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मनुष्य को हर समय भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए : शास्त्री
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कुरुक्षेत्र। कथा के दौरान मौजूद अनिल शास्त्री व श्रद्धालु।स्वय
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कुरुक्षेत्र। सेक्टर-नौ लोटस ग्रीन सिटी में श्रीमद्भागवत कथा जारी रही। इसमें कथावाचक अनिल शास्त्री ने श्रोताओं को बताया कि द्वापर युग में कंस ने हिरण्याक्ष के घर पर उसके बेटे के रूप में जन्म लिया था। इसका नाम कालनेमि था। असुर कालनेमि के छह बेटे और एक बेटी हुई। बेटी का नाम वृंदा था।
कथावाचक शास्त्री ने कहा कि वृंदा का विवाह जालंधर राक्षस से हुआ था। वृंदा का बाद में भगवान विष्णु ने वरण किया और वह तुलसी वृंदावन कहलायीं। कालनेमि बहुत दुष्ट था। स्कंद पुराण की एक कथा के अनुसार, उसने दैत्यों की सेना के साथ देवताओं पर आक्रमण कर दिया था ताकि वह अमृत कलश को देवताओं से छीन सकें।
इस पर क्रोधित होकर भगवान विष्णु ने उसका अंत कर दिया। ऐसे में कालनेमि के छह बेटों यानी हिरण्याक्ष के पोते उसके असुर स्वरूप से परिचित थे और इस कारण उन्होंने उसका गुणगान करने से मना कर दिया था। इस कारण उन सभी को हिरण्याक्ष ने श्राप दिया था कि वे पातालवासी हो जाएं। मगर कालनेमि के पुत्रों ने बहुत पुण्य कर्म किए थे जिस कारण उन पर इस श्राप का अलग प्रभाव पड़ा। हिरण्याक्ष ने देवी पृथ्वी को बहुत परेशान किया था। इसके कारण भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष को पानी में डुबो कर मार डाला था। इसके बाद कालनेमि ने राजा उग्रसेन और उनकी पत्नी पद्मावती के घर में कंस के रूप में जन्म लिया।
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कथावाचक शास्त्री ने कहा कि वृंदा का विवाह जालंधर राक्षस से हुआ था। वृंदा का बाद में भगवान विष्णु ने वरण किया और वह तुलसी वृंदावन कहलायीं। कालनेमि बहुत दुष्ट था। स्कंद पुराण की एक कथा के अनुसार, उसने दैत्यों की सेना के साथ देवताओं पर आक्रमण कर दिया था ताकि वह अमृत कलश को देवताओं से छीन सकें।
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इस पर क्रोधित होकर भगवान विष्णु ने उसका अंत कर दिया। ऐसे में कालनेमि के छह बेटों यानी हिरण्याक्ष के पोते उसके असुर स्वरूप से परिचित थे और इस कारण उन्होंने उसका गुणगान करने से मना कर दिया था। इस कारण उन सभी को हिरण्याक्ष ने श्राप दिया था कि वे पातालवासी हो जाएं। मगर कालनेमि के पुत्रों ने बहुत पुण्य कर्म किए थे जिस कारण उन पर इस श्राप का अलग प्रभाव पड़ा। हिरण्याक्ष ने देवी पृथ्वी को बहुत परेशान किया था। इसके कारण भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष को पानी में डुबो कर मार डाला था। इसके बाद कालनेमि ने राजा उग्रसेन और उनकी पत्नी पद्मावती के घर में कंस के रूप में जन्म लिया।

कुरुक्षेत्र। कथा के दौरान मौजूद अनिल शास्त्री व श्रद्धालु।स्वय
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