहनत पर फिर पानी फेर दिया। थानेसर अनाजमंडी में छह सितंबर से धान की आवक शुरू हो गई थी और अब तक 51 हजार 200 क्विंटल धान पहुंच चुका है। इसमें से महज 18 हजार क्विंटल की ही बिक्री हो सकी है।
अनाज मंडी में महज 20 हजार क्विंटल धान शेड के नीचे था जबकि 32 हजार क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे रहा। हालांकि बारिश से बचाने के लिए प्रयास किए गए, लेकिन ये नाकाफी साबित हुए। मंडी में शनिवार तक 46 हजार क्विंटल पीआर धान भी बिक्री की बाट जोहता रहा।
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थानेसर नई अनाजमंडी में शनिवार को आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान दौलत राम बंसल की अध्यक्षता में बैठक हुई। जिसमें आढ़तियों ने अपनी मांगों व हड़ताल से बने हालात पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार को उनकी मांगे जल्द मान लेनी चाहिए, ताकि किसानों को भी नुकसान न हो। इस दौरान उपप्रधान सूबे सिंह, पूर्व प्रधान बलविंद्र सिंह, महासचिव नीरज गाबा, रामकुमार, सुनील मित्तल उर्फ टीटू, बलविंद्र बंसल, सतीश मित्तल, बनी सिंह सहित अन्य आढ़ती भी मौजूद रहे।
नहीं आने देंगे किसानों को परेशानी : हरजीत
मंडी सचिव हरजीत सिंह का कहना है कि धान खरीद को लेकर अभी दिशा-निर्देश नहीं आए हैं। किसानों को किसी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी। जो धान मंडी में पहुंचा है, उसकी सफाई, उतरवाई व रखरखाव को लेकर प्रशासन किसानों का पूरा सहयोग कर रहा है। आढ़तियों के साथ बैठक कर सहयोग करने की अपील भी की गई है। जैसे ही आदेेश आएंगे, खरीद शुरू कर दी जाएगी।
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कुरुक्षेत्र। आढ़तियों की हड़ताल व बारिश के चलते अनाज मंडियों की व्यवस्था बिगड़ गई है। किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है और मजदूरों को परिवार का गुजारा चलाना मुश्किल हो चुका है। शनिवार को हाईवे जाम कर रहे किसानों की मांगे माने जाने के बावजूद भी मंडियों में हालात ज्यों के त्यों ही रहे।
जहां दिन भर आढ़तियों व अधिकारियों की बैठकों का दौर चलता रहा तो किसान तीन दिन से भीग रही धान को सुखाने में जुटे रहे, लेकिन शाम के समय हुई तेज बारिश ने उनकी मेहनत पर फिर पानी फेर दिया। थानेसर अनाजमंडी में छह सितंबर से धान की आवक शुरू हो गई थी और अब तक 51 हजार 200 क्विंटल धान पहुंच चुका है। इसमें से महज 18 हजार क्विंटल की ही बिक्री हो सकी है।
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अनाज मंडी में महज 20 हजार क्विंटल धान शेड के नीचे था जबकि 32 हजार क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे रहा। हालांकि बारिश से बचाने के लिए प्रयास किए गए, लेकिन ये नाकाफी साबित हुए। मंडी में शनिवार तक 46 हजार क्विंटल पीआर धान भी बिक्री की बाट जोहता रहा।
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थानेसर नई अनाजमंडी में शनिवार को आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान दौलत राम बंसल की अध्यक्षता में बैठक हुई। जिसमें आढ़तियों ने अपनी मांगों व हड़ताल से बने हालात पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार को उनकी मांगे जल्द मान लेनी चाहिए, ताकि किसानों को भी नुकसान न हो। इस दौरान उपप्रधान सूबे सिंह, पूर्व प्रधान बलविंद्र सिंह, महासचिव नीरज गाबा, रामकुमार, सुनील मित्तल उर्फ टीटू, बलविंद्र बंसल, सतीश मित्तल, बनी सिंह सहित अन्य आढ़ती भी मौजूद रहे।
नहीं आने देंगे किसानों को परेशानी : हरजीत
मंडी सचिव हरजीत सिंह का कहना है कि धान खरीद को लेकर अभी दिशा-निर्देश नहीं आए हैं। किसानों को किसी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी। जो धान मंडी में पहुंचा है, उसकी सफाई, उतरवाई व रखरखाव को लेकर प्रशासन किसानों का पूरा सहयोग कर रहा है। आढ़तियों के साथ बैठक कर सहयोग करने की अपील भी की गई है। जैसे ही आदेेश आएंगे, खरीद शुरू कर दी जाएगी।

थानेसर अनाज मंडी में धान को सुखाते मजदूर। संवाद- फोटो : Kurukshetra